हाल के वर्षों में फंड कंपनियों की संख्या में तीव्र बढ़ोतरी हुई है। इसके बावजूद म्युचुअल फंड कारोबार में उतरने की इच्छुक कंपनियों की संख्या बढ़ रही है। अभी नौ कंपनियां बाजार नियामक सेबी की मंजूरी का इंतजार कर रही हैं।
30 जून 2026 तक आठ आवेदकों को सैद्धांतिक मंजूरी का इंतजार था। मार्सेलस म्युचुअल फंड को सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी थी और वह अंतिम पंजीकरण का इंतजार कर रहा है। अप्रैल-जून तिमाही के दौरान तीन नई कंपनियों वन फाइनैंस, नॉर्थईस्ट ब्रोकिंग सर्विसेज और आशिका स्टॉक सर्विसेज ने आवेदन किए। सैद्धांतिक मंजूरी का इंतजार कर रहे अन्य आवेदकों में एसटी एडवाइज़र्स, प्रभुदास लीलाधर, आईथॉट फाइनैंशियल कंसल्टिंग, परी वॉशिंगटन कंपनी और अरिहंत कैपिटल मार्केट्स शामिल हैं।
पिछले कुछ सालों में इस उद्योग में लगातार विस्तार हुआ है। इसी के चलते अब कई नए फंड हाउस आने की तैयारी में हैं। भारत में अभी 55 फंड कंपनियां काम कर रही हैं। वे कुल मिलाकर 82.2 लाख करोड़ रुपये के फंडों का प्रबंधन करती हैं। इसके साथ ही इक्विटी में लगातार निवेश, सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) में रिकॉर्ड निवेश और आम निवेशकों की बढ़ती भागीदारी से उद्योग की कुल परिसंपत्तियों में तीन गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है।
सेंस एंड सिम्पलिसिटी के संस्थापक और सीईओ सुनील सुब्रमण्यम ने कहा, म्युचुअल फंड उद्योग में नई कंपनियों के आने की कई वजहें हैं।