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एआई, टैरिफ और युद्ध…के बाद अब क्या? रिपोर्ट में खुलासा- बाजार में आने वाला है चौथा बड़ा झटका

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Stock Market: सेंसेक्स में पिछले एक महीने में 12% या 10,000 अंक से ज्यादा की गिरावट आई है। निफ्टी-50 का भी यही हाल है। यह एक महीने में 12% या करीब 3,000 अंक टूट चुका है।

Last Updated- March 23, 2026 | 2:53 PM IST
Stock Market Strategy

Stock Market: ट्रंप टैरिफ और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव के चलते पहले से दबाव झेल रहे भारतीय शेयर बाजार के लिए साल 2026 की शुरुआत किसी बुरे सपने की तरह रही है। मिडिल ईस्ट में युद्ध जैसी स्थिति के कारण दुनिया भर के बाजार लगातार गिर रहे हैं। जाहिर है इसका असर घरेलू बाजारों पर भी पड़ा है। 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल और ईरान में युद्ध शुरू होने के बाद से बेंचमार्क इंडेक्स 10 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए हैं। सेंसेक्स में पिछले एक महीने में 12 प्रतिशत या 10,000 अंक से ज्यादा की गिरावट आई है। निफ्टी-50 का भी यही हाल है। यह एक महीने में 12 प्रतिशत या करीब 3,000 अंक टूट चुका है।

बाजार में इस स्थिति के बीच ब्रोकरेज हॉउस नुवामा ने अपनी ताजा रिपोर्ट में एक बड़ी चेतावनी दी है। ब्रोकरेज के अनुसार, टैरिफ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मिडिल ईस्ट संकट के बाद एक और चिंता बाजार के सामने खड़ी है।

बाजार के सामने अभी एक और चुनौती

नुवामा के इक्विटी रणनीतिकार प्रतीक पारेख ने सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा है कि एआई, टैरिफ और युद्ध के बाद अब वैश्विक अर्थव्यवस्था अगले बड़े झटके यानी मांग में गिरावट की ओर बढ़ सकती है।

पारेख के अनुसार यह साल ऐसे झटकों से भरा रहा है, जो ‘सदी में एक बार होने वाली घटनाएं’ हैं। उन्होंने तीन बड़े कारण बताए—टैरिफ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में तेज बदलाव और हाल में तेल की कीमतों में उबाल का झटका। उन्होंने कहा कि आमतौर पर ऐसा बड़ा झटका जीवन में एक बार आता है। लेकिन पिछले साल तीन बड़े झटके देखे गए।

उनके मुताबिक, बाजार में अब अगला सबसे बड़ा खतरा मांग में गिरावट का है और वो भी अमेरिका में। वहां रोजगार बाजार कमजोर हो रहा है, घर के कर्ज की दरें ऊंची हैं, टैरिफ का दबाव है और तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। इससे लोगों का खर्च घट सकता है। एक और चिंता का विषय लगभग 2 लाख करोड़ डॉलर का निजी कर्ज बाजार है, जो महामारी के बाद से बड़ी मात्रा में कर्ज दे रहा है। अगर यहां पैसों की कमी या दबाव आता है, तो इसका असर पूरी अर्थव्यवस्था की वृद्धि पर पड़ सकता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मौजूदा एआई का दौर इंटरनेट बूम के समय जैसा है। उस समय भी तेजी के बाद गिरावट आई थी। अगर ग्रोथ धीमा पड़ता है या बाजार में नकदी कम होती है, तो वैसा ही असर फिर देखने को मिल सकता है।

भारत के बारे में पारेख का मानना है कि हाल की गिरावट के बावजूद बाजार अभी भी महंगा बना हुआ है। हालांकि निजी बैंक, बीमा और आईटी जैसे कुछ क्षेत्रों में अब मौके दिखने लगे हैं। लेकिन पूरे बाजार में अभी भी कीमतों को लेकर ज्यादा आराम नहीं है।

पीछे भागने से बचने की सलाह

नुवामा की रिपोर्ट के अनुसार बीएसई 500 की करीब 35 प्रतिशत कंपनियां ऐसी हैं, जो स्ट्रक्चरल या अपने क्षेत्र से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। इनमें इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, कंज्यूमर गुड्स, रिटेल कारोबार और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां शामिल हैं। वहीं, लगभग 40 फीसदी हिस्सा ऐसे महंगे चक्रीय क्षेत्रों का है, जैसे वाहन, मेटल और इंडस्ट्रियल कंपनियां, जो आर्थिक झटकों के प्रति ज्यादा संवेदनशील हैं।

कमाई के अनुमान भी काफी ऊंचे नजर आ रहे हैं। वित्त वर्ष 2027 के लिए बीएसई 500 में 19 प्रतिशत बढ़त का अनुमान है। ऐसे में वैश्विक अनिश्चितता के बीच निराशा की गुंजाइश कम बचती है। इस स्थिति को देखते हुए पारेख ने निवेशकों को तेजी के पीछे भागने से बचने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि निवेश करते समय सही कीमत और मजबूत कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए।

ब्रोकरेज ने निजी बैंकों और आईटी सेक्टर में निवेश बढ़ाया है। जबकि बीमा, उपभोक्ता और फार्मा सेक्टर को भी प्राथमिकता दी है। दूसरी ओर, महंगे चक्रीय क्षेत्रों जैसे वाहन, बिजली, सरकारी बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में कम निवेश रखा है और मेटल सेक्टर को भी ऊंची कीमतों के कारण कम महत्व दिया है।

FIIs ने मार्च में ₹88,180 करोड़ के शेयर बेचें

भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव लगातार बढ़ रहा है। मार्च 2026 में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी एफपीआई ने भारतीय इक्विटी बाजार से 88,180 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। इस भारी बिकवाली के पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, कमजोर होता रुपया और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें बड़ी वजह मानी जा रही हैं।

डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, मार्च के पहले तीन हफ्तों में एफपीआई हर कारोबारी दिन शुद्ध विक्रेता रहे। हालांकि यह निकासी अक्टूबर 2024 के रिकॉर्ड 94,017 करोड़ रुपये से थोड़ी कम है, लेकिन मौजूदा हालात चिंता बढ़ा रहे हैं। इस ताजा बिकवाली के साथ ही 2026 में अब तक एफपीआई की कुल निकासी 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुकी है।

दिलचस्प बात यह है कि फरवरी में विदेशी निवेशकों ने बाजार में जोरदार वापसी की थी। उस समय एफपीआई ने 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जो पिछले 17 महीनों का सबसे बड़ा मासिक निवेश था। लेकिन मार्च में हालात तेजी से बदल गए। निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी और जोखिम से दूरी बनानी शुरू कर दी।

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First Published - March 23, 2026 | 2:53 PM IST

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