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मिडकैप, स्मॉलकैप शेयरों में निवेश घटाने का समय

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 1:46 AM IST

पिछले कुछ महीनों से भारत में प्राथमिक और सेकंडरी बाजार सुर्खियों में हैं। हेलियस कैपिटल के संस्थापक एवं फंड प्रबंधक समीर अरोड़ा ने पुनीत वाधवा को दिए साक्षात्कार में बताया कि यह भरोसा करने का कोई कारण नहीं है कि आमतौर पर मजबूत रहने वाले इक्विटी बाजार आगामी कुछ वर्षों में काफी हद तक निराश करेंगे। पेश हैं उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश: 
इक्विटी, जिंस, मुद्रास्फीति और वैश्विक ऋण स्तरों, सभी में तेजी आ रही है। क्या आप मानते हैं कि कुछ वर्षों में वैश्विक वित्तीय बाजारों के लिए इस तेजी का सिलसिला थम जाएगा?

शेयरों और जिंसों ने 7-10 वर्ष के मजबूत चक्र को देखते हुए यह सही है कि एक दिन यह तेजी बड़ी गिरावट के साथ थम जाएगी। अभी यह मानने का कोई मजबूत कारण नहीं है कि सामान्य तौर पर मजबूत समझे जाने वाले इक्विटी बाजार कुछ और ज्यादा वर्षों तक तेजी का सिलसिला बरकरार नहीं रख पाएंगे।
भारतीय इक्विटी बाजारों के लिए चालू वर्ष 2021 की दूसरी छमाही को आप किस नजरिये से देख रहे हैं?

मैं 2021 की दूसरी छमाही को सूचकांक स्तर पर समेकन की अवधि के तौर पर देख रहा हूं। हमने कुछ खास शेयर खरीदे हैं और इसलिए बाजार में तेजी के नजरिये के साथ हमेशा अच्छे अवसर तलाशते हैं। कोविड की तीसरी लहर चुनौतीपूर्ण होगी, भले ही अन्य देशों के उदाहरण यह संकेत दे रहे हैं कि अर्थव्यवस्था और बाजारों पर इसका प्रभाव सीमित रह सकता है। अनुमान के मुकाबले कमजोर रिकवरी चकित कर सकती है।
मिडकैप, स्मॉलकैप पर आपका क्या नजरिया है?

सामान्य तौर पर, यह समय मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेश घटाने का है, क्योंकि इनके मूल्यांकन कम या ज्यादा, बड़ी और बेहतर कंपनियों के अनुरूप हैं। हमारे पोर्टफोलियो में करीब 70 प्रतिशत कंपनियां लार्ज-कैप से हैं और शेष मिड-स्मॉल कैप से। मार्जिन के मोर्चे पर, हम बड़ी कंपनियों पर ज्यादा ध्यान देंगे।
पूर्वव्यापी कराधान पर सरकार के ताजा रुख के संदर्भ में विदेशी निवेशक भारत में निवेश परिवेश को किस नजरिये से देख रहे हैं?

भारत पहले से ही सभी तरह के विदेशी निवेशकों से मजबूत निवेश प्रवाह आकर्षित कर रहा है, और किसी तरह की समस्या दूर होने से हर किसी को मदद मिलेगी। यही वजह है कि ये बदलाव चक्रों को मजबूत बनाने में मददगार होते हैं, जिनमें ऊंचे एफडीआई से ज्यादा निजी इक्विटी प्रवाह और ज्यादा एफापीआई प्रवाह को बढ़ावा मिलता है।
चीन में घटनाक्रम के संदर्भ में क्या विदेशी फंड भारत को वैकल्पिक निवेश स्थान के तौर पर देख रहे हैं?

एफपीआई औरएफडीआई, और पीई पूंजी भी पहले से ही भारत पर पिछले कुछ वर्षों से मजबूत है। इस संदर्भ में, यह अनुमान जताना उचित है कि जैसे ही विदेशी निवेशक चीन से परहेज करेंगे (और इसकी कई वजह भी हैं), वे भारत में अपना निवेश बढ़ा सकते हैं। इक्विटी बेंचमार्कों में भारत का भारांक चीन के करीब एक-चौथाई पर है। इसलिए चीन से मामूली निकासी भी भारत के लिए निवेश में अच्छी खासी वृद्घि में मददगार होगी। 
ग्रोथ, वैल्यू या मूमेंटम- में से निवेशकों को अब किस पर ध्यान देना चाहिए?

हमें चयन क्यों करना है- हमारा काम बाजारों के लिए लगातार शानदार प्रदर्शन करना है और न सिर्फ चरणबद्घ तरीके से, बल्कि उस तरह से जिसमें, मौजूदा बाजार शैली हमारी निवेश शैली के अनुरूप हो। प्रत्येक कंपनी का आकलन उसकी योग्यता के आधार पर करना होगा, और हमारे पोर्टफोलियो में भारत के सबसे बड़े सरकारी बैंक शामिल हो सकते हैं, जो अच्छी वैल्यू प्रदान करते हैं, जबकि कुछ अन्य शेयर भी शामिल किए जा सकते हैं जो बेहद अच्छी वृद्घि दे सकें।
बीएफएसआई सेक्टर में ऐसी कौन सी कमजोरियां हैं जिनसे धारणा प्रभावित हो सकती है?

हम वित्तीय क्षेत्र – निजी क्षेत्र के बैंक, एक सरकार के स्वामित्व वाला बैंक भी, बीमा, मॉर्गेज फाइनैंस, ब्रोकिंग, वेल्थ मैनेजमेंट, गोल्ड फाइनैंस पर उत्साहित हैं। उपभोक्ता क्षेत्र के विपरीत, बीएफएसआई में मूल्यांकन बहुत ज्यादा नहीं बढ़ा है और पिछले कई वर्षों के दौरान प्रतिफल कंपनियों की री-रेटिंग के बजाय आय वृद्घि के जरिये आया है।

First Published : August 20, 2021 | 12:48 AM IST