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भारत में किफायती 5 जी तकनीक की जरूरत

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 14, 2022 | 6:38 PM IST

कोविड-19 से बचाव के टीके पर गहमागहमी के बीच इस महामारी से पैदा हुए विपरीत हालात में दूरसंचार क्षेत्र की भूमिका के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस क्षेत्र की पीठ थपथपाई है। प्रधानमंत्री ने कोविड-19 से त्रस्त साल में हालात सामान्य बनाए रखने में दूरसंचार क्षेत्र के योगदान की सराहना की। पहले ऑनलाइन इंडिया मोबाइल कांग्रेस में उन्होंने कहा कि महामारी के बीच दूरसंचार क्षेत्र द्वारा किए गए नए उपायों से ही दुनिया काम करती रही। इस क्षेत्र की वजह से चिकित्सक मरीजों से, कारोबारी ग्राहकों से और शिक्षक कक्षाओं से जुड़े रहे। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में करोड़ों भारतीयों का जीवन सशक्त और गतिशील बनाने के लिए 5जी तकनीक का इस्तेमाल जल्द से जल्द शुरू करने पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री से सराहना पाने के बाद कर्ज बोझ से दबे और अत्यधिक प्रतिस्पद्र्धा का सामना कर रहे इस क्षेत्र को नई ऊर्जा जरूर मिली है। हालांकि जल्द से जल्द 5जी तकनीक इस्तेमाल में लाने की राह आसान नहीं दिख रही है। यह तभी संभव हो पाएगा जब आगामी नीलामी में आधार मूल्य कम रखा जाए। करोड़ों भारतीय लोगों को 5जी तकनीक तभी प्रभावी रूप से सशक्त बना पाएगी जब यह सस्ती होगी। प्रधानमंत्री ने एक और बात कही जो आपसी मतभेदों से पटे दूरसंचार क्षेत्र के लिए काम की बात हो सकती है। उन्होंने कहा, ‘भविष्य में हमें तेजी से आगे बढऩे के लिए 5जी तकनीक लाने पर मिलकर काम करना होगा।’ यह तकनीक जल्द लाने पर दूरसंचार कंपनियों के बीच मतभेद हैं और यह बात सम्मेलन में भी नजर आई। इंडिया मोबाइल कांग्रेस का आयोजन औपचारिकता से अधिक भरा होता है और रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी और भारती एयरटेल प्रमुख सुनील मित्तल की एक साथ फोटो एकमात्र इसकी उपलब्धि होती है। इस सम्मेलन में इन दोनों दिग्गजों ने जता दिया कि 5जी तकनीक के विषय पर उनकी राय अलग-अलग है। अंबानी ने कहा कि रिलायंस जियो 2021 की पहली छमाही में 5जी क्रांति लेकर आएगी, लेकिन मित्तल ने साफ कर दिया कि भारत को 5जी के लिए तैयार होने में दो से तीन वर्षों का समय लग जाएगा।
हाल में इस समाचारपत्र को दिए साक्षात्कार में मित्तल ने कहा था कि दूरसंचार क्षेत्र में शुल्क का बढऩा इस क्षेत्र की अग्रणी कंपनी रिलायंस जियो पर निर्भर करेगा। 5जी नीलामी में खर्च के मामले में मित्तल जियो के नक्शे कदम पर नहीं चल सकते हैं। जियो 5जी तकनीक लाने की जल्दबाजी में है जबकि भारती एयरटेल फिलहाल इंतजार करना चाहती है। हालांकि प्रधानमंत्री जब एक साथ मिलकर समय पर 5जी तकनीक लाने की बात कर रहे हैं तो क्या इसका यह मतलब निकाला जाए कि अगले साल होने वाली संभावित नीलामी में आरक्षित मूल्य में बदलाव किया जा सकता है? मित्तल यह आधुनिक तकनीक सस्ते दामों में करोड़ों लोगों तक पहुंचाने के लिए निवेशक के