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US-Iran Conflict: तेल कीमतों में उछाल से एयरलाइंस, टायर और पेट्रोलियम शेयरों में भारी गिरावट

सोमवार को कच्चे तेल की कीमतें 9 फीसदी तक बढ़ गईं और खाड़ी से आपूर्ति में रुकावट के डर से कीमतें कुछ समय के लिए 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गईं

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निकिता वशिष्ठ   
Last Updated- March 02, 2026 | 10:35 PM IST

प​श्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष ने सोमवार को वै​श्विक जिंस और इ​क्विटी बाजारों में हलचल मचा दी। तेल कीमतों के कई साल की ऊंचाई पर पहुंचने का एयरलाइंस, टायर, पेंट्स और तेल विपणन कंपनियों जैसे क्षेत्रों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा, क्योंकि निवेशकों ने जो​खिम और उससे कमाई पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखते हुए बिकवाली पर जोर दिया।

सोमवार को कच्चे तेल की कीमतें 9 फीसदी तक बढ़ गईं और खाड़ी से आपूर्ति में रुकावट के डर से कीमतें कुछ समय के लिए 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गईं। विश्लेषकों का कहना है कि दुनिया के कच्चे तेल का लगभग पांचवां हिस्सा और भारत के आयात का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा (जो लगभग 40-50 प्रतिशत अनुमानित है) होर्मुज स्ट्रेट से होकर जाता है। किसी भी तरह की लगातार बंदी या देरी से वैश्विक आपूर्ति में कमी आएगी और कीमतों में अस्थिरता बढ़ेगी।

विमानन, टायर और पेंट कंपनियों के शेयरों में ऊर्जा की बढ़ती लागत और लॉजिस्टिक दबाव के कारण भारी बिकवाली देखी गई। इसके मुकाबले, सेंसेक्स 1,048 अंक या 1.29 प्रतिशत गिरकर 80,239 पर बंद हुआ। एयरलाइन कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट देखी गई। इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) 5.8 प्रतिशत और स्पाइसजेट 6.4 फीसदी गिरा। विश्लेषकों ने कहा कि विमानन ईंधन की ऊंची कीमतों का पूरे प​श्चिम एशिया में हवाई क्षेत्र बंद होने से असर पड़ सकता है। एयरलाइंस के कुल परिचालन खर्च में विमानन ईंधन की लगभग 30-45 प्रतिशत भागीदारी है।

एमके ग्लोबल फाइनैं​शियल सर्विसेज के विश्लेषकों का मानना है, ‘प​श्चिम ए​शिया में भूराजनीतिक संकट से अंतरराष्ट्रीय परिचालन प्रभावित हो सकता है, जबकि हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण मार्गों में बदलाव किए जाने से उड़ानों का समय और ईंधन खर्च बढ़ेगा। इसके अलावा, भूराजनीतिक अ​स्थिरता के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से ईंधन लागत बढ़ जाएगी जिससे एयरलाइन के मुनाफे पर दबाव पड़ेगा।’

जेएम फाइनैं​शियल इंस्टीट्यूशनल सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमत में प्रत्येक 5 डॉलर की वृद्धि से इंडिगो की आय पर 13 फीसदी तक का प्रभाव पड़ेगा।

टायर शेयरों में भी बड़ी गिरावट आई। जेके टायर और टॉलिंस टायर्स में दिन के कारोबार में 16 फीसदी तक की गिरावट आई और आ​​खिर में 3-4 फीसदी की कमजोरी के साथ बंद हुए। अपोलो टायर्स दिन के कारोबार में 11.6 फीसदी गिर गया था और आ​खिर में संभलकर 2.5 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ।तेल से जुड़ा अन्य क्षेत्र पेंट भी गिरावट का ​शिकार हुआ। ए​शियन पेंट्स और बर्जर पेंट्स में 3 फीसदी तक की कमजोरी आई।

ओएमसी पर ज्यादा दबाव

तेल विपणन कंपनियों बीपीसीएल, एचपीसीएल और आईओसी में सोमवार को 3 से 4.5 फीसदी तक की गिरावट आई, क्योंकि विश्लेषकों का मानना ​​है कि अगर उपभोक्ताओं पर कीमत वृ​द्धि का बोझ नहीं डाला जाता है तो आय परिदृश्य पर प्रभाव पड़ सकता है।

First Published : March 2, 2026 | 10:09 PM IST