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कच्चे तेल की चिंता में शेयर बाजार धड़ाम, सेंसेक्स 1,837 अंक टूटा; निफ्टी 602 अंक फिसला 

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सेंसेक्स जून 2024 के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ जबकि निफ्टी अप्रैल 2025 के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ

Last Updated- March 23, 2026 | 11:16 PM IST
stock Market Crash

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति में लंबे समय तक रुकावट की आशंका के बीच आज शेयर बाजार और रुपये में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। पश्चिम ए​शिया में टकराव से निवेशकों का हौसला कमजोर पड़ रहा है और इससे आर्थिक वृद्धि के प्रभावित होने की चिंता भी बढ़ गई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को खोलने की चेतावनी के जवाब में ईरान की कार्रवाई और फारस की खाड़ी के कई हिस्सों में नए हमलों की खबर से ताजा बिकवाली हुई है। इससे ऊर्जा आपूर्ति और महंगाई को लेकर चिंता और बढ़ गई है। सेंसेक्स 1,837 अंक या 2.5 फीसदी की गिरावट के साथ 72,696 पर बंद हुआ। निफ्टी 602 अंक या 2.6 फीसदी के नुकसान के साथ 22,513 पर बंद हुआ।

सेंसेक्स जून 2024 के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ जबकि निफ्टी अप्रैल 2025 के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ। सूचकांक के कई शेयर अपने 52-हफ्ते के नए निचले स्तर पर आ गए। हालांकि बाजार बंद होने के बाद ट्रंप के बयान से माहौल में थोड़ा सुधार दिखा।

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच ‘सार्थक’ बातचीत हुई है और उन्होंने संभावित हमलों को 5 दिन के लिए टालने की घोषणा की। इससे गिफ्ट सिटी में ट्रेड होने वाले निफ्टी फ्यूचर अनुबंध में भी जबरदस्त उछाल आई। ब्रेंट क्रूड 10 फीसदी गिरकर 96 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। हालांकि वे अभी भी युद्ध से पहले के स्तरों से लगभग 30 फीसदी ऊपर कारोबार कर रहे हैं।

हॉर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है और इसमें आई रुकावट ने हाल के वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र को सबसे जोरदार झटकों में से एक दिया है। भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है, ऐसे में लगातार ऊंची कीमतें अर्थव्यवस्था के लिए बड़े जोखिम पैदा कर सकती हैं। जब से यह टकराव शुरू हुआ है तब से रुपया डॉलर के मुकाबले 3.2 फीसदी कमजोर हुआ है और 93.97 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया।

बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 14 लाख करोड़ रुपये घटकर 415.2 लाख करोड़ रुपये रह गया जो 16 अप्रैल, 2025 के बाद सबसे कम है।

बीएसई पर 3,858 शेयर गिरावट में रहे और केवल 581 शेयरों में बढ़त देखी गई। सभी क्षेत्रीय सूचकांक नुकसान में बंद हुए। आईटी सूचकांक में 0.2 फीसदी और धातु सूचकांक में 4.8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। बाजार में उठापटक मापने वाला सूचकांक इंडिया वीआईएक्स 17.2 फीसदी बढ़कर नौ महीने के ऊंचे स्तर 26.7 पर पहुंच गया। निफ्टी स्मॉलकैप 100और मिडकैप 100सूचकांकों में करीब 4-4 फीसदी की गिरावट आई।

तीन शेयरों के अलावा सेंसेक्स के बाकी सभी शेयर नुकसान में रहे। एचडीएफसी बैंक 4.7 फीसदी गिरावट में रहा ​और सेंसेक्स के कुल नुकसान में इसकी हिस्सेदारी 473 अंक की रही।

पिछले चार हफ्तों से वैश्विक बाजारों में दबाव बना हुआ है क्योंकि तेल की ऊंची कीमतों ने महंगाई और धीमी आर्थिक वृद्धि की आशंका को बढ़ा दिया है। हालांकि ट्रंप द्वारा ईरान के साथ युद्ध की स्थिति में नरमी के संकेत दिए जाने से ज्यादातर बाजारों में सुधार दिखा।

इससे पहले सप्ताहांत में ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि वह होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोल दे अन्यथा उसे अपने ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर व्यापक हमलों का सामना करना पड़ेगा। इसके जवाब में ईरान ने पूरे क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण ठिकानों पर हमले करने की धमकी दी।

घरेलू बाजार में भी मंगलवार को सुधार की उम्मीद है लेकिन यह बढ़त सीमित रह सकती है।

अल्फानीति फिनटेक के सह-संस्थापक यूआर भट्ट ने कहा, ‘गिफ्ट निफ्टी फ्यूचर्स में हम जो देख रहे हैं, वह शायद ज्यादा प्रतिक्रिया हो सकती है। टकराव अभी खत्म होने से बहुत दूर है और जब तक दोनों तरफ से तनाव कम करने के स्पष्ट संकेत नहीं मिलते तब तक अनिश्चितता बनी रहेगी।’

इस महीने बाजार में गिरावट के बाद निफ्टी अपनी अनुमानित 12 महीने की आगे की कमाई के 17.1 गुना पर कारोबार कर रहा है जो 5 साल के औसत 19.6 गुना से कम है। कुछ लोगों का मानना ​​है कि मौजूदा मूल्यांकन खरीदारी का अच्छा मौका है।

3पी इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स में मुख्य निवेश अ​धिकारी प्रशांत जैन ने एक न्यूजलेटर में लिखा है, ‘भारतीय अर्थव्यवस्था तेल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी को झेलने में सक्षम है। कंपनियों की कमाई पर इसका असर सीमित और कुछ समय के लिए ही रहेगा। लार्ज-कैप शेयरों में हाल ही में हुई 10 से 15 फीसदी की गिरावट और मिडकैप व स्मॉलकैप शेयरों में हुई बड़ी गिरावट से नए सिरे से रेटिंग की गुंजाइश बनती है।’

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने शुद्ध रूप से 10,414 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 12,034 करोड़ रुपये की विशुद्ध खरीदार की। इस महीने अब तक एफपीआई भारतीय बाजार से करीब  1 लाख करोड़ रुपये की निकासी कर चुके हैं जो अक्टूबर 2024 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।

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First Published - March 23, 2026 | 10:46 PM IST

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