Nifty Outlook: इजरायल-अमेरिका-ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। इसी वजह से सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। कारोबार के दौरान एनएसई का निफ्टी 50 इंडेक्स 753 अंक यानी 3% से ज्यादा गिरकर 23,697 के स्तर तक पहुंच गया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड ऑयल फ्यूचर्स करीब 10% बढ़कर 119.43 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए। महीने की शुरुआत से अब तक इसमें करीब 78% की तेजी आ चुकी है। वहीं ब्रेंट क्रूड करीब 118 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जबकि फरवरी के अंत में इसकी कीमत करीब 72.43 डॉलर थी।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार का कहना है कि अगर ब्रेंट क्रूड की कीमत 115 डॉलर से ऊपर बनी रहती है, तो इसका असर दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। उनके मुताबिक भारत जैसे देशों पर ज्यादा दबाव पड़ेगा, क्योंकि वे अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल आयात करते हैं। अगर पश्चिम एशिया का संघर्ष लंबा चला और तेल महंगा बना रहा, तो महंगाई बढ़ने की संभावना भी बढ़ सकती है, चाहे कंपनियां तेल की बढ़ी कीमत का पूरा बोझ ग्राहकों पर डालें या नहीं।
विशेषज्ञों के मुताबिक अभी सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह संघर्ष कितने समय तक चलेगा। इस अनिश्चितता का असर विदेशी निवेशकों यानी एफआईआई के फैसलों पर भी पड़ रहा है। फरवरी में थोड़ी खरीदारी के बाद अब विदेशी निवेशक फिर से भारतीय बाजार में बिकवाली कर रहे हैं।
आंकड़ों के अनुसार ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से निफ्टी करीब 6% यानी लगभग 1,482 अंक गिर चुका है। हालांकि जनवरी में निफ्टी ने 26,373 का नया ऑल-टाइम हाई बनाया था, लेकिन 2026 में अब तक यह इंडेक्स करीब 9% से ज्यादा नीचे आ चुका है।
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चॉइस ब्रोकिंग के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट हितेश टेलर के मुताबिक निफ्टी 24,050 के अहम स्तर से नीचे फिसल गया है, जो पहले बाजार के लिए मजबूत सहारा माना जाता था। उनके अनुसार इस स्तर के नीचे जाने का मतलब है कि बाजार की तकनीकी स्थिति कमजोर हो गई है और फिलहाल गिरावट का दबाव बना रह सकता है।
टेलर का कहना है कि अभी निफ्टी के लिए 23,200 से 22,900 के बीच का स्तर अहम सहारा हो सकता है। अगर बाजार यहां टिकता है तो थोड़ी स्थिरता आ सकती है।
वहीं जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य बाजार रणनीतिकार आनंद जेम्स का मानना है कि निफ्टी में गिरावट का दौर थोड़ा लंबा चल सकता है। उनके मुताबिक अगर निफ्टी 23,535 के नीचे चला जाता है, तो गिरावट और तेज हो सकती है। ऐसी स्थिति में अगला सहारा करीब 22,000 के आसपास मिल सकता है, और अगर दबाव बना रहा तो निफ्टी 19,000 तक भी पहुंच सकता है।
हालांकि आनंद जेम्स का कहना है कि अगर निफ्टी फिर से 24,000 के ऊपर टिक जाता है, तभी बाजार में सुधार के संकेत मिलेंगे और निवेशकों का भरोसा वापस लौट सकता है।
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हितेश टेलर के मुताबिक सेंसेक्स के लिए फिलहाल 75,200 से 75,500 के बीच का स्तर अहम सहारा हो सकता है। अगर बाजार इस दायरे में टिकता है तो गिरावट कुछ समय के लिए रुक सकती है। वहीं ऊपर की ओर 77,500 का स्तर सेंसेक्स के लिए नजदीकी रुकावट बन सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और वैश्विक बाजारों में स्थिरता नहीं लौटती, तब तक निवेशकों और ट्रेडर्स को सावधानी से काम लेना चाहिए और जल्दबाजी में बड़ी खरीदारी करने से बचना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।