Stock Market Closing Bell, 27 February 2026: वैश्विक बाजारों से कमजोर रुख के बीच भारतीय शेयर बाजार हफ्ते के अंतिम ट्रेडिंग सेशन यानी शुक्रवार (27 फरवरी) को बड़ी गिरावट में बंद हुए। आईटी शेयरों में बढ़त के बावजूद बैंकिंग, ऑटो और एफएमसीजी जैसे सेक्टरों में बिकवाली से बाजार दबाव में आ गया। इंडेक्स हैवीवेट एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों कमजोरी का भी बाजार पर नेगेटिव असर पड़ा। वहीं, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ रहे तनाव की वजह से निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं और बीच-बीच में मुनाफा वसूली कर रहे हैं।
तीस शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 82,246 अंक पर लगभग सपाट खुला। लेकिन खुलते ही इसमें गिरावट देखी गई। कारोबार के अंत में बिकवाली हावी हो गई और यह 961.42 अंक या 1.17 प्रतिशत की गिरावट लेकर 81,287.19 पर बंद हुआ।
इसी तरह, नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी-50 (Nifty-50) भी गिरावट के साथ 25,459 पर खुला। खुलते ही यह 25,400 के नीचे फिसल गया। अंत में 317.90 अंक या 1.25 फीसदी की गिरावट के साथ 25,178.65 पर बंद हुआ।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में रिसर्च प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ”कमजोर वैश्विक संकेतों और बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों के बीच भारतीय बाजारों में मजबूती की कमी बनी हुई है और निवेशकों का रुख लगातार सतर्क होता जा रहा है। अमेरिका–ईरान न्यूक्लियर वार्ता में प्रगति न होने से पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की आशंका गहरा गई है। साथ ही एआई से जुड़ी अनिश्चितता भी सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुझान बढ़ा रही है।”
उन्होंने कहा, ”घरेलू स्तर पर भी जोखिम से बचने का माहौल है। तिमाही नतीजों का सीजन लगभग समाप्त हो चुका है और अब वैश्विक आर्थिक कारक बाजार की दिशा तय कर रहे हैं। हालिया गिरावट के बाद आईटी शेयरों में चुनिंदा स्तरों पर हल्की खरीदारी दिख रही है। लेकिन व्यापक रुझान अभी भी कमजोर है। विदेशी संस्थागत निवेशक सतर्क बने हुए हैं और उतार-चढ़ाव फिर बढ़ सकता है। ऐसे में बाजार के सीमित दायरे में कारोबार करने की संभावना है। आज जारी होने वाले भारत के तीसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़े, जो अर्थव्यवस्था की मजबूती दिखा सकते हैं, बाजार को कुछ सहारा दे सकते हैं।”
1. भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं ताजा घरेलू संकेतकों की कमी के बीच बाजार की धारणा पर दबाव बनाए हुए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हुई। हालांकि बातचीत जारी रहने की संभावना है, लेकिन अमेरिका के अगले कदम को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
2. शुक्रवार के सेशन में ब्रेंट क्रूड 1 प्रतिशत से अधिक उछला और अमेरिका–ईरान परमाणु वार्ता को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच 71 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार करता रहा।
3. हालिया तेजी के बाद बैंकिंग, मेटल, ऑटो और एफएमसीजी जैसे दिग्गज सेक्टरों में जोरदार मुनाफावसूली देखी गई, जिससे प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ा। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े घरेलू ट्रिगर की कमी के कारण बाजार फिलहाल शेयर-विशेष गतिविधियों के आधार पर चल रहा है।
सेंसेक्स की कंपनियों में मारुति सुजुकी, भारती एयरटेल और बजाज फिनसर्व सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में रहे। दूसरी तरफ, एचसीएल टेक, ट्रेंट लिमिटेड, इंफोसिस बढ़त में रहने में कामयाब रहे। ब्रोडर मार्केट भी प्रमुख इंडेक्स के साथ गिरावट में रहे। निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स क्रमशः 1.14 प्रतिशत और 1.10 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। सेक्टोरल मोर्चे पर निफ्टी रियल्टी और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। ये इंडेक्स क्रमशः 2.3 प्रतिशत और 2.1 प्रतिशत नीचे बंद हुए।
एशियाई बाजारों में शुक्रवार को मिला-जुला रुख रहा। इससे पहले अमेरिका के शेयर बाजार में गिरावट आई थी। अमेरिका में एनवीडिया कंपनी ने तिमाही नतीजे अच्छे दिए, लेकिन इसके बावजूद उसके शेयरों में तेज गिरावट आई। इसका असर टेक्नोलॉजी शेयरों पर पड़ा। जापान का निक्केई सूचकांक 0.6 प्रतिशत गिरा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 1.1 प्रतिशत नीचे रहा। ऑस्ट्रेलिया का बाजार लगभग स्थिर रहा। अमेरिका में डाउ जोंस 0.03 प्रतिशत बढ़ा, लेकिन एसएंडपी 500 में 0.54 प्रतिशत की गिरावट आई। टेक शेयरों वाला नैस्डैक 1.18 प्रतिशत लुढ़क गया।