नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE ने शेयरों की ओपनिंग कीमत तय करने वाले प्री-ओपन सेशन के नियमों में बदलाव किया है। नई व्यवस्था में बाजार खुलने से पहले ऑर्डर लगाने, बदलने और रद्द करने के समय में बदलाव किया गया है। हालांकि प्री-ओपन सेशन का कुल समय पहले की तरह सुबह 9 बजे से 9:15 बजे तक ही रहेगा।
नई व्यवस्था इक्विटी कैश मार्केट के सभी शेयरों पर लागू होगी। इसमें SME शेयर, InvITs और REITs भी शामिल हैं। इसके अलावा डेरिवेटिव सेगमेंट भी इसके दायरे में आएगा।
नई व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव शुरुआती 5 मिनट को लेकर है। पहले निवेशकों को ऑर्डर लगाने, बदलने या रद्द करने के लिए सुबह 9 बजे से 9:08 बजे तक का समय मिलता था। अब इस प्रक्रिया को अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया गया है।
नई व्यवस्था के तहत सुबह 9 बजे से 9:05 बजे तक निवेशक मार्केट और लिमिट दोनों तरह के ऑर्डर लगा सकेंगे। इस दौरान ऑर्डर को बदलने या रद्द करने की भी सुविधा होगी। पुरानी व्यवस्था में इसके लिए सुबह 9 बजे से 9:08 बजे तक का समय मिलता था।
SBI Securities के टेक्निकल एंड डेरिवेटिव्स रिसर्च हेड सुदीप शाह के मुताबिक, इस बदलाव के बाद ट्रेडर्स के लिए शुरुआती पांच मिनट ज्यादा अहम हो जाएंगे। खासकर तब, जब रातभर में किसी बड़ी खबर या ग्लोबल मार्केट की हलचल के कारण शेयरों में बड़े गैप-अप या गैप-डाउन की संभावना हो।
यह नई व्यवस्था का अहम बदलाव है। सुबह 9:05 से 9:10 बजे के बीच नए लिमिट ऑर्डर लगाए जा सकेंगे। पहले लगाए गए लिमिट ऑर्डर को बदला या रद्द भी किया जा सकेगा। लेकिन इस दौरान मार्केट ऑर्डर को बदलने या रद्द करने की इजाजत नहीं होगी। इस समय के आखिरी दो मिनट के दौरान सिस्टम किसी भी समय अचानक ऑर्डर लेना बंद कर सकता है। यानी निवेशकों को आखिरी समय तक इंतजार करने के बजाय अपना फैसला पहले लेना होगा। पुरानी व्यवस्था में इस तरह की गतिविधियों के लिए अलग से 9:05 से 9:10 बजे का समय नहीं था।
इसके बाद सुबह 9:10 से 9:12 बजे तक ऑर्डर मैच किए जाएंगे और ट्रेड की पुष्टि होगी। इसी प्रक्रिया के आधार पर किसी शेयर की ओपनिंग कीमत तय होगी। इस दौरान कोई नया ऑर्डर नहीं लगाया जा सकेगा। पहले से लगाए गए ऑर्डर में बदलाव या उन्हें रद्द करने की भी अनुमति नहीं होगी। पुरानी व्यवस्था में ऑर्डर मैचिंग की प्रक्रिया सुबह 9:08 बजे से 9:12 बजे तक चलती थी।
नई व्यवस्था में ऑर्डर मैच करने का तरीका भी साफ किया गया है। सबसे पहले खरीद के मार्केट ऑर्डर को बिक्री के मार्केट ऑर्डर से समय की प्राथमिकता के आधार पर मैच किया जाएगा। इसके बाद बचे हुए मार्केट ऑर्डर को लिमिट ऑर्डर से कीमत और समय की प्राथमिकता के आधार पर मिलाया जाएगा। आखिर में बचे हुए लिमिट ऑर्डर आपस में मैच किए जाएंगे।
HDFC Securities के सीनियर डेरिवेटिव एंड टेक्निकल एनालिस्ट नंदीश शाह के मुताबिक, नई व्यवस्था में ऑर्डर एंट्री के समय के साथ कीमत और समय की प्राथमिकता पर खास जोर दिया गया है।
प्री-ओपन सेशन का आखिरी हिस्सा पहले जैसा ही रहेगा। सुबह 9:12 से 9:15 बजे तक बफर पीरियड होगा। इस दौरान प्री-ओपन सेशन से सामान्य कारोबार की तरफ जाने की प्रक्रिया पूरी होगी। इसके बाद सुबह 9:15 बजे से सामान्य शेयर ट्रेडिंग शुरू हो जाएगी।
किसी शेयर की ओपनिंग कीमत मांग और सप्लाई के आधार पर तय होगी। इसे इक्विलिब्रियम प्राइस कहा जाता है। आसान भाषा में कहें तो वह कीमत चुनी जाएगी, जिस पर सबसे ज्यादा शेयरों की खरीद-बिक्री संभव हो। अगर एक से ज्यादा कीमतों पर बराबर मात्रा में शेयरों की खरीद-बिक्री संभव है, तो उस कीमत को प्राथमिकता मिलेगी जहां खरीद और बिक्री के ऑर्डर के बीच अंतर सबसे कम होगा। अगर इसके बाद भी एक से ज्यादा कीमतें सामने आती हैं, तो पिछले कारोबारी दिन की क्लोजिंग कीमत के सबसे करीब वाली कीमत को ओपनिंग प्राइस माना जाएगा।