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एक्टिव ग्राहक बढ़े पर ब्रोकरेज के खिलाफ शिकायतें घटीं, तकनीक और जागरूकता का असर

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वित्त वर्ष 2026 के लिए एनएसई के आंकडों पर नजर डालें तो पता चलता है कि ब्रोकरेज फर्मों के खिलाफ कुल 15,770 शिकायतें दर्ज की गईं

Last Updated- May 07, 2026 | 10:00 PM IST
Stock Market today
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

शेयर बाजार में नए निवेशकों की संख्या में शानदार बढ़ोतरी के बावजूद ब्रोकरों से जुड़ी शिकायतों की रफ्तार धीमी हुई है। असल में, एक्सचेंज के आंकड़ों का बिज़नेस स्टैंडर्ड द्वारा किए गए विश्लेषण से पता चला है कि पिछले एक दशक में सक्रिय निवेशकों की संख्या के मुकाबले शिकायतों की संख्या में कमी आई है।

वित्त वर्ष 2026 के लिए एनएसई के आंकडों पर नजर डालें तो पता चलता है कि ब्रोकरेज फर्मों के खिलाफ कुल 15,770 शिकायतें दर्ज की गईं। 4.57 करोड़ सक्रिय ग्राहकों के आधार पर यह आंकड़ा प्रति 10 ग्राहकों पर 340 शिकायतों का बनता है। यह पिछले वर्ष की तुलना में कम है, जब प्रति 10 लाख सक्रिय ग्राहकों पर 400 शिकायतें दर्ज की गई थीं। हाल के आंकड़े, तुलनात्मक आधार पर एक दशक पहले के आंकड़ों से भी कम हैं। वित्त वर्ष 2016 में, हर दस लाख सक्रिय निवेशकों पर 900 शिकायतें मिली थीं। उस समय सक्रिय ग्राहकों की संख्या 52 लाख थी और तब से इसमें 784 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

इसी तरह, इसी अवधि के दौरान बीएसई के ग्राहकों की संख्या में 998 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और यह बढ़कर 2.4 करोड़ हो गई है। लेकिन हर दस लाख सक्रिय ग्राहकों पर शिकायतों की संख्या वित्त वर्ष 2016 के 506 से घटकर वित्त वर्ष 2025 में 34 रह गई है। वित्त वर्ष 2026 के लिए बीएसई के आंकड़े दिसंबर तक उपलब्ध हैं, जिनसे पता चलता है कि हर दस लाख सक्रिय निवेशकों पर 15 शिकायतें मिली हैं।

एक्टिव क्लाइंट्स यानी सक्रिय ग्राहक वे होते हैं जिन्होंने पिछले एक साल में कम से कम एक बार ट्रेड जरूर किया हो। ब्रोकरेज के खिलाफ शिकायतों में फंड या डॉक्यूमेंट्स न मिलना, या बिना सहमति के ट्रेड करना आदि शामिल हो सकते हैं।

इनमें से ज्यादातर प्रक्रियाओं में अब बदलाव आया है। पहले बकाया रकम का भुगतान चेक या डिमांड ड्राफ्ट के जरिये किया जाता था। अब यह काम ज्यादातर इलेक्ट्रॉनिक तरीके से सीधे निवेशक के बैंक खाते में किया जाता है। पहले कॉन्ट्रैक्ट नोट जैसे दस्तावेज डाक से भेजे जाते थे। अब इन्हें अक्सर ईमेल कर दिया जाता है। शेयरों की खरीद-बिक्री अब शायद ही कभी किसी डीलर के जरिये की जाती है। ज्यादातर निवेशक यह काम खुद ही किसी ऑनलाइन ब्रोकरेज पोर्टल या मोबाइल ऐप के जरिये करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों को अपनाने से उन कई रुकावटों को दूर करने में मदद मिली है, जिनकी वजह से पहले शिकायतें आती थीं।

2006 से 2020 के बीच लुधियाना रिटेल इन्वेस्टर्स एसोसिएशन से जुड़े रहे जे आर जैग ने कहा, ‘सिस्टम में सुधार हुआ है। ट्रेडिंग में आने वाली पुरानी दिक्कतें, तकनीकी अपग्रेडेशन की वजह से काफी हद तक खत्म हो गई हैं।’ उन्होंने बताया कि अब शिकायतें ज्यादातर तभी आती हैं, जब किसी तरह की तकनीकी खराबी हो।

मुंबई स्थित ‘इन्वेस्टर एजुकेशन ऐंड वेलफेयर एसोसिएशन’ के अध्यक्ष भावेश वोरा ने इस बात से सहमति जताई कि शिकायतों में काफी कमी आई है। यह संगठन सेबी द्वारा मान्यता प्राप्त संस्था है। उनके अनुसार, शेयर बाजारों की बदलती संरचना के साथ-साथ, निवेशकों की शिक्षा और जागरूकता के लिए नियामकीय हस्तक्षेप ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई है।

निवेशक संघ ‘मिडास टच’ के संस्थापक वीरेंद्र जैन ने बताया कि पुराने समय में निवेशकों की शिकायतें मुख्य रूप से लाभांश न मिलने या दस्तावेजों की डिलिवरी न होने जैसे मुद्दों पर केंद्रित होती थीं। यह संघ कई वर्षों तक निवेशकों के लिए एक हेल्पलाइन चलाता रहा, जिसकी शुरुआत 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट से भी पहले हो गई थी।

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First Published - May 7, 2026 | 9:54 PM IST

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