अनुकूल मूल्य निर्धारण चाहते हैं। दूरसंचार उद्योग का मानना है कि मूल्य निर्धारण इस तरह होना चाहिए ताकि इस तकनीक के विकास के लिए अधिक से अधिक निवेश आ सके। भारती एयरटेल के साथ वोडाफोन आइडिया भी 5जी स्पेक्ट्रम के लिए प्रति मेगाहट्र्ज 492 करोड़ रुपये के आरक्षित मूल्य का विरोध कर रही है। वित्त मंत्रालय द्वारा गठित एक कार्यबल ने इस वर्ष के शुरू में 5जी सेवाओं के लिए कीमतें कम रखे जाने की सिफारिश की है। कार्य दल ने इस बात की ओर ध्यान खींचा था कि भारत में 5जी का आरक्षित मूल्य दुनिया के बाकी देशों के मुकाबले काफी अधिक था।
कोविड-19 ने हमारे जीवन और रहने के तौर-तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है और हम लगभग पूरी तरह तकनीक पर निर्भर हो गए हैं। ऐसे में सरकार 5जी नीलामी को समाज में गतिविधियां सामान्य बनाए रखने के एक अवसर और असाधारण समय में कारोबार में सहायक एक तकनीक के तौर पर देखेगी, न कि अधिक से अधिक राजस्व अर्जित करने के साधन के रूप में।
दूरसंचार विभाग और वित्त मंत्रालय यह तय करने में जुटे हैं कि 5जी तकनीक के लिए क्या उचित मूल्य निर्धारित किया जाना चाहिए। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) भी बदलती जरूरतों के अनुसार 5जी मसौदे पर दोबारा विचार कर सकता है। ट्राई 5जी पर भारी भरकम कवायद तेज करने के लिए दूरसंचार उद्योग के लिए चीजें पूरी दुरुस्त करने के लिए दूसरे नियामक की तर्ज पर कदम भी उठा सकता है। कुछ दिन पहले ही भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने निजी क्षेत्र के एक बैंक को नए क्रेडिट कार्ड ग्राहक जोडऩे और डिजिटल सेवाओं का विस्तार करने से रोक दिया था। बाद में आरबीआई गवर्नर ने मीडिया को बताया कि बैंकिंग नियामक को उपभोक्ताओं की मदद के लिए अवश्य कदम उठाना चाहिए। इस निजी क्षेत्र के बैंक की डिजिटल सेवाओं में कई बार बाधा आई थी, जिनसे इसके ग्राहकों को काफी परेशानी हुई थी। इससे नाराज होकर आरबीआई ने बैंक के खिलाफ सख्त कदम उठाया। दूरसंचार क्षेत्र की खामियां दुरुस्त करने के लिए भी नियामक कुछ कदम उठा सकता है। ट्राई ने दूरसंचार कंपनियों की सेवा गुणवत्ता पर नवंबर में एक रिपोर्ट जारी की जिसमें कहा गया था कि दूरसंचार कंपनियां प्रदर्शन के कई मानकों पर पीछे चल रही हैं। इसके अनुसार कॉल ड्रॉप और नेटवर्क बाधित होने के साथ ही दूसरी तरह की खामियां भी हैं। उदाहरण के लिए वायरलेस सेवाओं में 90 सेकंड में कंपनियां उपभोक्ताओं के केवल 67.3 प्रतिशत कॉल ही ले पाईं जबकि स्थापित मानक 90 प्रतिशत है।  
ट्राई द्वारा तय मानक के अनुसार सात दिन के भीतर कोई नंबर पूरी तरह बंद हो जाना चाहिए। सच्चाई यह है कि यह दर मात्र 0.91 प्रतिशत है। कंपनियों को 60 दिन के भीतर रकम लौटा देनी चाहिए, लेकिन केवल 60 प्रतिशत मामलों में ही ऐसा होता है। वायरलाइन सेवाओं में भी यह चलन कमोबेश ऐसा ही है। क्या इन खामियों के बीच सेवा की गुणवत्ता सुधरने और 5जी तकनीक अपनाने से पहले दूरसंचार कंपनियों को भी नए ग्राहक जोडऩे से रोकने का मामला बनता है?

First Published : December 16, 2020 | 12:19 AM IST