Market Outlook: इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार की चाल मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से प्रभावित रहने की संभावना है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के कारण ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है, जिसका सीधा असर वैश्विक और घरेलू निवेशकों के भरोसे पर पड़ रहा है। इसके साथ ही विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और वैश्विक बाजारों के रुख पर भी निवेशकों की नजर बनी रहेगी।
रिलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड में रिसर्च के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अजीत मिश्रा के अनुसार आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया से जुड़ी घटनाएं बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेतक बनी रहेंगी। उन्होंने कहा कि घरेलू स्तर पर 12 मार्च को जारी होने वाले उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर के आंकड़े भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक तेल बाजार में हाल के दिनों में तेजी देखी गई है। अंतरराष्ट्रीय मानक माने जाने वाले ब्रेंट क्रूड की कीमत 8.52 प्रतिशत बढ़कर 92.69 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। ऊर्जा कीमतों में यह तेजी ऐसे समय आई है जब पश्चिम एशिया में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं।
ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ टेक कंपनी एनरिच मनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पोनमुदी आर का कहना है कि आने वाला सप्ताह बाजार के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरा रह सकता है। उनके अनुसार पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां और रुपये की चाल निवेशकों की नजर में महत्वपूर्ण रहेंगी।
पिछले सप्ताह बाजार में भारी गिरावट देखी गई थी। बीएसई का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स सप्ताह भर में 2,368.29 अंक या 2.91 प्रतिशत गिर गया। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 728.2 अंक या लगभग 2.89 प्रतिशत नीचे आ गया। इस गिरावट के पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की अचानक बढ़ी कीमतें मुख्य कारण रही हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार विदेशी निवेशकों ने भी भारतीय बाजार से दूरी बनानी शुरू कर दी है। पिछले चार कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से लगभग 21,000 करोड़ रुपये की निकासी की है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी. के. विजयकुमार का कहना है कि पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर अनिश्चितता, बाजार में लगातार गिरावट, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और रुपये में कमजोरी जैसी परिस्थितियां विदेशी निवेशकों की बिकवाली के मुख्य कारण हैं। उन्होंने कहा कि जब तक इस संघर्ष की स्थिति स्पष्ट नहीं होती और कच्चे तेल की कीमतों में कमी नहीं आती, तब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की ओर से बड़े स्तर पर खरीदारी की संभावना कम ही है।
वी. के. विजयकुमार ने यह भी बताया कि यदि ब्रेंट क्रूड की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती है तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार दोनों के लिए चिंता का विषय बन सकता है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयातित तेल पर निर्भर है।
पश्चिम एशिया में तनाव तब और बढ़ गया जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई की। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। इसके बाद ईरान ने कई खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी और इजराइली सैन्य ठिकानों पर हमला किया। संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन और सऊदी अरब में हमले किए गए, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा वित्तीय बाजार प्रभावित हुए।