प्रतिभूति अपील पंचाट (सैट) ने बीएसई लिमिटेड के उस फैसले को सही ठहराया है, जिसमें एक्सचेंज ने जेटकिंग इन्फोट्रेन की ओर से जारी तरजीही शेयरों की सूचीबद्धता को नकार दिया गया था। पंचाट ने कहा कि कंपनी ने अपने मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन (एमओए) में जरूरी बदलाव करने से पहले ही वर्चुअल डिजिटल परिसंपत्तियों (वीडीए) में निवेश कर दिया था। 8 मई के एक आदेश में पंचाट ने बीएसई के फैसले को चुनौती देने वाली जेटकिंग की अपीलों को खारिज कर दिया।
सितंबर 2024 में अपनी सालाना आम बैठक में शेयरधारकों ने कंपनी के एमओए में संशोधन को मंजूरी दी थी, जिससे कंपनी को वर्चुअल या डिजिटल परिसंपत्तियों में निवेश करने, उन्हें खरीदने, अपने पास रखने, बेचने, उनका व्यापार करने और उनमें डील करने की अनुमति मिल गई।
अप्रैल 2025 में बोर्ड ने एक दूसरा संशोधन मंजूर किया। उसके बाद जुलाई 2025 में आरओसी ने इसे मंजूरी दे दी। इस संशोधित नियम के तहत कंपनी को बिटकॉइन, ब्लॉकचेन-आधारित टोकन, नॉन-फंजिबल टोकन (एनएफटी) और वीडीए जैसी अन्य डिजिटल संपत्तियों से जुड़ने की अनुमति मिल गई। साथ ही, उसे ब्लॉकचेन-आधारित तकनीकें और विकेंद्रीकृत वित्त प्लेटफॉर्म भी विकसित करने की इजाजत मिल गई।
अप्रैल 2025 में कंपनी के बोर्ड ने कुछ चुनिंदा प्रमोटर और गैर-प्रमोटर निवेशकों को तरजीही आवंटन के जरिये इक्विटी शेयर जारी करने की मंजूरी दी। मई 2025 में कंपनी को इस निर्गम से रकम प्राप्त हुई और उसने कॉइनडीसीएक्स प्लेटफॉर्म के जरिये इस राशि को वीडीए में निवेश कर दिया।
कार्यवाही के दौरान बीएसई ने यह तर्क दिया कि जब तरजीही इश्यू किया गया था, उस समय जेटकिंग के एमओए में कंपनी को वीडीए में निवेश के लिए फंड जुटाने की अनुमति नहीं थी।