भारत इस समय एक साथ कई मोर्चों पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। नए हाईवे बन रहे हैं, शहरों का विस्तार हो रहा है, लाखों नए घर तैयार हो रहे हैं, सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश बढ़ रहा है और AI की बढ़ती मांग के बीच डेटा सेंटरों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। इन सभी बदलावों के बीच एक ऐसा सेक्टर है, जो चुपचाप हर जगह अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है। यह है केबल और वायर (Cables & Wires) उद्योग।
बिजली पहुंचानी हो, घर की वायरिंग करनी हो, मेट्रो नेटवर्क बिछाना हो या फिर किसी डेटा सेंटर को चलाना हो, हर जगह केबल की जरूरत पड़ती है। यही वजह है कि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की विकास कहानी का सबसे बड़ा फायदा जिन सेक्टरों को मिल सकता है, उनमें केबल और वायर उद्योग भी शामिल है।
पिछले कुछ वर्षों में केबल और वायर उद्योग ने शानदार वृद्धि दर्ज की है। वित्त वर्ष 2022 से 2026 के दौरान उद्योग करीब 12.5 फीसदी की सालाना दर से बढ़कर लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का हो गया। इस दौरान संगठित कंपनियों की ग्रोथ और भी तेज रही। जहां पूरा उद्योग 12.5 फीसदी की दर से बढ़ा, वहीं बड़ी कंपनियों ने करीब 17 फीसदी की सालाना वृद्धि दर्ज की। इसका नतीजा यह हुआ कि बाजार में संगठित कंपनियों की हिस्सेदारी 67 फीसदी से बढ़कर 80 फीसदी तक पहुंच गई। इसका मतलब यह है कि ग्राहक अब ज्यादा भरोसेमंद और ब्रांडेड उत्पादों की तरफ बढ़ रहे हैं, जिससे बड़े प्लेयर्स को फायदा मिल रहा है।
केबल उद्योग की सबसे बड़ी ताकत इसकी विविध मांग है। यह उद्योग किसी एक सेक्टर पर निर्भर नहीं है। बिजली क्षेत्र, रियल एस्टेट, रेलवे, टेलीकॉम, औद्योगिक निवेश, नवीकरणीय ऊर्जा और डेटा सेंटर जैसे कई क्षेत्रों से मांग आ रही है। अगर किसी एक सेक्टर में सुस्ती भी आती है, तो दूसरे सेक्टर मांग को संभाल सकते हैं। यही कारण है कि विश्लेषक इस उद्योग की ग्रोथ को लेकर काफी आशावादी हैं।
भारत की प्रति व्यक्ति बिजली खपत अभी भी कई विकसित देशों की तुलना में काफी कम है। लेकिन जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था बढ़ रही है, बिजली की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। सरकार ने 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली क्षमता का लक्ष्य रखा है। इसके लिए सोलर और विंड प्रोजेक्ट्स में भारी निवेश हो रहा है। सिर्फ बिजली पैदा करना ही काफी नहीं होता। उस बिजली को घरों और उद्योगों तक पहुंचाने के लिए विशाल ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क की जरूरत होती है। यही वह जगह है जहां केबल कंपनियों को बड़े ऑर्डर मिलते हैं।
अनुमान है कि अगले सात वर्षों में बिजली ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन क्षेत्र में 9 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश हो सकता है। वहीं 2030 तक हर साल बिछाई जाने वाली ट्रांसमिशन लाइनों की लंबाई पांच गुना तक बढ़ सकती है।
सोलर और विंड प्रोजेक्ट सामान्य बिजली परियोजनाओं की तुलना में ज्यादा केबल का इस्तेमाल करते हैं। सोलर पार्क में बिजली को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने, ग्रिड से जोड़ने और स्टोरेज सिस्टम तक पहुंचाने के लिए बड़ी मात्रा में विशेष केबल की जरूरत पड़ती है। ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, स्मार्ट ग्रिड, स्मार्ट मीटर और बिजली वितरण सुधार योजनाएं भी उद्योग के लिए नए अवसर पैदा कर रही हैं।
