SIP investment plan: बाजार में गिरावट के दौरान अक्सर निवेशक घबराकर एसेट्स बेच देते हैं, लेकिन वेल्थ मैनेजर्स का मानना है कि ऐसे समय अनुशासित निवेशकों के लिए सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए अच्छी क्वालिटी के एसेट्स जमा करने का अवसर होता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, उतार-चढ़ाव के दौर में लंबी अवधि के निवेशकों को अपने फंड को ज्यादा प्रभावी तरीके से लगाने के मौके मिलते हैं। गिरावट के दौरान किया गया निवेश निवेशकों को कम कीमत पर ज्यादा यूनिट्स खरीदने का मौका देता है, जिससे बाजार में सुधार आने पर लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
इस रणनीति की जड़ रुपी-कॉस्ट एवरेजिंग के सिद्धांत में है। जब बाजार गिरता है, तो वही SIP राशि ज्यादा यूनिट्स खरीदती है, जिससे समय के साथ औसत खरीद लागत कम हो जाती है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि SIP उन निवेशकों के लिए सबसे बेहतर काम करता है, जिनका निवेश अवधि लंबी होती है और जो थोड़े समय के लिए बाजार उतार-चढ़ाव को सहन करने की क्षमता रखते हैं। असल में, SIP निवेशकों को बाजार गिरने पर ज्यादा यूनिट्स जमा करने का मौका देता है और बाजार में सुधार आने पर ज्यादा रिटर्न का फायदा उठाने में मदद करता है।
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मौजूदा माहौल में, कैनरा रोबेको एएमसी के नेशनल हेड (सेल्स और मार्केटिंग) गौरव गोयल ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे बाजार की चाल पर प्रतिक्रिया देने के बजाय लंबी अवधि के स्ट्रक्चरल ग्रोथ के अवसरों पर ध्यान केंद्रित करें।
गोयल ने कहा, “SIP निवेशकों को अनुशासन बनाए रखते हुए समय के साथ संपत्ति बनाने में मदद करता है। बाजार के मौजूदा हालत में SIP निवेशकों को अल्पकालिक बाजार उतार-चढ़ाव के बजाय लंबी अवधि के स्ट्रक्चरल ग्रोथ वाले क्षेत्रों पर फोकस करना चाहिए।”
AMFI डेटा के अनुसार, फरवरी में SIP स्टॉपेज रेशियो बढ़कर 76 फीसदी हो गया, जो जनवरी में 74 फीसदी था। इसका कारण बाजार में बढ़ी हुई अस्थिरता माना जा रहा है। डेटा के मुताबिक, इस महीने करीब 65.72 लाख नए SIP रजिस्टर हुए, जबकि लगभग 49.70 लाख SIP बंद या मैच्योर हो गए। इसका मतलब है कि महीने के दौरान हर नए SIP के मुकाबले लगभग तीन SIP बंद या डिस्कंटिन्यू किए गए।
एडलवाइस म्युचुअल फंड की एमडी और सीईओ राधिका गुप्ता ने कहा कि बाजार गिरते हैं, लेकिन अंततः वे तेजी से रिकवर भी करते हैं। उन्होंने बताया कि 9/11 हमले के बाद बाजार 6-7 फीसदी गिरा था, लेकिन अगले कुछ महीनों में 14 फीसदी की मजबूत तेजी आई। इसी तरह, 2003 में इराक युद्ध के बाद बाजार 7-8 फीसदी गिरा, लेकिन अगले साल 15-16 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई।
| भू-राजनीतिक घटना | तारीख | गिरावट
(प्रतिशत में) |
गिरावट की अवधि
(सप्ताह में) |
सुधार के निचले स्तर से आगे का रिटर्न |
|---|---|---|---|---|
| इराक युद्ध | 02-08-1990 | -14 | 36 | 1 महीना: 26%, 3 महीने: 39%, 6 महीने: 65% |
| कारगिल युद्ध | 03-05-1999 | -11 | 6 | 1 महीना: 17%, 3 महीने: 33%, 6 महीने: 40% |
| वर्ल्ड ट्रेड सेंटर | 11-09-2001 | -18 | 2 | 1 महीना: 18%, 3 महीने: 35%, 6 महीने: 45% |
| 26/11 मुंबई हमला | 26-11-2008 | -3 | 1 | 1 महीना: 20%, 3 महीने: 24%, 6 महीने: 36% |
| पुलवामा हमला | 14-02-2019 | -2 | 1 | 1 महीना: 9%, 3 महीने: 12%, 6 महीने: 14% |
| रूस-यूक्रेन संघर्ष | 24-02-2022 | -11 | 23 | 1 महीना: 7%, 3 महीने: 19%, 6 महीने: 25% |
| ईरान-इज़राइल/यूएस संघर्ष | 01-03-2026 | -5 | ||
| औसत | -9 | 11 | 1 महीना: 16%, 3 महीने: 27%, 6 महीने: 37% | |
| मध्यम | -11 | 4 | 1 महीना: 17%, 3 महीने: 28%, 6 महीने: 38% |
भू-राजनीतिक घटनाओं में क्या समानता होती है? इस पर राधिका गुप्ता ने LinkedIn पर एक पोस्ट में कहा, “घटनाएं अलग-अलग हो सकती हैं, बाजार गिरते हैं, लेकिन अंततः वे रिकवर कर जाते हैं।”
उन्होंने निवेशकों को इतिहास से सीख लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा, “हमने ऐसे दौर भी देखे हैं जब बाजार 18 महीनों तक सपाट रहा, लेकिन इसके बाद अगले 18 से 36 महीने निवेशकों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हुए, जिसमें औसत रिटर्न 12 से 30 फीसदी के बीच रहा। इसलिए अभी हार न मानें।”
