क्या आपने कभी सोचा है कि जिस बीमा को आप परिवार का ‘सुरक्षा कवच’ मान रहे हैं, जरूरत पड़ने पर वह सच में उनके काम आएगा? अक्सर लोग जीवन बीमा का भारी-भरकम प्रीमियम भरते हैं और नॉमिनी का नाम लिखकर निश्चिंत हो जाते हैं। लेकिन कड़वा सच यह है कि अगर आप पर कोई कर्ज या देनदारी है, तो आपके जाने के बाद बैंक या लेनदार उस बीमा राशि पर कब्जा कर सकते हैं। साथ ही इसके बाद आपका परिवार कानूनी लड़ाइयों में उलझ सकता है। लेकिन यहीं काम आता है मैरिड वूमेन प्रॉपर्टी एक्ट (MWP Act, 1874)।
गो डिजिट लाइफ इंश्योरेंस की वाइस प्रेसिडेंट (अंडरराइटिंग) जयंती जयराम के मुताबिक, यह छोटा सा कानून आपकी पॉलिसी के इर्द-गिर्द ऐसी अभेद्य दीवार खड़ी कर देता है, जिसे कोई कर्जदार या अदालत भी नहीं भेद सकती। आइए जानते हैं, कैसे एक छोटा सा ‘टिक’ आपके परिवार की खुशियों को हमेशा के लिए महफूज कर सकता है।
आमतौर पर किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी बीमा राशि को उसके ‘एस्टेट’ (संपत्ति) का हिस्सा माना जाता है। जयंती जयराम समझाती हैं कि अगर पॉलिसीधारक पर कोई बिजनेस लोन या होम लोन बकाया है, तो लेनदार उस पैसे को कुर्क (Attach) करने के लिए कानूनी कार्यवाही कर सकते हैं। लेकिन MWP एक्ट की का सेक्शन 6 इस समीकरण को बदल देता है।
जब एक शादीशुदा व्यक्ति इस कानून के तहत पॉलिसी लेता है, तो वह पॉलिसी उसी दिन से एक ‘वैधानिक ट्रस्ट’ बन जाती है। जयंती जयराम इसे एक उदाहरण से स्पष्ट करती हैं, “इसे ऐसे समझिए कि सामान्य पॉलिसी आपके नाम की एक संपत्ति है, लेकिन MWP एक्ट के तहत ली गई पॉलिसी एक ऐसी तिजोरी है जिसकी चाबी सिर्फ आपके परिवार के पास है।”
जयराम के मुताबिक, इस एक्ट के तहत ली गई पॉलिसी को न तो आपके लेनदार छू सकते हैं और न ही कोई अदालत इसे कुर्क कर सकती है। यह पैसा कानूनी रूप से केवल पत्नी और बच्चों के लिए रिजर्व हो जाता है।
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आज की कर्ज आधारित अर्थव्यवस्था में, जहां होम लोन और बिजनेस लायबिलिटी आम बात है, जयंती जयराम का मानना है कि उद्यमियों के लिए यह कानून बेहद जरूरी है। व्यापारिक लेन-देन में कई बार व्यक्तिगत गारंटी देनी पड़ती है। ऐसे में सामान्य लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी न के बराबर सुरक्षा देती है। इसके अलावा, भारत में संयुक्त परिवारों के बीच संपत्ति को लेकर होने वाले विवादों में भी यह एक्ट परिवार की मदद करता है।
जयंती जयराम के अनुसार, यह एक्ट सिर्फ कर्ज से बचाव तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को असली मायने में आर्थिक आजादी भी देता है। इससे यह तय होता है कि पत्नी को बीमा का पैसा सीधे मिल जाए, बिना कोर्ट के चक्कर या विरासत के झगड़ों में फंसे। साथ ही, यह उस पैसे को उन कर्जों से भी सुरक्षित रखता है, जिनमें पत्नी की कोई भूमिका ही नहीं थी।
जयंती जयराम इस सुरक्षा कवच के साथ जुड़ी कुछ जरूरी शर्तों की ओर भी ध्यान दिलाती हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि आप इस विकल्प को केवल पॉलिसी खरीदते समय ही चुन सकते हैं। एक बार पॉलिसी जारी हो गई, तो बाद में इसे MWP एक्ट के दायरे में नहीं लाया जा सकता।
जयंती बताती हैं, “एक बार अगर आपने यह विकल्प चुन लिया, तो यह ‘इर्रिवोकेबल’ यानी बदला नहीं जा सकने वाला हो जाता है। इसका मतलब है कि बाद में आप लाभार्थियों (पत्नी या बच्चों) को बदल नहीं सकते। साथ ही, यह पॉलिसी आपकी व्यक्तिगत संपत्ति नहीं रहती, इसलिए इस पर आप लोन भी नहीं ले सकते।”
जयंती जयराम का कहना है कि जो लोग अपने परिवार के लिए ‘एयरटाइट’ यानी पूरी तरह पुख्ता सुरक्षा चाहते हैं, उनके लिए ये शर्तें एक छोटा सा समझौता हैं।
हालांकि, वह एक अहम अपवाद भी बताती हैं, अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर कर्ज देने वालों को धोखा देने के इरादे से यह पॉलिसी लेता है, तो अदालत लेनदारों के पक्ष में फैसला दे सकती है। आखिर में वह सलाह देती हैं कि सिर्फ प्रीमियम भरना ही काफी नहीं है, असली बात यह है कि पैसा सही हाथों तक पहुंचे। इसलिए अगली बार बीमा लेते समय MWP एक्ट के उस छोटे से ‘चेकबॉक्स’ पर जरूर ध्यान दें।