मुंबई में इस साल अनियमित मॉनसून के दौर नए शुरू किए गए वेदर डेरिवेटिव ‘रेन मुंबई’ को शुरुआत में ही कड़ी परीक्षा का सामना करना पड़ रहा है। देरी से और कहीं-कहीं बारिश की वजह से एनसीडीईएक्स पर ट्रेडिंग गतिविधियों में तेज उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
इस मौसम की शुरुआत धीमी रही, क्योंकि बारिश देर से आई। इस कारण कारोबारियों की भागीदारी भी सीमित रही। 29 मई को लॉन्च के पहले दिन लगभग 14.77 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी के बाद 1 जून को कारोबार तेजी से गिरकर 3.63 करोड़ रुपये रह गया। तब से, गतिविधियों में हल्की बारिश के कारण गिरावट आई है।
उदाहरण के लिए 24 जून को 16.15 करोड़ रुपये के उच्चतम स्तर तक पहुंचकर यह अगले दिन तेजी से गिरकर 9.39 करोड़ रुपये रह गया। पहले हफ्तों में यह कारोबार सीमित दायरे में रहा लेकिन वित्तीय राजधानी में मॉनसून की शुरुआत के बाद से इसमें तेजी आ रही है। इस डेरिवेटिव का उद्देश्य मॉनसून से जुड़े जोखिमों से बचाव करना है।
पिछले सप्ताह तीन आईपीओ बाजार में में आए। 29 मार्च, 2026 को समाप्त हुए सप्ताह के बाद से आईपीओ के लिए यह सबसे व्यस्त सप्ताह था। इस सप्ताह दो आईपीओ- आस्था स्पिनटेक्स और नैक पैकेजिंग खुलने वाले हैं। इन दोनों आईपीओ के लिए ग्रे मार्केट प्रीमियम (जीएमपी) कमजोर है।
नैक पैकेजिंग पर प्रीमियम 8 प्रतिशत और आस्था स्पिनटेक्स का 3.7 प्रतिशत है। मौजूदा जीएमपी से अभी कोई नतीजा नहीं निकालना चाहिए, क्योंकि असली मांग का पता एंकर प्रक्रिया पूरा होने के बाद ही चलता है।
एक बैंकर ने कहा, ‘इसके अलावा, तीन दिन की छुट्टी के बाद बाजार फिर से खुलेगा। इसलिए संस्थागत निवेशक तभी इन मुद्दों पर विचार शुरू करेंगे। आईपीओ की मांग अभी भी कम है क्योंकि जिन वजहों से सेकंडरी बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, वे पूरी तरह से खत्म नहीं हुई हैं। इससे निवेशक ज्यादा सतर्क और सोच-समझकर निवेश करने वाले हो गए हैं, खासकर उन आईपीओ में जिनकी कीमत बहुत ज्यादा रखी गई है।’
भले ही बढ़त कम रही हो, लेकिन पिछले सप्ताह निफ्टी लगातार तीसरे हफ्ते बढ़त के साथ बंद हुआ। यह इसकी इस वर्ष लगातार बढ़त वाली सबसे लंबी अवधि थी। कच्चे तेल की कीमतों में कमी और रुपये को सहारा देने व विदेशी मुद्रा में जमा को बढ़ावा देने वाले नीतिगत उपायों से निवेशकों का भरोसा बढ़ा। पूरे सप्ताह निफ्टी में 0.2 प्रतिशत की बढ़त हुई। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही।
तेल कीमतें पश्चिम एशिया युद्ध से पहले के स्तर पर आ गई हैं। लेकिन पिछले सप्ताह जारी परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) से आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती का पता चला, जबकि कमजोर मॉनसून निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
कुछ बाजार कारोबारियों ने पिछले सप्ताह हुई मामूली बढ़त को दुविधा और किसी खास दिशा के बारे में पक्के भरोसे की कमी का संकेत बताया। एसबीआई सिक्योरिटीज में टेक्निकल और डेरिवेटिव रिसर्च के प्रमुख सुदीप शाह ने कहा, ‘अगले कुछ कारोबारी सत्रों में इंडेक्स के एक तय दायरे में रहने की संभावना है। ऊपर की तरफ, 24,250–24,300 का स्तर बाधा का काम करेगा। अगर इंडेक्स 24300 के ऊपर मजबूती से और टिकाऊ तरीके से बढ़ता है, तो तेजी का अगला दौर 24,500 और फिर अल्पावधि में 24,700 तक जा सकता है।’