रियल एस्टेट उद्योग लंबे समय से केबल कंपनियों का सबसे बड़ा ग्राहक रहा है। हर नया घर, फ्लैट, ऑफिस, अस्पताल, होटल, स्कूल और मॉल बड़ी मात्रा में वायर और केबल का इस्तेमाल करता है। उद्योग की कुल मांग का लगभग 35 फीसदी हिस्सा सिर्फ हाउसिंग वायर से आता है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 1.25 करोड़ से ज्यादा घरों को मंजूरी मिल चुकी है। इन परियोजनाओं में बिजली से जुड़े उत्पादों की भारी जरूरत होगी। इसके अलावा तेजी से बढ़ते शहरीकरण और पुराने इलाकों के पुनर्विकास से भी मांग बढ़ने की उम्मीद है।
कुछ साल पहले तक केबल उद्योग की चर्चा मुख्य रूप से बिजली और रियल एस्टेट तक सीमित थी। लेकिन अब AI और डेटा सेंटर एक नया बड़ा अवसर बनकर उभरे हैं। भारत का डेटा सेंटर बाजार तेजी से बढ़ रहा है। क्लाउड कंप्यूटिंग, डिजिटल सेवाओं, इंटरनेट उपयोग और AI एप्लिकेशन की बढ़ती मांग इसके पीछे बड़ी वजह है।
डेटा सेंटर उन चुनिंदा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में शामिल हैं, जहां केबल की खपत बेहद ज्यादा होती है। कुल प्रोजेक्ट लागत का लगभग 8-10 फीसदी हिस्सा केबल और वायर पर खर्च होता है, जो सामान्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं से काफी अधिक है। AI आधारित डेटा सेंटरों के विस्तार से विशेष पावर केबल और ऑप्टिकल फाइबर केबल की मांग और बढ़ सकती है।
मजबूत मांग और बेहतर ग्रोथ संभावनाओं को देखते हुए मोतीलाल ओसवाल ने आरआर काबेल को लेकर अपना नजरिया और सकारात्मक किया है। ब्रोकरेज ने कंपनी की रेटिंग ‘न्यूट्रल’ से बढ़ाकर ‘बाय’ कर दी है। उसका मानना है कि क्षमता विस्तार, बाजार हिस्सेदारी में बढ़ोतरी और बेहतर मार्जिन के कारण कंपनी की कमाई उम्मीद से बेहतर रह सकती है।
इसी वजह से ब्रोकरेज ने वित्त वर्ष 2027 और 2028 के लिए कंपनी के प्रति शेयर आय (EPS) अनुमान में करीब 11 फीसदी की बढ़ोतरी की है।
हालांकि सेक्टर में सबसे मजबूत दांव अब भी पॉलीकैब पर माना जा रहा है। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि FY26 से FY28 के बीच पॉलीकैब का राजस्व करीब 22 फीसदी सालाना की दर से बढ़ सकता है, जो उसके कवरेज में शामिल कंपनियों में सबसे ज्यादा है। पॉलीकैब के लिए FY27 और FY28 के मुनाफे के अनुमान भी करीब 8 फीसदी बढ़ाए गए हैं।
वहीं केईआई इंडस्ट्रीज पर भी ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी गई है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी भी मजबूत मांग और बाजार हिस्सेदारी बढ़ने का फायदा उठा सकती है।
| कंपनी | मौजूदा भाव (रुपये) | टारगेट प्राइस (रुपये) | संभावित रिटर्न | रेटिंग |
|---|---|---|---|---|
| पॉलीकैब (Polycab) | 9,928 | 11,950 | 20.4% | खरीदें (BUY) |
| लेग्रैंड इंडिया (Legrand India) | 1,578 | 1,750 | 10.9% | खरीदें (BUY) |
| हैवेल्स (Havells) | 1,196 | 1,270 | 6.2% | न्यूट्रल |
| वोल्टास (Voltas) | 1,351 | 1,340 | -0.8% | न्यूट्रल |
| केईआई इंडस्ट्रीज (KEI Industries) | 5,650 | 6,640 | 17.5% | खरीदें (BUY) |
| ब्लू स्टार (Blue Star) | 1,696 | 1,920 | 13.2% | न्यूट्रल |
| आरआर काबेल (RR Kabel) | 2,210 | 2,600 | 17.6% | खरीदें (BUY) |
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)