निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में शामिल 12 में से आठ शेयर रोजाना के चार्ट पर अपने 200 दिन के मूविंग ऐवरेज (200-डीएमए) से नीचे कारोबार कर रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार इनमें भारतीय स्टेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक आदि शामिल हैं।
200-डीएमए एक तकनीकी संकेतक है। इसका इस्तेमाल किसी इंडेक्स या शेयर की लंबी अवधि के रुझान पता लगाने के लिए किया जाता है। जो इंडेक्स या शेयर अपने 200-डीएमए से नीचे कारोबार करते हैं, उन्हें गिरावट के रुझान वाला माना जाता है। इससे ऊपर कारोबार करते हैं तो उन्हें ऊपर की ओर बढ़ते रुझान वाला माना जाता है।
एक्सचेंजों पर पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (पीएसयू) बैंकों के शेयरों की कीमत में उनके 52 हफ्ते के उच्चतम स्तर से 10 से 30 फीसदी तक की गिरावट आई है। ऐस इक्विटी के आंकड़ों के अनुसार इस साल जनवरी के मध्य से जून के आखिर के बीच 10 पीएसयू बैंकों ने अपने-अपने 52 हफ्ते के नए उच्चतम स्तर को छुआ था। पंजाब ऐंड सिंध बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया के शेयरों में उन ऊंचे स्तरों से 25 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है।
विश्लेषकों का मानना है कि पीएसयू बैंकों के शेयरों में सुस्ती की वजह इन बैंकों के विलय की खबरें थीं। इक्विनॉमिक्स रिसर्च के संस्थापक व शोध प्रमुख जी. चोकालिंगम के मुताबिक बाजार में कुल मिलाकर कमजोरी और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी का असर शेयर बाजार में सराकीर बैंकों के प्रति निवेशकों की धारणा पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि अप्रैल-जून तिमाही में कई सरकारी बैंकों के ट्रेजरी मुनाफे पर काफी दबाव देखा गया, जिससे उनके कुल मुनाफे पर असर पड़ा।
चोकालिंगम ने कहा, तेल की बढ़ती कीमतों और बारिश की कमी ने महंगाई बढ़ने का डर बढ़ा दिया है। बाजार के प्रतिभागियों को आशंका है कि वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही में भी ट्रेजरी मुनाफे पर दबाव बना रहेगा क्योंकि बॉन्ड यील्ड मजबूत बनी हुई है। सरकारी बैंकों के शेयरों की मांग कम होने की संभावना है। इन बैंकों में से वे बैंक ऑफ इंडिया को लेकर सकारात्मक हैं क्योंकि उसकी परिसंपत्ति गुणवत्ता और मूल्यांकन के मापदंड अच्छे हैं।
ऐस इक्विटी के आंकड़ों के मुताबिक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, पंजाब ऐंड सिंध बैंक और यूको बैंक अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर से 84-86 फीसदी नीचे गिरकर 16 साल के निचले स्तर के आस-पास कारोबार कर रहे हैं।
अल्फानीति फिनटेक के सह-संस्थापक और निदेशक यू आर भट्ट के अनुसार, पीएसयू बैंकों ने अपनी बैलेंस शीट तो ठीक कर ली है, लेकिन विलय की चर्चाओं की वजह से निवेशक इन शेयरों से दूर रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि विलय की किसी भी संभावित प्रक्रिया में तय होने वाले विलय अनुपात अक्सर बाजार को पसंद नहीं आते हैं।
भट्ट ने कहा, बाजार की चर्चाओं को देखें तो कुछ चुनिंदा बैंकों में ऑफर फॉर सेल भी आ सकता है। कई पीएसयू बैंक अपने 200-डीएमए से नीचे कारोबार कर रहे हैं, लेकिन इसे लेकर चिंता की कोई बात नहीं है। मूल्यांकन के लिहाज़ से पीएसयू बैंक हमेशा अपने प्राइवेट सेक्टर के बैंकों के मुकाबले कम कीमत पर ट्रेड करते रहे हैं। मुझे लगता है कि सभी बैंकों की रेटिंग में गिरावट आई है।