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भारत में बदला निवेश का ट्रेंड: बैंक जमा के बजाय निवेशकों को लुभा रहे म्युचुअल फंड व शेयर

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हालांकि, इस मामले में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, चीन और ब्राजील जैसे देशों की तुलना में भारत अभी भी काफी पीछे है

Last Updated- December 08, 2025 | 10:07 PM IST
Mutual Fund
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

बैंक जमाओं को पीछे छोड़ते हुए म्युचुअल फंड और शेयरों में सीधे निवेश सबसे तेजी से बढ़ने वाली संपत्ति के रूप में उभरे हैं। हालांकि, इस मामले में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, चीन और ब्राजील जैसे देशों की तुलना में भारत अभी भी काफी पीछे है। यह जानकारी सोमवार को जारी ग्रो और बेन ऐंड कंपनी की ‘हाउ इंडिया इन्वेस्ट्स 2025’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में सामने आई है। इस रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 के अंत तक भारतीय घरों की संपत्ति लगभग 1,300-1,400 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें निवेश योग्य संपत्ति कुल घरेलू संपत्ति का 35 प्रतिशत होगी, जो एक दशक पहले 28 प्रतिशत थी। 

पिछले एक दशक में सूचीबद्ध म्युचुअल फंड ने तेजी पकड़ी है। निवेश योग्य परिसंपत्ति में प्रबंधनाधीन परिसंपत्ति (एयूएम) की हिस्सेदारी वर्ष 2015 के 4 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 9 प्रतिशत हो गई है, जो 22 प्रतिशत की सालाना चक्रवृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ रही है। इसी अवधि में सूचीबद्ध शेयरों की हिस्सेदारी 29 प्रतिशत से बढ़कर 37 प्रतिशत हो गई है, जो 16 प्रतिशत सीएजीआर से बढ़ रही है।

इसके विपरीत, निवेश योग्य परिसंपत्ति में जमा राशि की हिस्सेदारी 63 प्रतिशत से कम होकर 49 प्रतिशत हो गई है, जो केवल 11 प्रतिशत सीएजीआर से बढ़ रही है। हालांकि, निवेश के रुझान में इस बदलाव के बावजूद कुल निवेश योग्य परिसंपत्ति में भारत का म्युचुअल फंड और सूचीबद्ध शेयरों में निवेश (2024 के अनुमान के मुताबिक)15-20 प्रतिशत है, जो कनाडा के 52-59 प्रतिशत, अमेरिका के 50-60 प्रतिशत, ब्राजील के 40-45 प्रतिशत, ब्रिटेन के 38-42 प्रतिशत और मेक्सिको के 22-28 प्रतिशत से काफी कम है। इस अंतर से भविष्य में वृद्धि की काफी गुंजाइश दिखती है।

केवल म्युचुअल फंड में ही भारत के पास विस्तार की व्यापक गुंजाइश है। निवेश योग्य संपत्ति में उनकी हिस्सेदारी महज 7-10 प्रतिशत है जबकि यह कनाडा में 40-45 प्रतिशत, ब्राजील में 30-35 प्रतिशत, अमेरिका में 28-33 प्रतिशत, ब्रिटेन में 25-27 प्रतिशत और चीन में 8-12 प्रतिशत है। रिपोर्ट में चुनौतियों के बावजूद कई दिलचस्प रुझानों पर बात की गई है। शीर्ष 110 शहरों से इतर शहरों से म्युचुअल फंड एयूएम का योगदान वर्ष 2018-19 (वित्त वर्ष 2019) में 10 प्रतिशत से बढ़कर 19 प्रतिशत हो गया जो बाजार में गहरी पैठ को दर्शाता है।

महिलाएं भी बड़ी संख्या में निवेश के क्षेत्र में आ रही हैं और वित्त वर्ष 2019 से उनके औसत म्युचुअल फंड पोर्टफोलियो के आकार में 23 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि इसी अवधि में पुरुषों के लिए यह वृद्धि महज 5 प्रतिशत है। युवा निवेशक भी शेयर बाजार में काफी सक्रिय हैं और नैशनल स्टॉक एक्सचेंज में पंजीकृत 40 प्रतिशत निवेशक 30 वर्ष से कम उम्र के हैं, जो वित्त वर्ष 2019 में 23 प्रतिशत थे। सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) निवेश करने का पसंदीदा तरीका बनता जा रहा है और कुल व्यक्तिगत म्युचुअल फंड एयूएम में उनकी हिस्सेदारी बढ़कर 40 प्रतिशत हो गई है जो वित्त वर्ष 2019 में महज 19 प्रतिशत थी।

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First Published - December 8, 2025 | 10:07 PM IST

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