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ITR Filing: NBFC और HFC में निवेश करने वालों के लिए बड़ा अपडेट, I-T रिटर्न में हुआ यह अहम बदलाव

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NBFC और HFC निवेशकों के लिए ITR में नया नियम आया है, जिसके तहत अब ब्याज से होने वाली आय को तय कॉलम में दिखाना जरूरी होगा, हालांकि टैक्स स्लैब वही रहेगा

Last Updated- April 20, 2026 | 4:46 PM IST
Income Tax Return
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

ITR Filing 2026-27: अगर आपने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के दौरान किसी नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) या हाउसिंग फाइनेंस कंपनी (HFC) की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या डिबेंचर्स में पैसा लगाया है और उससे ब्याज कमाया है, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने असेसमेंट ईयर (AY) 2026-27 के लिए टैक्स रिटर्न भरने के नियमों और फॉर्म में एक जरूरी बदलाव किया है। अब निवेशकों को इस तरह की कमाई को छिपाने या कहीं भी दर्ज करने की छूट नहीं मिलेगी। 

नए नियमों के मुताबिक, NBFC और HFC से मिलने वाली ब्याज की आय को अब एक तय और खास कॉलम में दिखाना जरूरी कर दिया गया है। 31 जुलाई 2026 की डेडलाइन से पहले इन बातों को समझ लेना जरूरी है, ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी न हो।

नए ITR फॉर्म में NBFC और HFC के लिए बना खास कॉलम

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए ITR-2, ITR-3, ITR-5 और ITR-7 फॉर्म में बदलाव किया है। इस बार सबसे बड़ा बदलाव ‘शेड्यूल OS’ (अन्य सोर्स) में हुआ है। पहले कॉर्पोरेट FD या NBFC से मिलने वाले ब्याज को दिखाने के लिए कोई साफ और तय जगह नहीं थी, इसलिए निवेशक इसे अपनी समझ से अलग-अलग जगह पर दर्ज कर देते थे।

अब फॉर्म में ‘Others’ कॉलम के अंदर साफ तौर पर NBFCs, HFCs और दूसरी कंपनियों से मिलने वाले ब्याज को शामिल कर दिया गया है। यह पिछले साल के मुकाबले बड़ा बदलाव है, क्योंकि पहले इसे लेकर काफी कन्फ्यूजन रहता था, जिसे अब टैक्स डिपार्टमेंट ने दूर कर दिया है।

क्या है शेड्यूल OS और क्यों है यह निवेशकों के लिए जरूरी

इनकम टैक्स रिटर्न में ‘शेड्यूल OS’ वह हिस्सा होता है, जहां टैक्सपेयर्स अपनी ऐसी कमाई बताते हैं जो सैलरी, घर, कैपिटल गेन या बिजनेस से नहीं आती। आसान भाषा में कहें तो यह ‘अन्य सोर्स से आय’ का सेक्शन है। असेसमेंट ईयर 2026-27 में इसका दायरा और बढ़ा दिया गया है। अब इसमें सेविंग अकाउंट का ब्याज, बैंक और पोस्ट ऑफिस की FD का ब्याज, इनकम टैक्स रिफंड पर मिलने वाला ब्याज और खास तौर पर कंपनियों व NBFC/HFC से मिलने वाला ब्याज भी शामिल है। 

इसके अलावा 50,000 रुपये से ज्यादा के गिफ्ट, फैमिली पेंशन और इंश्योरेंस कंपनियों से मिलने वाले बोनस की जानकारी भी यहीं देनी होती है। जो लोग पैसा उधार देने के बिजनेस में नहीं हैं, उनके लिए FD और डिबेंचर से होने वाली कमाई भी इसी सेक्शन में दिखानी जरूरी है।

Also Read: इनकम टैक्स के नए नियम लागू: अब 24Q और 26Q की छुट्टी, फॉर्म 138 और 140 से TDS भरना होगा आसान!

टैक्स की दरों में नहीं, सिर्फ रिपोर्टिंग के तरीके में हुआ है बदलाव

कई लोगों के मन में यह सवाल आ सकता है कि क्या इस बदलाव से टैक्स ज्यादा देना पड़ेगा। साफ बात यह है कि टैक्स की दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। NBFC या HFC की FD से मिलने वाले ब्याज पर अब भी आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से ही टैक्स लगेगा। जैसे अगर आप 30% स्लैब में हैं, तो इस आय पर भी 30% टैक्स देना होगा, ठीक वैसे ही जैसे सैलरी या बैंक के ब्याज पर देते हैं। इस बदलाव का मकसद सिर्फ रिपोर्टिंग को साफ और आसान बनाना है, ताकि निवेशक सही जगह पर अपनी आय दिखा सकें।

सही ITR फॉर्म का चुनाव और डेडलाइन का रखें खास ध्यान

इस नए नियम का असर चार तरह के ITR फॉर्म भरने वालों पर पड़ेगा। आम तौर पर सैलरी पाने वाले लोग और रिटायर्ड कर्मचारी, जिनका कोई बिजनेस नहीं है, वे ITR-2 भरते हैं। अगर आप नौकरी या निवेश के साथ कोई छोटा बिजनेस या प्रोफेशन भी करते हैं, तो ITR-3 फॉर्म भरना होगा। वहीं ट्रस्ट और पार्टनरशिप फर्मों के लिए ITR-5 और ITR-7 फॉर्म तय किए गए हैं।

असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए ITR भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है। अगर आप यह डेडलाइन मिस करते हैं, तो धारा 234F के तहत 5,000 रुपये तक की लेट फीस लग सकती है। साथ ही अगर आपका कोई टैक्स बकाया है, तो उस पर ब्याज भी देना पड़ सकता है। इसलिए बेहतर है कि समय रहते अपनी डिटेल्स तैयार रखें, ताकि आखिरी समय में कोई दिक्कत न आए।

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First Published - April 20, 2026 | 4:46 PM IST

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