बाजार में जारी उठा-पटक के बावजूद म्युचुअल फंड्स में खुदरा निवेशकों का भरोसा बरकरार है। सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए निवेश में लगातार मजबूती देखने को मिल रही है। ICRA एनालिटिक्स के अनुसार, फरवरी 2026 में SIP के जरिए निवेश सालाना आधार पर 14.79 फीसदी बढ़कर 29,845 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो फरवरी 2025 में 25,999 करोड़ रुपये था। यह आंकड़ा दिखाता है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों का रुझान लंबी अवधि के निवेश की ओर बना हुआ है। हालांकि, मासिक आधार पर थोड़ी नरमी देखने को मिली। जनवरी 2026 के 31,002 करोड़ रुपये की तुलना में फरवरी में SIP निवेश 3.73 फीसदी घटा है।
वैश्विक अनिश्चितताओं और बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद SIP में योगदान करने वाले खातों की संख्या बढ़कर 9.44 करोड़ हो गई, जो पहले 8.26 करोड़ थी। वहीं, कुल एक्टिव (आउटस्टैंडिंग) SIP खातों की संख्या भी बढ़कर 10.45 करोड़ पहुंच गई, जबकि फरवरी 2025 में यह 10.17 करोड़ थी। यह रुझान साफ तौर पर दिखाता है कि निवेशकों का SIP और लंबी अवधि के निवेश पर भरोसा मजबूत बना हुआ है।
| फरवरी 2026 | फरवरी 2025 | |
|---|---|---|
| SIP योगदान (₹ करोड़ में) | 29,845 | 25,999 |
| SIP AUM (₹ लाख करोड़ में) | 16.64 | 12.38 |
| SIP में योगदान करने वाले खातों की संख्या (करोड़ में) | 9.44 | 8.26 |
| कुल एक्टिव (आउटस्टैंडिंग) SIP खाते (करोड़ में) | 10.45 | 10.17 |
Source: MFI360 Explorer/AMFI
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SIP के तहत एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 16.64 लाख करोड़ रुपये है, जो म्युचुअल फंड इंडस्ट्री के कुल AUM का करीब 20.29 फीसदी हिस्सा बनाता है। इसमें जो हल्की गिरावट दिखी है, वह निवेशकों के पैसे निकालने की वजह से नहीं, बल्कि बाजार के उतार-चढ़ाव (मार्क-टू-मार्केट) के कारण है।
कुल मिलाकर, आंकड़े बताते हैं कि 2026 की शुरुआत में SIP की ग्रोथ मजबूत बनी रही। बाजार में अस्थिरता के बावजूद निवेशक लगातार अनुशासित तरीके से लंबी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं।
ICRA एनालिटिक्स ने कहा कि भारत में खुदरा निवेशकों की म्युचुअल फंड में दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है। पिछले कुछ सालों में आए आर्थिक और व्यवहारिक बदलावों ने इस रुझान को और मजबूत किया है।
कई इंडस्ट्री रिपोर्ट् और नियामकीय आंकड़े बताते हैं कि म्युचुअल फंड, खासकर इक्विटी आधारित योजनाएं और SIP, अब लंबी अवधि की बचत का एक पसंदीदा विकल्प बनकर उभरे हैं।