NSE IPO: देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई के बहुप्रतीक्षित आईपीओ को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिकक एनएसई अपने पब्लिक इश्यू में 5.26 लाख करोड़ रुपये यानी करीब 55 अरब डॉलर तक का वैल्युएशन हासिल करने की तैयारी कर रहा है।
मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक, संभावित निवेशकों के साथ हुई बैठकों में एनएसई के शेयर के लिए 2,000 से 2,100 रुपये तक की कीमत पेश की गई है। हालांकि, आईपीओ के वैल्युएशंस, कीमत और दूसरी शर्तों पर अभी बातचीत चल रही है। इनमें बदलाव भी हो सकता है।
अगर एनएसई को 55 अरब डॉलर का वैल्युएशंस मिलता है तो आईपीओ में करीब 6 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर लगभग 31,500 करोड़ रुपये जुटाए जा सकते हैं। इस लिहाज से एनएसई का आईपीओ हुंडई मोटर इंडिया को पीछे छोड़कर देश का अब तक का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू बन सकता है। बता दें कि हुंडई मोटर इंडिया ने 2024 में अपने आईपीओ से करीब 27,870 करोड़ रुपये जुटाए थे।
एनएसई ने जून 2026 में मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास आईपीओ के लिए ड्राफ्ट दस्तावेज जमा किए थे। प्रस्तावित आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस होगा। इसमें मौजूदा शेयरधारक 14.89 करोड़ तक शेयर बेच सकते हैं, जो कंपनी की करीब 6 फीसदी हिस्सेदारी के बराबर है ओएफएस होने के कारण आईपीओ से मिलने वाली रकम एनएसई को नहीं मिलेगी। यह पैसा शेयर बेचने वाले मौजूदा निवेशकों के पास जाएगा।
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सूत्रों के मुताबिक, एनएसई ने संभावित निवेशकों के सामने प्रति शेयर 2,000 से 2,100 रुपये तक की कीमत रखी है। ऊपरी स्तर के आधार पर एक्सचेंज का मूल्यांकन करीब 5.26 लाख करोड़ रुपये बैठता है।
हालांकि, यह आईपीओ का आधिकारिक प्राइस बैंड नहीं है। अंतिम कीमत सेबी की मंजूरी, निवेशकों की मांग और बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए तय की जाएगी।
एनएसई के प्रतिनिधि ने वैल्युएशंस और संभावित कीमत पर टिप्पणी करने से इनकार किया। कंपनी ने केवल इतना कहा कि वह बाजार नियामक के पास ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस जमा कर चुकी है।
एनएसई को अपने ड्राफ्ट दस्तावेजों पर अगस्त की शुरुआत तक सेबी की मंजूरी मिलने की उम्मीद थी। लेकिन शेयर बेचने वाले निवेशकों की सूची में एसबीआई कैपिटल मार्केट्स को शामिल किए जाने के कारण समयसीमा करीब तीन हफ्ते आगे खिसक गई है।
आईपीओ दस्तावेजों में बदलाव के बाद लोगों से सुझाव और प्रतिक्रिया लेने के लिए 21 दिन का समय देना जरूरी है। ऐसे में एनएसई का आईपीओ सितंबर के दूसरे पखवाड़े में लॉन्च होने की संभावना है। आईपीओ की तारीख, प्राइस बैंड और लॉट साइज अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं किए गए हैं।
एनएसई ने आईपीओ से पहले वैश्विक निवेशकों की रुचि जानने के लिए कई देशों में रोड शो किए हैं। सूत्रों के मुताबिक एक्सचेंज ने बोस्टन, न्यूयॉर्क, सैन फ्रांसिस्को, लंदन, सिंगापुर और हांगकांग में निवेशकों से मुलाकात की है। पश्चिम एशिया में कुछ बैठकें अभी बाकी हैं। इन बैठकों में करीब 120 बड़े वैश्विक निवेशक शामिल हुए। इनमें ब्लैकरॉक, कैपिटल ग्रुप, जीक्यूजी पार्टनर्स, जानस हेंडरसन ग्रुप और ऑलस्प्रिंग ग्लोबल इन्वेस्टमेंट्स जैसे नाम शामिल हैं।
अगर एनएसई को 55 अरब डॉलर का मूल्यांकन मिलता है तो यह बाजार मूल्य के लिहाज से दुनिया का छठा सबसे बड़ा एक्सचेंज संचालक बन सकता है। इस स्थिति में एनएसई का मूल्यांकन लंदन स्टॉक एक्सचेंज ग्रुप से थोड़ा कम, लेकिन नैस्डैक से ज्यादा हो सकता है। फिलहाल सीएमई ग्रुप और इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज करीब 97 अरब डॉलर और 86.9 अरब डॉलर के मूल्यांकन के साथ इस सूची में सबसे आगे हैं। एनएसई ट्रेडिंग वॉल्यूम के लिहाज से दुनिया का सबसे बड़ा डेरिवेटिव एक्सचेंज है।
एनएसई ने आईपीओ की प्रक्रिया संभालने के लिए 20 बैंकों को नियुक्त किया है। इनमें कोटक महिंद्रा कैपिटल, जेएम फाइनेंशियल, मॉर्गन स्टेनली, एचएसबीसी और सिटीग्रुप शामिल हैं।
एनएसई ने पहली बार 2016 में सूचीबद्ध होने की कोशिश की थी। लेकिन को-लोकेशन विवाद और नियामकीय जांच के चलते इसकी लिस्टिंग लंबे समय तक अटकी रही। अब करीब एक दशक बाद एक्सचेंज का आईपीओ भारतीय पूंजी बाजार के सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गमों में शामिल होने की ओर बढ़ रहा है।
(एजेंसी के इनपुट के साथ)