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बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का निधन, विदेश मंत्री एस जयशंकर ढाका जाएंगे अंतिम संस्कार में

लगभग तीन दशक तक राजनीति के केंद्र में रहीं खालिदा जिया का निधन बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों से महज 6 सप्ताह पहले हुआ है

Published by
अर्चिस मोहन   
Last Updated- December 30, 2025 | 10:50 PM IST

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नैशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की अध्यक्ष खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करने के लिए विदेश मंत्री एस. जयशंकर बुधवार को ढाका जाएंगे। लंबी बीमारी से जूझ रहीं 80 वर्षीय खालिदा का निधन मंगलवार सुबह ढाका में हुआ। उन्हें बुधवार को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। उनके निधन की घोषणा बीएनपी के कार्यवाहक अध्यक्ष और उनके बेटे तारिक रहमान ने की।  

देश में उथल-पुथल भरे सैन्य शासन के बाद लोकतंत्र की पुनर्स्थापना में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली व लगभग तीन दशक तक राजनीति के केंद्र में रहीं खालिदा जिया का निधन बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों से महज 6 सप्ताह पहले हुआ है। इस चुनाव में जिया को तीन सीटों से चुनाव लड़ना था। ब्रिटेन में 17 साल के स्व-निर्वासन में रहने के बाद इसी 25 दिसंबर को बांग्लादेश लौटे रहमान को चुनाव अभियान का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। कई पर्यवेक्षकों का मानना है कि रहमान अपने देश के अगले प्रधानमंत्री हो सकते हैं।

विदेश मंत्रालय के अनुसार अपनी यात्रा के दौरान जयशंकर दिवंगत खालिदा जिया के परिवार, विशेष रूप से रहमान से मिल सकते हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि जयशंकर अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे या नहीं। यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध पुन: तनावपूर्ण हो गए।

शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से हटाए जाने और उनकी सरकार जाने के बाद से भारत और बांग्लादेश के संबंधों में खटास बढ़ गई है। देश में बढ़ती उथल-पुथल के बीच हसीना अगस्त 2024 में भारत आ गई थीं, उसके बाद से वह यहीं रह रही हैं। हाल के दिनों में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से हिंदुओं पर बढ़ते हमलों पर  विदेश मंत्रालय ने बार-बार चिंता जताई है।

इससे पहले दिन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खालिदा जिया के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश के विकास और भारत के साथ उसके संबंधों में जिया के योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। मोदी ने सोशल मीडिया पर बंगाली भाषा में लिखा, ‘मुझे 2015 में ढाका में खालिदा जिया के साथ हुई अपनी सौहार्दपूर्ण मुलाकात याद है। हमें उम्मीद है कि उनकी दृष्टि और विरासत हमारी साझेदारी को दिशा देती रहेगी। उनकी आत्मा को शांति मिले।’ प्रधानमंत्री ने दिवंगत नेता के साथ अपनी मुलाकात की तस्वीरें भी साझा की हैं।

खालिदा जिया 1991 से 1996 तक और फिर 2001 से 2006 तक बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रहीं। प्रधानमंत्री के रूप में उनके दूसरे कार्यकाल में भारत और बांग्लादेश के संबंध असहज हो गए थे। उनकी पार्टी ने दक्षिणपंथी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन किया था, जिसके बाद भारत-विरोधी आतंकवादी समूहों ने बांग्लादेश में पैर जमाने शुरू कर दिए थे। वर्ष 2008 में जब जिया की पार्टी को हराकर शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग की सरकार बनी तो भारत के साथ संबंधों में फिर गर्माहट आई और अवामी लीग सरकार ने भारत-विरोधी समूहों की गतिविधियों पर काफी हद तक लगाम लगाई।

वर्ष1991 से 1996 तक अपने पहले कार्यकाल के दौरान भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे पर विवाद रहा। बांग्लादेश की विदेश नीति में बदलाव लाते हुए जिया सरकार ने ‘लुक ईस्ट नीति’ अपनाई और चीन के साथ संबंध मजबूत किए।  

जिया ने 1992 और 2006 में प्रधानमंत्री के रूप में तथा 2012 में विपक्ष की नेता के रूप में सरकार के निमंत्रण पर भारत का दौरा किया। वर्ष 2006 की उनकी राजकीय यात्रा के दौरान दोनों देशों ने व्यापार और सुरक्षा से जुड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए। वर्ष 2012 की यात्रा का उद्देश्य भारत के साथ बीएनपी के संबंधों को फिर से मजबूत करना था।

बाद के वर्षों में जब जिया सत्ता से बाहर थीं और भारत में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बन चुकी थी, तो उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उन्होंने किस प्रकार दिसंबर 1992 में बाबरी मस्जिद के ध्वंस के बाद प्रधानमंत्री के रूप में बांग्लादेश में सांप्रदायिक तनाव फैलने से रोकने के लिए सख्ती बरती और कट्टरपंथी तत्वों पर लगाम लगाने, टेलीविजन पर बाबरी विध्वंस का प्रसारण रोकने और हिंदू समुदाय की सुरक्षा के उपाय करने जैसे कदम उठाए।

(साथ में एजेंसियां)

First Published : December 30, 2025 | 10:50 PM IST