टाटा ग्रुप की रिटेल कंपनी ट्रेंट और जूडियो ब्रांड चलाने वाली कंपनी के शेयरों में पिछले कुछ समय से लगातार गिरावट आ रही है। कंपनी का शेयर 11 अक्टूबर 2024 को ₹8,234.95 के अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा था। लेकिन इसके बाद शेयर लगातार नीचे आता गया। 13 मार्च 2026 को यह गिरकर ₹3,500 पर आ गया, जो 52 हफ्तों का सबसे निचला स्तर है। यानी अपने रिकॉर्ड स्तर से शेयर लगभग 57.5% गिर चुका है। इसके अलावा 30 जून 2025 को बने ₹6,259 के स्तर से भी शेयर करीब 44% नीचे आ चुका है।
ट्रेंट के शेयरों ने पहले निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया था। 6 अप्रैल 2021 को इसका भाव ₹703.65 था, जिसके बाद तेजी से बढ़कर 2024 में रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। इस तेजी की बड़ी वजह जूडियो ब्रांड का तेजी से विस्तार और रिटेल कारोबार में मजबूत बढ़त रही। इसी कारण ट्रेंट को दलाल स्ट्रीट की बड़ी सफलता की कहानी माना जा रहा था।
विश्लेषकों के मुताबिक शेयरों में गिरावट की वजह बाजार की कमजोरी और ज्यादा वैल्यूएशन है। स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट के रिसर्च प्रमुख संतोष मीणा का कहना है कि यह गिरावट किसी बड़े कारोबार संकट की वजह से नहीं है। लंबे समय तक शेयर तेजी से बढ़ा, इसलिए अब उसकी कीमत सामान्य स्तर पर आ रही है। उन्होंने बताया कि FY26 की तीसरी तिमाही में कंपनी की आय 15% बढ़कर ₹5,345 करोड़ रही, लेकिन यह बाजार की उम्मीद से कम थी। साथ ही तेजी से नए स्टोर खुलने, कमजोर मांग और पुराने स्टोर की धीमी बिक्री का भी असर पड़ा। फिर भी शेयर अभी करीब 77 गुना P/E पर कारोबार कर रहा है।
वेल्थमिल्स सिक्योरिटीज के इक्विटी रणनीतिकार क्रांति बाथिनी के अनुसार बाजार में चल रही कमजोरी का असर भी ट्रेंट के शेयर पर पड़ा है। उनका कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में जिन शेयरों ने बहुत ज्यादा रिटर्न दिया, उनमें अब बेचने का दबाव ज्यादा दिख रहा है। इसके अलावा टाटा ग्रुप के कई शेयरों में आई गिरावट और P/E में कमी का असर भी ट्रेंट के शेयर पर पड़ा है।
हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि लंबी अवधि में ट्रेंट का कारोबार मजबूत रह सकता है। संतोष मीणा के अनुसार भारत में संगठित रिटेल अभी भी कम है, इसलिए आने वाले समय में इस क्षेत्र में बढ़ने की काफी संभावना है। उनका कहना है कि प्रीमियम और सस्ते दोनों तरह के रिटेल मॉडल, अच्छे मार्जिन और तेजी से नए स्टोर खोलने की योजना कंपनी की आगे की बढ़त में मदद कर सकती है।
विश्लेषकों का कहना है कि अगर पुराने स्टोर की बिक्री फिर से 20% या उससे ज्यादा बढ़ने लगती है और खपत की मांग में सुधार होता है, तो आने वाले 3 से 5 साल में शेयर फिर से अपने पुराने ऊंचे स्तर को पार कर सकता है।
क्रांति बाथिनी का कहना है कि लंबी अवधि के निवेशक गिरावट में खरीदारी कर सकते हैं। उनके अनुसार युवा आबादी, बढ़ती आय और छोटे शहरों में कारोबार का विस्तार कंपनी की आगे की बढ़त में मदद कर सकता है। उनका मानना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट निवेश का अच्छा मौका हो सकती है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।