PPF: सरकार ने पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) पर अप्रैल-जून 2026 तिमाही के लिए ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया है। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरें पहले की तरह ही लागू रहेंगी। इसके तहत PPF पर 7.1 प्रतिशत सालाना ब्याज जारी रहेगा। यह फैसला उन करोड़ों निवेशकों के लिए राहत भरा है जो लंबे समय की सुरक्षित और टैक्स-फ्री बचत के लिए इस योजना पर निर्भर रहते हैं।
PPF क्यों माना जाता है भरोसेमंद निवेश विकल्प
PPF को देश की सबसे सुरक्षित लॉन्ग टर्म सेविंग स्कीम में गिना जाता है। इसमें सरकार की गारंटी होती है और मिलने वाला रिटर्न पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है। यही कारण है कि यह रिटायरमेंट प्लानिंग और फाइनेंशियल सिक्योरिटी के लिए आम निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ है।
ब्याज गणना कैसे होती है?
PPF में ब्याज की गणना हर महीने की सबसे कम शेष राशि पर की जाती है। इसका मतलब है कि 5 तारीख से पहले किए गए निवेश पर पूरे महीने का ब्याज मिलता है। ब्याज हर महीने कैलकुलेट होकर वित्त वर्ष के अंत में खाते में जोड़ा जाता है, जिससे कंपाउंडिंग का फायदा धीरे-धीरे बढ़ता जाता है।
मौजूदा नियम और निवेश सीमा
इस योजना में निवेशक हर साल न्यूनतम ₹500 और अधिकतम ₹1.5 लाख तक निवेश कर सकते हैं। PPF की कुल अवधि 15 साल होती है, हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में इसे समय से पहले बंद करने की अनुमति भी मिलती है।
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पिछले 10 साल में ब्याज दर का ट्रेंड
पिछले एक दशक में PPF की ब्याज दरों में धीरे-धीरे गिरावट आई है, लेकिन हाल के वर्षों में यह स्थिर बनी हुई है। 2016 में यह करीब 8.1 प्रतिशत थी, जो 2017-18 में घटकर 7.6 से 7.8 प्रतिशत के बीच आ गई। 2019-20 में यह लगभग 7.9 प्रतिशत रही, जबकि 2020 से अब तक यह 7.1 प्रतिशत पर स्थिर है।
निवेश के अनुसार अनुमानित रिटर्न (5 साल का उदाहरण)
| वार्षिक निवेश |
कुल निवेश (5 वर्ष) |
अनुमानित रिटर्न |
मैच्योरिटी राशि (लगभग) |
| ₹1,50,000 |
₹7,50,000 |
₹9,00,000 |
₹8,60,000 |
| ₹1,00,000 |
₹5,00,000 |
₹6,00,000 |
₹5,72,000 |
| ₹75,000 |
₹3,75,000 |
₹4,50,000 |
₹4,29,000 |
| ₹50,000 |
₹2,50,000 |
₹3,00,000 |
₹2,86,000 |
| ₹25,000 |
₹1,25,000 |
₹1,50,000 |
₹1,43,000 |
एक्सपर्ट की राय
Personal CFO के फाउंडर Sushil Jain के अनुसार, PPF की 7.1 प्रतिशत स्थिर दर निवेशकों के लिए स्थिरता का संकेत है। उनके मुताबिक, भले ही यह दर ज्यादा आकर्षक न लगे, लेकिन टैक्स छूट और कंपाउंडिंग के चलते यह अब भी लंबी अवधि के निवेश के लिए मजबूत विकल्प है।
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वे यह भी कहते हैं कि PPF में सबसे महत्वपूर्ण बात सही समय पर निवेश करना है, खासकर महीने की 5 तारीख से पहले, ताकि पूरे महीने का ब्याज लाभ मिल सके।
निवेशकों के लिए इसका मतलब
इस फैसले से यह साफ है कि सरकार ने PPF में स्थिरता बनाए रखी है। यह उन निवेशकों के लिए अच्छा संकेत है जो बाजार के उतार-चढ़ाव से दूर रहकर सुरक्षित और अनुमानित रिटर्न चाहते हैं। लंबी अवधि में यह योजना अभी भी रिटायरमेंट और टैक्स सेविंग के लिए एक भरोसेमंद विकल्प बनी हुई है।