साल 2026 में अब तक आईटी सेक्टर का हाल काफी कमजोर रहा है। निफ्टी आईटी इंडेक्स जहां करीब 28 प्रतिशत टूट चुका है, वहीं Oracle Financial Services Software यानी OFSS इस गिरते बाजार में भी मजबूती से खड़ा नजर आया। कंपनी का शेयर इस साल अब तक करीब 16 प्रतिशत चढ़ा है। यही वजह है कि OFSS निफ्टी आईटी की इकलौती ऐसी कंपनी बन गई है जिसने निवेशकों को पॉजिटिव रिटर्न दिया है।
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि OFSS का बिजनेस मॉडल बाकी आईटी कंपनियों से काफी अलग है। Infosys, TCS या Wipro जैसी कंपनियां मुख्य तौर पर आईटी सर्विसेज और आउटसोर्सिंग पर निर्भर हैं, जबकि OFSS बैंकिंग सॉफ्टवेयर और टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स बनाती है। दुनिया भर के बड़े बैंक इसके सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हैं और एक बार सिस्टम लगने के बाद बैंक आसानी से उसे बदलते नहीं हैं। इसी वजह से कंपनी को लगातार स्थिर कमाई मिलती रहती है और बाजार में इसकी पकड़ मजबूत बनी रहती है।
इस साल निफ्टी आईटी की लगभग सभी बड़ी कंपनियों के शेयर दबाव में रहे हैं। सबसे ज्यादा गिरावट LTIMindtree में देखने को मिली, जिसका शेयर करीब 35 प्रतिशत टूट गया। Infosys, HCL Tech और TCS भी करीब 30 प्रतिशत तक गिर चुके हैं। Wipro, Persistent, Mphasis, Coforge और Tech Mahindra जैसी कंपनियों में भी बड़ी कमजोरी देखने को मिली है।
असल में पूरी आईटी इंडस्ट्री इस समय कई चुनौतियों से जूझ रही है। अमेरिका और यूरोप जैसे बड़े बाजारों में कंपनियां खर्च कम कर रही हैं। नए प्रोजेक्ट्स आने की रफ्तार धीमी हो गई है। ऊपर से AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वजह से पारंपरिक आईटी सर्विस मॉडल पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। निवेशकों को डर है कि आने वाले समय में AI कई कामों को ऑटोमेट कर सकता है, जिससे आईटी कंपनियों की ग्रोथ प्रभावित हो सकती है।
OFSS के हालिया नतीजे भी काफी मजबूत रहे हैं। मार्च 2026 तिमाही में कंपनी की आय करीब 20 प्रतिशत बढ़कर 2,065 करोड़ रुपये पहुंच गई। वहीं कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट 39 प्रतिशत उछलकर 1,049 करोड़ रुपये हो गया। नेट प्रॉफिट भी 31 प्रतिशत बढ़कर 842 करोड़ रुपये रहा।
विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनी ने AI और ऑटोमेशन की मदद से अपनी लागत को बेहतर तरीके से कंट्रोल किया है, जिसका फायदा सीधे मुनाफे में दिख रहा है। इसके अलावा कंपनी को हाल ही में 100 मिलियन डॉलर का बड़ा ग्लोबल बैंकिंग ट्रांसफॉर्मेशन कॉन्ट्रैक्ट भी मिला है। इससे आने वाले कुछ सालों के लिए कंपनी की कमाई को लेकर भरोसा और मजबूत हुआ है।
दुनिया भर के बैंक अब तेजी से अपने पुराने सिस्टम बदलकर क्लाउड, AI और डिजिटल टेक्नोलॉजी की तरफ बढ़ रहे हैं। OFSS इसी बदलाव का बड़ा फायदा उठाने की स्थिति में नजर आ रही है। कंपनी के FLEXCUBE और OBDX जैसे प्लेटफॉर्म बैंकिंग इंडस्ट्री में काफी लोकप्रिय हैं और इन्हें बदलना आसान नहीं होता। यही वजह है कि कंपनी के पास लंबे समय तक चलने वाला बिजनेस बना रहता है।
हालांकि एक्सपर्ट्स यह भी मानते हैं कि कंपनी की आगे की तेजी इस बात पर निर्भर करेगी कि उसे लगातार नए बड़े कॉन्ट्रैक्ट मिलते रहें और वह अपने मुनाफे का स्तर बनाए रख पाए।
विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय आईटी सेक्टर की रिकवरी धीरे-धीरे होगी। FY27 को ट्रांजिशन यानी बदलाव का साल माना जा रहा है, जबकि असली तेजी FY28 से देखने को मिल सकती है।
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर अमेरिका और यूरोप में खर्च बढ़ता है, नए टेक प्रोजेक्ट्स शुरू होते हैं और AI से जुड़े बड़े कॉन्ट्रैक्ट मिलने लगते हैं, तब आईटी कंपनियों की ग्रोथ दोबारा पटरी पर लौट सकती है।
लेकिन फिलहाल माहौल आसान नहीं दिख रहा। OpenAI जैसी कंपनियां अब सीधे एंटरप्राइज बिजनेस में उतर रही हैं, जिससे पारंपरिक आईटी कंपनियों के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती है। ऐसे में आने वाले समय में वही कंपनियां आगे निकलेंगी जिनके पास मजबूत AI टेक्नोलॉजी, अपने सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म और अलग तरह की डिजिटल क्षमताएं होंगी।