गौरतलब है कि बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी 50 करेक्शन फेज में आ गए हैं और अपने-अपने हाई से 10 फीसदी से ज्यादा गिर चुके हैं। 13 मार्च के क्लोजिंग डेटा के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट की शुरुआत के बाद से BSE Sensex में 6,700 अंकों यानी करीब 8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। इसी तरह, NSE Nifty 50 भी युद्ध शुरू होने के बाद से 2,000 अंकों यानी लगभग 8 फीसदी गिर चुका है।
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निवेशकों को इस समय क्या करना चाहिए, इस पर राधिका ने सलाह दी कि वे कुछ न करें। उन्होंने कहा, “अगर आप नहीं चाहते तो निवेश बढ़ाने का कोई दबाव नहीं है। घबराकर कोई फैसला न लें। क्या यह SIP बंद करने का समय है? मैं कहूंगी कि इस दौर को गुजरने दें।”
उन्होंने आगे कहा, “बाजार में उतार-चढ़ाव इसकी खासियत है, कोई खामी नहीं। किसी को नहीं पता कि भू-राजनीतिक घटनाएं कब खत्म होंगी, लेकिन इतना जरूर पता है कि लंबी अवधि में भारतीय इक्विटी से 12 से 15 फीसदी तक का रिटर्न मिलता रहा है।”
कुछ एक्सपर्ट इसे लंबी अवधि में निवेश के अवसर के रूप में देख रहे हैं। उनका सुझाव है कि निवेशक मल्टी-कैप या फ्लेक्सी-कैप जैसे डायवर्सिफाइड इक्विटी फंड्स में SIP शुरू करने पर विचार कर सकते हैं, क्योंकि ये अलग-अलग मार्केट कैपिटलाइजेशन वाली कंपनियों में निवेश का एक्सपोजर देते हैं।
चॉइस वेल्थ में हेड–रिसर्च एंड प्रोडक्ट अक्षत गर्ग ने कहा कि बाजार के निचले स्तर (बॉटम) को टाइम करने की कोशिश करने से अक्सर मौके छूट जाते हैं। इसके बजाय, निवेश में निरंतरता बनाए रखना SIP को ज्यादा प्रभावी बनाता है। पोर्टफोलियो बनाने के नजरिए से उन्होंने कहा कि लार्ज-कैप और फ्लेक्सी-कैप फंड निवेशकों के लिए कोर एलोकेशन का हिस्सा बन सकते हैं।
उन्होंने कहा, “ये फंड अपेक्षाकृत स्थिरता प्रदान करते हैं और फंड मैनेजर्स को उभरते अवसरों के अनुसार अलग-अलग मार्केट सेगमेंट्स में निवेश का आवंटन बदलने की लचीलापन देते हैं।”
गौरव ने भी इसी तरह के विचार रखते हुए कहा, “ऐसे माहौल में SIP शुरू करने पर विचार कर रहे निवेशकों के लिए मल्टी-कैप या फ्लेक्सी-कैप फंड सबसे बेहतर हैं।”
360 वन वेल्थ के हेड-प्रोडक्ट्स साहिल कपूर ने कहा, “फ्लेक्सी-कैप फंड और अच्छे से मैनेज किए गए डाइवर्सिफाइड फंड्स निवेश के लिए बेहतर विकल्प हैं। इसके अलावा, लंबी अवधि का नजरिया रखने वाले निवेशक SIP के जरिए स्मॉल-कैप फंड्स में सीमित हिस्सेदारी भी रख सकते हैं।”
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गर्ग का मानना है कि फाइनेंशियल सर्विसेज, कैपिटल एक्सपेंडिचर, मैन्युफैक्चरिंग और घरेलू खपत से जुड़े सेक्टर्स में लंबी अवधि में अच्छा विकास हो सकता है। उन्होंने कहा, “कुल मिलाकर रणनीति सरल होनी चाहिए: SIP अनुशासन बनाए रखें, विभिन्न मार्केट कैप्स में निवेश फैलायें और अल्पकालिक बाजार उतार-चढ़ाव पर प्रतिक्रिया देने के बजाय लंबी अवधि के नजरिए के साथ निवेशित रहें।”
आदित्य बिड़ला सन लाइफ एएमसी के इक्विटी सीआईओ हरीश कृष्णन ने कहा कि बाजार कभी एक ही दिशा में नहीं चलते और सबसे अच्छे अवसर उतार-चढ़ाव में पैदा होते हैं। उन्होंने कहा कि गिरावट के दौरान SIP बंद करना उल्टा असर डाल सकता है।
ऐतिहासिक रुझानों से पता चलता है कि भू-राजनीतिक तनाव के कारण होने वाले बाजार के उतार-चढ़ाव आमतौर पर अस्थायी होते हैं, और अंततः बाजार अपने मूलभूत आधार जैसे कि कमाई में वृद्धि, तरलता की स्थिति और घरेलू मांग की ओर लौटते हैं।
बाजार की अस्थिरता के दौरान लंबी अवधि में संपत्ति बनाने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि लार्ज-कैप और फ्लेक्सी-कैप फंड्स में निवेश निवेशकों के लिए सुरक्षित और बेहतर विकल्प है।
(डिस्क्लेमर: साझा किए गए विचार और विश्लेषण संबंधित ब्रोकरेज या विशेषज्ञों के हैं और बिजनेस स्टैंडर्ड द्वारा इनकी पुष्टि या समर्थन नहीं किया गया है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इसे निवेश की सलाह न समझें।)