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अधिग्रहण मूल्य में जियो का बड़ा योगदान

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 10:31 AM IST

निजी इक्विटी निवेश और विलय एवं अधिग्रहण सौदों की वेल्यू 2020 में 80 अरब डॉलर से ऊपर दर्ज की गई है, जबकि 2019 में यह 74.8 अरब डॉलर पर थी, जो करीब 7 प्रतिशत तक ज्यादा है। इन सौदों की कुल वैल्यू में करीब 25 प्रतिशत योगदान जियो प्लेटफॉम्र्स में किए गए बड़े निवेश का माना जा सकता है। ‘पीडब्ल्यूसी डील्स इन इंडिया: एनुअल रिव्यू ऐंड आउटलुक फॉर 2021’ रिपोर्ट के अनुसार,महत्वपूर्ण सौदों (विलय एवं अधिग्रहण) का इस साल कुल सौदों की वैल्यू में 50 प्रतिशत से ज्यादा का योगदान रहा, जबकि निजी इक्विटी (पीई) गतिविधि पिछले साल की तेजी के साथ कायम रही और 38.2 अरब डॉलर का निवेश दर्ज किया गया। 
 
रिपोर्ट में कहा गया है कि अनिश्चितता 2019 में दुनियाभर में निवेशकों के लिए मुख्य चिंता थी, जबकि 2020 में कोविड-19 महामारी भी अन्य चुनौतियों के साथ साथ बड़ी बाधक साबित हुई। दूरसंचार क्षेत्र में बड़े आकार के सौदों को छोड़कर, 2020 की पहली छमाही में कमजोरी दर्ज की गई, क्योंकि निवेशकों ने अपनी योजनाओं को ठंडे बस्ते में डाल दिया और अपना ध्यान नकदी बचाए रखने पर केंद्रित किया। पीई समुदाय में, कई फंडों ने वर्ष के शुरुआती महीनों के दौरान बेहद सतर्क रुख अपनाया, चाहे यह उनके मौजूदा पोर्टफोलियो से जड़ा हो या संशोधित मूल्यांकन की उम्मीदों से संबंधित। साथ ही, बड़ी तादाद में संगठन अपनी गैर-जरूरी परिसंपत्तियों से दूरी बनाने और मुनाफे की स्थिति में बने रहने की संभावना तलाश रहे थे, जिससे विलय एवं अधिग्रहण अवसरों को बढ़ावा मिला।
 
पीई मोर्चे पर उम्मीदें पार हुई, क्योंकि 2020 में 38.2 अरब डॉलर का निवेश दर्ज किया गया था। रिलायंस गु्रप का पीई सौदों की वैल्यू में फिर से बड़ा योगदान दर्ज किया गया और 2019 में पीई निवेश की रफ्तार बरकरार रखने में मदद मिली। फेसबुक के बाद, टीपीजी, केकेआर, जनरल अटलांटिक, सिल्वर लेक और अन्य पीई कंपनियों तथा सॉवरिन वेल्थ फंडों (एसडब्ल्यूएफ) समेत विभिन्न फंडों के कंसोर्टियम ने जियो प्लेटफॉम्र्स में 9.8 अरब डॉलर का निवेश किया। इन निवेश का 2020 में वृद्घि-केंद्रित पीई निवेश में 66 प्रतिशत का योगदान है, जिससे वृद्घि संंबंधित निवेश बढ़कर 15 अरब डॉलर की सर्वाधिक ऊंचाई पर पहुंच गए। इसी तरह, रिलायंस रिटेल वेंचर्स ने 5.1 अरब डॉलर का निवेश दर्ज किया, जिसके परिणामस्वरूप आखिर में किए गए पीई निवेश में तेजी आई और 2020 इस तरह के निवेश के लिहाज से भी रिकॉर्ड वर्ष बन गया। दूसरी तरफ, अधिग्रहणों की संख्या में भी 2019 के मुकाबले बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इसकी वजह इस साल के शुरू में कई फंडों द्वारा अपनाया गया जोखिम से बचने का दृष्टिकोण भी था, जिसके अलावा, नकदी की किल्लत से जूझ रहे व्यवसायों में नकदी निवेश की जरूरत भी थी।
 
उद्यम पूंजी (वीसी) फंडों के लिए संभावित चुनौतियों के बावजूद, शुरुआती निवेश पिछले वर्षों के अनुकूल स्तरों पर बने रहे। भारत के स्टार्ट-अप क्षेत्र के साथ साथ उद्यमिता क्षमताओं में वैश्विक निवेशकों का फिर से भरोसा बढ़ा है।  11.2 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित कर दूरसंचार क्षेत्र ने प्रौद्योगिकी को पीछे छोड़ा है। रिटेल सेक्टर ने 6.5 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित किया। दोनों क्षेत्रों ने रिलायंस गु्रप की इकाइयों में बडे आकार के निवेश की वजह से निवेश के स्तरों में इजाफा दर्ज किया है। प्रौद्योगिकी ने 6 अरब डॉलर का निवेश दर्ज किया। ऑलाइन सेवा एग्रीगेटरों का टेक स्पेस में निवेश में बड़ा योगदान रहा।

First Published : December 24, 2020 | 9:05 PM IST