आज भारतीय मुद्रा बाजार में तेज उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है। बुधवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 20 पैसे टूटकर 95.16 के स्तर पर पहुंच गया। पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के तनाव और ईरान-अमेरिका के बीच सैन्य टकराव की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसका असर सिर्फ रुपये पर ही नहीं, बल्कि कच्चे तेल की कीमतों और भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। मंगलवार को रुपया 94.96 पर बंद हुआ था, लेकिन बुधवार को बाजार खुलते ही इसमें तेज गिरावट दर्ज की गई।
रुपये में कमजोरी की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। ईरान द्वारा तीन जहाजों पर हमले के बाद अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की है। इससे कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने की आशंका बढ़ गई है। नतीजतन, ब्रेंट क्रूड की कीमत 2.5% से अधिक उछलकर 76 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ने का खतरा पैदा होता है, जिसका सीधा दबाव रुपये पर पड़ता है।
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स के हेड ऑफ ट्रेजरी और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, अनिल कुमार भंसाली ने बताया कि डॉलर इंडेक्स में मजबूती और कच्चे तेल के 76 डॉलर के पार पहुंचने से भारत समेत ज्यादातर एशियाई देशों की करेंसी नीचे गिरी हैं। हालांकि, उन्होंने आगे राहत की भी उम्मीद जताई। उनके मुताबिक, एक अमेरिकी संस्था का अनुमान है कि 2026 तक कच्चे तेल का औसत भाव घटकर करीब 74 डॉलर प्रति बैरल रह सकता है। फिलहाल, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती दिखाने वाला डॉलर इंडेक्स 101.08 पर है। डॉलर के मजबूत रहने से रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है।
बुधवार सुबह शेयर बाजार भी दबाव में दिखा। सेंसेक्स करीब 537 अंक और निफ्टी 163 अंक की गिरावट के साथ खुले। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, जब विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकालते हैं, तो डॉलर की मांग बढ़ जाती है। इससे रुपया कमजोर पड़ने लगता है। वहीं, दुनिया की छह प्रमुख करेंसी के मुकाबले डॉलर की मजबूती दिखाने वाला डॉलर इंडेक्स 101.08 के स्तर पर बना हुआ है, जो डॉलर की मजबूती दिखाता है। इसका असर सिर्फ भारत पर नहीं, बल्कि एशिया की कई दूसरी मुद्राओं पर भी पड़ रहा है।
पीटीआई के इनपुट के साथ