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वैश्विक धारणा से भारतीय बाजारों को मिल सकती है मदद

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Last Updated- December 15, 2022 | 3:35 AM IST

बीएस बातचीत
वैश्विक बाजार उत्साहित बने हुए हैं क्योंकि कई देशों ने कोविड-19 से संबंधित लॉकडाउन के बाद व्यवसाय फिर से शुरू किए हैं। सेंट्रम ब्रोकिंग में इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के मुख्य कार्याधिकारी निश्चल माहेश्वरी ने पुनीत वाधवा के साथ बातचीत में कहा कि अब विदेशी निवेशक निर्यात-केंद्रित क्षेत्रों में अपना ध्यान बढ़ा सकते हैं। पेश हैं उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश:
अगले कुछ महीनों के लिए बाजार को लेकर आपका क्या नजरिया है?
भारतीय बाजार अब तक वैश्विक बाजारों के अनुरूप प्रदर्शन कर रहे हैं और माना जा रहा है कि यह रुझान बरकरार रहेगा। दुनियाभर में केंद्रीय बैंकों, खासकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा तरलता बढ़ाने के प्रयासों से धारणा को मजबूती मिली  है। लॉकडाउन मानकों में नरमी की वजह से आर्थिक गतिविधियों के पुन: चालू होने से भी इस तेजी को मदद मिली है। हम वैश्विक धारणा से भारतीय बाजारों को मजबूत समर्थन देख रहे हैं। कई प्रमुख केंद्रीय बैंकों से लगातार नकदी लगाए जाने की उम्मीद से धारणा में सुधार आया है।

क्या यह मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट के लिए अपने लार्ज-कैप प्रतिस्पर्धियों से मुकाबला करने का समय है?
मिड-कैप और स्कॉल-कैप ने हाल की तेजी में अपने बड़े प्रतिस्पर्धियों से पिछड़ गए हैं। ऐतिहासिक तौर पर लार्ज-कैप ने आर्थिक दबाव के समय में अच्छा प्रदर्शन किया है। बड़ी कंपनियां बाजार भागीदारी हासिल करने में सफल रहती हैं, क्योंकि अनिश्चितता से मुकाबले के लिए उनके पास मजबूत बैलेंस शीट होती है। यह समय भी अलग नहीं रहेगा।

जून तिमाही के आंकड़ों के बाद भारतीय उद्योग जगत के अनुमानों पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
कंपनियां उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करने में सफल रही हैं या उन्होंने जून 2020 की तिमाही में उम्मीदों को पूरा किया है। तिमाही से आगे देखें तो हमें आपूर्ति-मांग परिदृश्य से संबंधित बदलावों पर विचार करने और परिणाम के बजाय टिप्पणियों पर ज्यादा जोर देने की जरूरत होगी।

आरबीआई द्वारा ताजा बयानों पर आपकी क्या राय है?
आरबीआई ने अपनी मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत दरों में कोई बदनाव नहीं कर मुद्रास्फीति के अपने मुख्य लक्ष्य के प्रति वचनबद्घ बने रहने का निर्णय लिया है। इससे स्पष्ट संदेश गया है कि आगामी मौद्रिक नीतिगत संबंधी बदलाव की गुंजाइश बरकरार है। हालांकि मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) अपने मध्यावधि मुद्रास्फीति लक्ष्य को लेकर जागरूक है। मंदी की गहराती आशंका के बीच दरों में कोई बदलाव नहीं करना अल्पावधि में बढ़ रहे मुद्रास्फीतिकारी दबाव को दूर करने के लक्ष्य को दोहराना है। आपूर्ति संबंधित दबाव वित्त वर्ष 2021 की दूसरी छमाही में दूर होने से केंद्रीय बैंक को दर कटौती में मदद मिलेगी। कोविड-19 संबंधित दबाव से जुड़े खातों का पुनर्गठन निश्चित तौर पर सही दिशा में उठाया गया कदम है। हमने निवेशकों को वित्तीय रूप से दक्ष कंपनियों के मुकाबले परिचालन में सक्षम कंपनियों पर दांव लगाने की सलाह दी है।

क्या ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मजबूती से जुड़े सकारात्मक बदलावों की वजह से ने संबंधित शेयरों पर असर दिखा है?
अच्छी रबी खरीदारी, समय पर मॉनसून की दस्तक, जलाशयों में उपयुक्त स्तर, और मौजूदा आकर्षक खरीफ बुआई पैटर्न की वजह से ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए परिदृश्य सकारात्मक हुआ है। इन बदलावों के साथ साथ ग्रामीण कार्यक्रमों और पीएम गरीब कल्याण योजना (पीएमजीकेवाई) पर सरकार द्वारा खास ध्यान दिए जाना ग्रामीण मांग और आय के लिए अच्छा संकेत है। हम ट्रैक्टर बिक्री, दोपहिया बिक्री, उर्वरक बिक्री जैसे कुछ खास हाई फ्रिक्वेंसी इंडिकेटर (एचएफआई) में सुधार और ग्रामीण बेरोजगारी दर में गिरावट देख रहे हैं। हम हीरो मोटोकॉर्प और धानुका एग्री टेक पर सकारात्मक बने हुए हैं।

मार्च 2020 के निचले स्तरों के बाद से आपकी निवेश रणनीति कैसी रही है?
मार्च से, हम अपने दृष्टिकोण पर रक्षात्मक बने हुए हैं और निवेशकों को एफएमसीजी, आईटी, फार्मा और दूरसंचार जैसे क्षेत्रों पर ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं। आर्थिक गतिविधियां खुलने से, अब यह उपयुक्त समय है कि कुछ अच्छे वाहन तथा सीमेंट शेयरों में भी निवेश बढ़ाया जाए। हम मौजूदा समय में इन क्षेत्रों पर समान नजरिया अपना रहे हैं। क्षेत्र के तौर पर हालात सामान्य हो जाने और शहरी वृद्घि के परिदश्य में सुधार आने की स्थिति में पूंजीगत वस्तु/इन्फ्रास्ट्रक्चर पर विचार किया जा सकता है।

क्या अगले कुछ महीनों के दौरान विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों में निवेश बढ़ाएंगे?
कुछ खास अर्थव्यवस्थाओं और उभरते बाजारों में भारत की तुलना में ज्यादा तेजी से सुधार आ रहा है। विदेशी निवेशक निर्यात-केंद्रित क्षेत्रों में अपना ध्यान बढ़ा सकते हैं। भारत में, चूंकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था शहरी के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन कर रही है और उसमें संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं। इसे ध्यान में रखते हुए निवेशक ग्रामीण-केंद्रित शेयरों को पसंद कर सकते हैं।

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First Published - August 9, 2020 | 11:29 PM IST

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