म्युचुअल फंड

सेक्टोरल और थीमैटिक फंड्स किसी रोलर-कोस्टर से कम नहीं, 2026 के लिए एक्सपर्ट्स ने बताई निवेश की स्ट्रैटेजी

थीमैटिक और सेक्टोरल फंड निवेशकों को ऐसे संरचनात्मक रुझानों में निवेश का मौका देते हैं, जो आमतौर पर व्यापक और डायवर्स पोर्टफोलियो में पूरी तरह शामिल नहीं हो पाते

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सर्वजीत के सेन   
Last Updated- January 01, 2026 | 4:00 PM IST

Sectoral or Thematic Funds 2026 Outlook: कैलेंडर ईयर 2025 में सेक्टोरल फंड्स ने निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया। निफ्टी पीएसयू बैंक को ट्रैक करने वाले फंड्स 26 फीसदी रिटर्न के साथ टॉप पर रहे। इसके बाद निफ्टी मेटल ने 24 फीसदी और निफ्टी ऑटो ने 20 फीसदी का रिटर्न दिया। बैंकिंग और फाइनैंशियल शेयरों ने कुल मिलाकर अच्छा प्रदर्शन किया। खास तौर पर पीएसयू बैंकों को कम ब्याज दरों, सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ने और आकर्षक वैल्यूएशन का फायदा मिला। निफ्टी ऑटो इंडेक्स को वाहनों की बढ़ती मांग और बेहतर मार्केट सेंटीमेंट से मजबूती मिली। वहीं निफ्टी मेटल को ऊंची कमोडिटी कीमतों का समर्थन मिला। निफ्टी डिफेंस ने भी अच्छा प्रदर्शन किया और 19 फीसदी का रिटर्न दिया। डिफेंस सेक्टर में बढ़ते सरकारी खर्च और भू-राजनीतिक तनाव के कारण निर्यात की संभावनाएं बढ़ने से इस सेक्टर को लाभ हुआ।

बंधन एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) में प्रोडक्ट मैनेजमेंट और स्ट्रैटेजी के हेड सिरशेंदु बसु के अनुसार, “थीमैटिक और सेक्टोरल फंड निवेशकों को ऐसे संरचनात्मक रुझानों में निवेश का मौका देते हैं, जो आमतौर पर व्यापक और डायवर्स पोर्टफोलियो में पूरी तरह शामिल नहीं हो पाते। अनुकूल बाजार स्थितियों में सही सेक्टर का चयन ज्यादा रिटर्न दे सकता है और यह शानदार रिटर्न (अल्फा) बनाने का मजबूत जरिया बन सकता है।”

एक जोखिम भरा दांव

सेक्टोरल और थीमैटिक निवेश में सावधानी बरतना जरूरी है, क्योंकि इनमें लीडरशिप तेजी से बदल सकती है। प्लान अहेड वेल्थ एडवाइजर्स के फाउंडर और सीईओ विशाल धवन कहते हैं, “थीमैटिक और सेक्टोरल फंड का स्वरूप काफी केंद्रित होता है, इसलिए इनमें उतार-चढ़ाव स्वाभाविक रूप से ज्यादा होता है।”

हालिया प्रदर्शन इस अस्थिरता को साफ दिखाता है। निफ्टी रियल्टी इंडेक्स ने कैलेंडर ईयर 2023 में 81 फीसदी और कैलेंडर ईयर 2024 में 34 फीसदी की मजबूत बढ़त दर्ज की थी, लेकिन कैलेंडर ईयर 2025 में अब तक इसमें 16 फीसदी की गिरावट आ चुकी है।

निफ्टी ऑटो इंडेक्स में भी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। इसने कैलेंडर ईयर 2023 में 47 फीसदी और कैलेंडर ईयर 2024 में 22 फीसदी का रिटर्न दिया। वहीं निफ्टी मेटल इंडेक्स ने कैलेंडर ईयर 2024 में सिर्फ 8 फीसदी का ही रिटर्न दिया।

