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Stock Market Crash: ₹7 लाख करोड़ स्वाहा! सेंसेक्स 1000 अंक लुढ़का, बाजार क्यों टूटा? 3 बड़ी वजहें

Stock Market Crash: शेयर बाजार के जानकारों के मुताबिक, बाजार गिरने की सबसे बड़ी वजह आईटी शेयरों में बड़ी बिकवाली है।

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जतिन भूटानी   
Last Updated- February 13, 2026 | 4:03 PM IST

Stock Market Crash: वैश्विक बाजारों में भारी गिरावट की वजह से भारतीय शेयर बाजार में हफ्ते के अंतिम ट्रेडिंग सेशन यानी शुक्रवार (13 फरवरी) को जोरदार बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी की शुरुआत करीब 1% की गिरावट के साथ हुई। वहीं सेंसेक्स भी एक समय पर 700 से 800 अंक तक टूट गया।बीएसई सेंसेक्स भी तेजी से गिरा। यह 82,902 पर खुला और कुछ ही मिनटों में 82,714 तक आ गया। यानी 950 अंक से ज्यादा की गिरावट हो गई। इस दौरान बाजार में लगभग सभी सेक्टरों में बिकवाली देखने को मिली, खासकर मेटल, आईटी, एनर्जी और रियल्टी सेक्टर में।

बैंक निफ्टी भी लाल निशान में रहा। यह 500 अंक से ज्यादा गिरकर 60,233 तक पहुंच गया। इस गिरावट के दौरान बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 472 लाख करोड़ रुपये से घटकर करीब 465 लाख करोड़ रुपये रह गया। यानी निवेषकों को संपत्ति 6 लाख करोड़ रुपये कम हो गई।

शेयर बाजार में गिरावट की 3 बड़ी वजह ?

1. आईटी स्टॉक्स में बिकवाली

शेयर बाजार के जानकारों के मुताबिक, बाजार गिरने की सबसे बड़ी वजह आईटी शेयरों में बड़ी बिकवाली है। कहा जा रहा है कि यह बिकवाली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी चिंताओं की वजह से हुई। आईटी शेयरों का भारतीय बाजार में करीब 10 प्रतिशत हिस्सा है और इनका असर निफ्टी और सेंसेक्स जैसे बड़े इंडेक्स पर काफी ज्यादा पड़ता है।

2. भारत-अमेरिका ट्रीड डील के बाद मुनाफावसूली

फरवरी के पहले हफ्ते में भारतीय शेयर बाजार में जोरदार खरीदारी देखने को मिली। इसकी बड़ी वजह लंबे समय से इंतजार किया जा रहा भारत-अमेरिका व्यापार समझौता रहा। 6 फरवरी को खत्म हुए हफ्ते में सेंसेक्स और निफ्टी 1.5% से ज्यादा चढ़े थे। जानकारों का मानना है कि बाजार में हाल की तेज बढ़त के बाद कुछ निवेशकों का मुनाफावसूली करना स्वाभाविक था।

3. विदेशी निवेशकों की बिकवाली

भारत-अमेरिका और भारत-यूरोपियन यूनियन (EU) के व्यापार समझौतों की घोषणा के बाद, विदेशी निवेशकों (FII) का भरोसा भारतीय शेयर बाजार पर धीरे-धीरे बढ़ता दिख रहा है। गुरुवार को FII और DII दोनों ने नेट खरीदारी की। यानी दोनों ने बाजार में बेचने से ज्यादा खरीदा। लेकिन भारतीय रुपये में उतार-चढ़ाव FIIs के मूड को बिगाड़ सकता है। शुक्रवार सुबह के शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया करीब 0.10% कमजोर नजर आया।

गिरावट के बीच क्या करें निवेशक ?

मास्टर कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड के चीफ रिसर्च ऑफिसर डॉ. रवि सिंह के अनुसार, अभी बाजार में मौके से ज्यादा जोखिम की कीमत लगाई जा रही है। इसके अलावा, अमेरिका में बॉन्ड यील्ड अभी भी करीब 4% के आसपास बनी हुई है। इससे निवेशकों की जोखिम लेने की इच्छा थोड़ी सीमित हो जाती है।

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उन्होंने कहा कि जब बाजार तेजी से ऊपर जाता है, तो बीच-बीच में थोड़ी गिरावट आना सामान्य बात है। इसलिए अभी जो गिरावट दिख रही है, वह घबराहट में बिकवाली नहीं बल्कि निवेशक अपनी पोज़िशन हल्की कर रहे हैं, ऐसा ज्यादा लग रहा है। बाजार की बुनियादी स्थिति में कोई बड़ी खराबी नहीं दिख रही।फिलहाल यह एक सामान्य गिरावट (पुलबैक) जैसी लग रही है। निफ्टी अभी भी 25,500–25,400 के अहम सपोर्ट स्तर से ऊपर बना हुआ है। अभी तक तेज गिरावट या घबराहट में भारी बिकवाली नहीं दिखी है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि लगातार बढ़त के बाद 1–2% की गिरावट बाजार के लिए अच्छी मानी जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि इससे ज्यादा उत्साह कम होता है और इंडिकेटर संतुलित होते हैं।

निवेशकों को क्या रणनीति अपनानी चाहिए?

डॉ. रवि सिंह ने कहा कि निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है। जिनका नजरिया लंबी अवधि का है, वे छोटी गिरावट में धीरे-धीरे अच्छे शेयर खरीद सकते हैं। एक साथ पूरा पैसा लगाने की बजाय थोड़ा-थोड़ा निवेश करना बेहतर रहेगा। कुछ कैश अपने पास रखना समझदारी होगी।

उन्होंने कहा ट्रेडर्स को चाहिए कि वे सपोर्ट स्तर के पास कीमत स्थिर होने का इंतजार करें, उसके बाद नई पोज़िशन लें। यह ऐसा बाजार नहीं है जहां आंख बंद करके तेजी का पीछा किया जाए। मजबूत बैलेंस शीट वाली कंपनियों पर ध्यान दें। उन सेक्टरों को चुनें जो बाकी बाजार से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हों।

First Published : February 13, 2026 | 3:37 PM IST