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कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर से नीचे आते ही OMC शेयरों में खरीदारी, HPCL-BPCL चमके

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ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे फिसलते ही HPCL, BPCL और IOC के शेयरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली

Last Updated- June 12, 2026 | 3:50 PM IST
Oil and Gas Stocks

कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट का असर शुक्रवार को शेयर बाजार में भी देखने को मिला। तेल मार्केटिंग कंपनियों यानी OMCs के शेयरों में जोरदार खरीदारी हुई, जबकि कच्चा तेल निकालने वाली कंपनियों के शेयर दबाव में रहे। निवेशकों का मानना है कि सस्ता कच्चा तेल HPCL, BPCL और IOC जैसी कंपनियों के लिए अच्छी खबर है।

शुक्रवार सुबह कारोबार के दौरान हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) के शेयरों में 3 से 5 फीसदी तक की तेजी देखने को मिली। दूसरी तरफ ONGC और Oil India के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।

OMC शेयर क्यों चढ़े?

OMC कंपनियां कच्चा तेल खरीदकर उससे पेट्रोल, डीजल और दूसरे ईंधन तैयार करती हैं। ऐसे में जब कच्चे तेल की कीमत घटती है तो इनकी लागत कम हो जाती है। सरल भाषा में कहें तो कच्चा तेल इन कंपनियों का मुख्य कच्चा माल है। जब यही सस्ता हो जाता है तो कंपनियों का मार्जिन बढ़ने की उम्मीद पैदा होती है। यही वजह है कि तेल की कीमतों में गिरावट आते ही निवेशकों ने HPCL, BPCL और IOC के शेयरों में खरीदारी शुरू कर दी।

ONGC और Oil India पर क्यों दबाव?

दूसरी तरफ ONGC और Oil India जैसी कंपनियां कच्चा तेल निकालती हैं और उसे बेचती हैं। इनके लिए तेल की कीमत गिरना अच्छी खबर नहीं होती। इन कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय कीमतों के हिसाब से तेल बेचने का पैसा मिलता है। ऐसे में जब ब्रेंट क्रूड सस्ता होता है तो प्रति बैरल मिलने वाली कमाई भी घट जाती है। इसका सीधा असर उनकी आय और मुनाफे पर पड़ता है।

90 डॉलर से नीचे क्यों आया तेल?

ब्रेंट क्रूड की कीमत शुक्रवार को 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे फिसलकर करीब 88.55 डॉलर पर पहुंच गई। इसकी बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की खबरें रहीं। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित हमले की योजना को फिलहाल टाल दिया। इसके बाद बाजार को उम्मीद जगी कि पश्चिम एशिया में तनाव और नहीं बढ़ेगा। निवेशकों को यह भी उम्मीद है कि अगर हालात सामान्य रहते हैं तो होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल आपूर्ति पर खतरा कम होगा। इसी वजह से तेल में पहले जो ‘वॉर प्रीमियम’ जुड़ गया था, वह अब धीरे-धीरे निकल रहा है।

एक्सपर्ट की क्या राय है?

बोनांजा की रिसर्च एनालिस्ट खुशी मिस्त्री के मुताबिक पिछले एक महीने में कच्चे तेल की कीमत करीब 15 फीसदी गिर चुकी है। उनका कहना है कि तेल की कीमतों में गिरावट कमजोर मांग की वजह से नहीं, बल्कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की वजह से आई है।

उनके अनुसार, अगर यह स्थिति बनी रहती है तो OMC कंपनियां ONGC और Oil India जैसी अपस्ट्रीम कंपनियों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। हालांकि अगर तनाव फिर बढ़ता है और तेल की कीमतों में दोबारा उछाल आता है तो तस्वीर बदल सकती है।

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय एक्सपर्ट की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)

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First Published - June 12, 2026 | 3:50 PM IST

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