सैटेलाइट पोर्टफोलियो के लिए बेहतर

सेक्टोरल निवेश को पोर्टफोलियो के सैटेलाइट हिस्से तक ही सीमित रखना चाहिए। Wealthy.in की प्रोडक्ट्स और रिसर्च हेड निहारिका त्रिपाठी कहती हैं, “सेक्टर और थीमैटिक फंड को रणनीतिक यानी टैक्टिकल निवेश के रूप में देखना चाहिए, न कि पोर्टफोलियो की बुनियाद के तौर पर। पोर्टफोलियो का 70-80 फीसदी हिस्सा डायवर्सिफाइड इक्विटी, डेट और स्थिरता देने वाले एसेट्स में होना चाहिए। सैटेलाइट हिस्सा अधिकतम 20-30% तक रखा जा सकता है, जिसमें सेक्टर और थीम आधारित निवेश किए जाएं। कुल पोर्टफोलियो का 10 फीसदी से ज्यादा निवेश किसी एक सेक्टर में नहीं होना चाहिए।”

टाइमिंग का है सारा खेल

थीमैटिक निवेश में सही समय पर एंट्री करना और सही समय पर बाहर निकलना बेहद जरूरी होता है। मॉर्निंगस्टार इनवेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के डायरेक्टर कौस्तुभ बेलापुरकर कहते हैं, “सेक्टर और थीम आमतौर पर चक्रीय होते हैं और इनमें निवेश करते समय एंट्री और एग्जिट, दोनों समय जोखिम बना रहता है।”

त्रिपाठी का कहना है कि चरणबद्ध तरीके से निवेश करने से टाइमिंग का जोखिम कम किया जा सकता है, क्योंकि इससे अलग-अलग बाजार परिस्थितियों में निवेश फैल जाता है।

अगर असमंजस हो तो बचें

जो निवेशक यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि किस सेक्टर में निवेश किया जाए, उनके लिए डायवर्सिफाइड इक्विटी फंड बेहतर विकल्प हैं। बेलापुरकर कहते हैं, “अधिकांश निवेशकों के लिए सेक्टर या थीमैटिक फंड से दूर रहना ही बेहतर होता है, खासकर ऐसे फंड जिनका दायरा बहुत सीमित हो, क्योंकि इनमें कीमतों में काफी तेज उतार-चढ़ाव हो सकता है। अच्छी तरह से मैनेज डायवर्सिफाइड इक्विटी फंड ज्यादा बेहतर विकल्प हो सकते हैं, जहां फंड मैनेजर सेक्टरों में सीमित रूप से वजन घटाने या बढ़ाने का फैसला करते हैं।”

त्रिपाठी का कहना है कि पहली बार निवेश करने वाले या कम अनुभव वाले निवेशकों को सेक्टर या थीमैटिक फंड से बचना चाहिए।

लंबी अवधि के लिए निवेश करें

जो निवेशक सेक्टर आधारित फंड में पैसा लगाते हैं, उन्हें पूरे बाजार चक्र के दौरान निवेश बनाए रखने के लिए तैयार रहना चाहिए। धवन कहते हैं, इक्विटी पोर्टफोलियो का लगभग 5-15 फीसदी हिस्सा ऐसे फंड में लगाना सही माना जा सकता है। यह निवेश एक से तीन थीम में फैला होना चाहिए। सेक्टर और थीमैटिक निवेश से अच्छा नतीजा पाने के लिए कम से कम पांच साल या उससे ज्यादा का समय देना जरूरी होता है, क्योंकि इन सेक्टरों को मुनाफे और रिटर्न में बदलने में वक्त लगता है।

इन गलतियों से बचें

सेक्टर फंड में जरूरत से ज्यादा निवेश करना और बीते रिटर्न को देखकर निवेश करना आम गलतियां हैं। बेलापुरकर के अनुसार, सेक्टर फंड में निवेश करते समय सबसे बड़ी गलती जरूरत से ज्यादा एलोकेशन करना और अवास्तविक रिटर्न की उम्मीद रखना है।

बसु का कहना है कि निवेशक अक्सर अच्छे रिटर्न के दौर के बाद सेक्टर फंड में पैसा लगाते हैं, लेकिन जब बाजार का चक्र बदलता है तो उन्हें कमजोर प्रदर्शन का सामना करना पड़ता है। एक और बड़ी गलती यह है कि सेक्टर फंड को स्थायी कोर निवेश मान लिया जाता है। निवेशकों को समय-समय पर निवेश के कारणों की समीक्षा करनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर पोर्टफोलियो में बदलाव करना चाहिए।


(लेखक गुरुग्राम स्थित एक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

First Published : January 1, 2026 | 3:35 PM IST