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सीमेंट सेक्टर में 9% वॉल्यूम ग्रोथ की उम्मीद, लेकिन लागत दबाव से मुनाफे पर सीमित असर

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निर्माण गतिविधियों में तेजी और सरकारी पूंजीगत व्यय के कारण अग्रणी सीमेंट कंपनियां वित्त वर्ष 2026 की मार्च तिमाही में बिक्री वॉल्यूम में अच्छी वृद्धि दर्ज कर सकती हैं

Last Updated- April 14, 2026 | 9:51 PM IST
Cement stocks to buy

निर्माण गतिविधियों में तेजी और सरकारी पूंजीगत व्यय के कारण अग्रणी सीमेंट कंपनियां वित्त वर्ष 2026 की मार्च तिमाही (वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही) में बिक्री वॉल्यूम में अच्छी वृद्धि दर्ज कर सकती हैं। विश्लेषकों का कहना है कि ईंधन और पैकेजिंग की बढ़ती लागत के कारण मुनाफे पर दबाव की संभावना है।

मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज़ के विश्लेषकों का अनुमान है कि उनके सीमेंट कवरेज में शामिल कंपनियां राजस्व में सालाना आधार पर करीब 10 फीसदी की वृद्धि और एबिटा में 4 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी दर्ज करेंगी। वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में कर-पश्चात लाभ में लगभग 1 फीसदी की गिरावट आ सकती है।

परियोजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और निर्माण गतिविधियों में तेजी के कारण सीमेंट के कुल वॉल्यूम में करीब 9 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान है और यह बढ़कर 12.6 करोड़ टन पर पहुंच सकता है। तिमाही के दौरान घरेलू सीमेंट की मांग मज़बूत बनी रही, हालांकि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक उथल-पुथल के कारण इनपुट लागत में बढ़ोतरी से मुनाफे पर दबाव पड़ा।

मिरे ऐसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अक्षय शेट्टी ने बताया कि जनवरी में भारत में कीमतें लगभग 7 से 10 रुपये प्रति कट्टा, फरवरी में 2 से 3 रुपये प्रति कट्टा और मार्च में 4 से 5 रुपये प्रति कट्टा बढ़ी है। इसका मतलब है कि वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में सालाना आधार पर बिक्री से मिलने वाली रकम में 1 से 3 फीसदी तक सुधार की उम्मीद है।

कोटक इंस्टिट्यूशनल इक्विटीज के विश्लेषकों का अनुमान है कि वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में पूरे भारत में औसत कीमतें (जीएसटी में बदलावों के हिसाब से समायोजित) पिछली तिमाही के मुकाबले करीब 1.5 फीसदी और सालाना आधार पर 0.9 फीसदी बढ़ीं। इसकी मुख्य वजह खासकर दक्षिणी बाजारों के नॉन-ट्रेड सेगमेंट में हुआ सुधार था। क्रिसिल रेटिंग्स के निदेशक आनंद कुलकर्णी के अनुसार वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में सीमेंट कंपनियों के मुनाफे में बढ़ोतरी की उम्मीद है, जिसका मुख्य कारण मजबूत मांग और बेहतर कीमतें हैं।

मार्जिन पर पश्चिम एशिया के युद्ध का असर

बेहतर वॉल्यूम और कीमतों के बावजूद अनुमान है कि मार्जिन में बढ़ोतरी सीमित रह सकती है। इसका कारण पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के चलते ऊर्जा और पैकेजिंग लागत में इजाफा है। पश्चिम एशिया संकट के कारण सीमेंट कंपनियों के शेयरों की कीमतों में 11 से 23 फीसदी की गिरावट आई है।

मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज का अनुमान है कि प्रति टन एबिटा सालाना आधार पर 6 फीसदी घटकर लगभग 950 रुपये रह जाएगा। लेकिन परिचालन लाभ के कारण इसके तिमाही आधार पर करीब 15 फीसदी बढ़ने का अनुमान है। औसत एबिटा मार्जिन (ग्रासिम को छोड़कर) सालाना आधार पर 1.2 फीसदी घटकर करीब 18 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।

तिमाही के दौरान आयातित ईंधन की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई। मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज ने बताया कि मार्च 2026 में आयातित पेटकोक और कोयले की औसत कीमतों में मासिक आधार पर 15 से 20 फीसदी की वृद्धि हुई जबकि पॉलीप्रोपिलीन बैग की कीमतों में 35 से 45 फीसदी की उछाल आई, जिससे पैकेजिंग की लागत बढ़ गई।

जेएम फाइनैंशियल के विश्लेषकों का अनुमान है कि मार्च 2026 में अमेरिकी कॉस्ट ऐंड फ्रेट (सीएफआर) पेटकोक की कीमतें बढ़कर लगभग 142 डॉलर प्रति टन हो गईं, जो मार्च 2023 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। इसका मतलब है कि लागत में संभावित रूप से 200 से 220 रुपये प्रति टन की वृद्धि हो सकती है।

इस बीच, येस सिक्योरिटीज के विश्लेषकों ने बताया कि कंपनियां आम तौर पर करीब 45 दिनों का ईंधन स्टॉक रखती हैं, जिससे ऊर्जा की बढ़ती लागत का चौथी तिमाही के मुनाफे पर तत्काल असर सीमित रह सकता है। इसका पूरा असर वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही से दिखने की संभावना है।

कुलकर्णी ने कहा कि चौथी तिमाही की कमाई पर पेटकोक और कोयले की बढ़ी हुई कीमतों का असर मध्यम रहने की संभावना है, क्योंकि कंपनियां कम लागत वाली इन्वेंट्री का इस्तेमाल कर रही हैं। हालांकि, बिजली और ईंधन की लागत उत्पादन लागत का करीब 30 फीसदी होती है, जिससे अगर कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो यह बड़ा जोखिम बन जाती हैं।

संभावना है कि इस तिमाही में बड़े सीमेंट निर्माता वॉल्यूम वृद्धि के मामले में उद्योग के औसत से बेहतर प्रदर्शन करेंगे। जेएम फाइनैंशियल का अनुमान है कि उसके कवरेज में शामिल सीमेंट निर्माताओं का वॉल्यूम सालाना आधार पर करीब 9 फीसदी बढ़ेगा। इनमें अल्ट्राटेक सीमेंट, श्री सीमेंट और जेके सीमेंट के दो अंकों में वृद्धि दर्ज करने की संभावना है। अंबुजा सीमेंट्स करीब 9 फीसदी की वृद्धि दर्ज कर सकती है जबकि डालमिया भारत और जेएसडब्ल्यू सीमेंट 5 से 6 फीसदी की बढ़ोतरी दिखा सकती हैं। इसके विपरीत, रामको सीमेंट्स और बिड़ला कॉरपोरेशन के 2 से 4 फीसदी की वृद्धि के साथ पीछे रहने की संभावना है।

एंबिट कैपिटल के विश्लेषकों का अनुमान है कि इस तिमाही के दौरान अल्ट्राटेक सीमेंट की बाजार हिस्सेदारी बढ़ेगी, जबकि श्री सीमेंट और अंबुजा सीमेंट्स को बाजार हिस्सेदारी में कमी के कारण तय लागत समायोजित करने में अपेक्षाकृत कमजोरी का सामना करना पड़ सकता है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ने कहा कि उद्योग की कंपनियों ने बढ़ती लागत की भरपाई के लिए अप्रैल 2026 में ही प्रति कट्टा करीब 15 से 30 रुपये की बढ़ोतरी शुरू कर दी है।

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First Published - April 14, 2026 | 9:35 PM IST

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