पश्चिम एशिया की लड़ाई का बाजार के माहौल पर बुरा असर पड़ा है। इस कारण बाजार की धारणा के मुख्य संकेतक उन स्तरों पर पहुंच गए हैं जो पिछली बार महामारी के झटके के दौरान देखे गए थे। चढ़ने-गिरने वाले शेयरों का अनुपात (एडीआर) बाजार धारणा का व्यापक पैमाना है और यह मार्च में गिरकर 0.71 पर आ गया है। यह मार्च 2020 के 0.72 के स्तर से भी ज्यादा खराब हो गया है। तब शेयर बाजार कोविड-19 के प्रकोप के असर से जूझ रहा था।
इस महीने बीएसई में अब तक 2,866 शेयरों में गिरावट आई है। यह हाल के वर्षों में किसी भी कैलेंडर महीने में सबसे ज्यादा है, वहीं सिर्फ 2,036 शेयरों में बढ़त हुई है। यह आंकड़ा बाजार में हो रही चौतरफा बिकवाली की ओर इशारा करता है।
बाजार के सभी हिस्सों में यह कमजोरी स्पष्ट दिखाई दे रही है। पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से निफ्टी-50 सूचकांक में लगभग 8 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक क्रमशः 7.4 प्रतिशत और 6.1 प्रतिशत नीचे आ गए हैं। इस बीच, पिछले दो सप्ताह में निवेशकों की संपत्ति में लगभग 34 लाख करोड़ रुपये की कमी आई है।
इस संघर्ष ने कई कारणों से निवेशकों को परेशान कर दिया है। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ा दिया है, जिससे भारत में महंगाई की रफ्तार और चालू खाते के घाटे को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। वजह कि देश आयातित ऊर्जा पर बहुत ज्यादा निर्भर है। साथ ही, वैश्विक निवेशक जोखिम लेने से कतराने लगे हैं। इसलिए भी विदेशी पोर्टफोलियो से भारी मात्रा में पैसा बाहर निकला है। यह निकासी लगभग 64,000 करोड़ रुपये है।
पिछले 12 महीनों में से छह महीनों में एडीआर 1 से नीचे रहा है, जिससे यह पता चलता है कि हालिया भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से पहले ही बाजार का मिजाज बिगड़ने लगा था।
यह अनुपात किसी खास दिन या समय में गिरने वाले शेयरों के मुकाबले बढ़ने वाले शेयरों की संख्या को मापता है। इसे पूरे बाजार की सेहत का पैमाना माना जाता है। एक से कम का रेशियो आम तौर पर संकेत देता है कि शेयरों में गिरावट, बढ़त से ज्यादा है, जिससे निवेशकों का कमजोर भरोसा जाहिर होता है।