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भारत केंद्रित ऑफशोर फंडों से हुई भारी निकासी

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 1:51 AM IST

एक श्रेणी के तौर पर भारत केंद्रित ऑफशोर फंड और ईटीएफ से शुद्ध निकासी जारी रही। जून में समाप्त तिमाही के दौरान इस श्रेणी से 1.5 अरब डॉलर की शुद्ध निकासी हुई, जो इससे पिछली तिमाही में हुई 37.6 करोड़ डॉलर के मुकाबले काफी ज्यादा है। यह लगातार 13वीं तिमाही है जब इस श्रेणी से शुद्ध निकासी देखने को मिली।
भारत केंद्रित ऑफशोर फंडों से लगातार 13वीं तिमाही शुद्ध निकासी हुई और जून में समाप्त तिमाही में 1.7 अरब डॉलर की निकासी हुई। हालांकि भारत केंद्रित ऑफशोर ईटीएफ में लगातार तीसरी तिमाही में निवेश देखने को मिला और जून तिमाही में शुद्ध निवेश 15.3 करोड़ डॉलर रहा, हालांकि यह रकम पिछली दो तिमाहियों के मुकाबले कम है। भारत केंद्रित ऑफशोर फंड व ईटीएफ निवेश का अहम जरिया है, जिसके जरिए विदेशी निवेशक भारतीय इक्विटी बाजारों में निवेश करते हैं। भारत केंद्रित ऑफशोर फंडों में निवेश को लंबी अवधि का निवेश माना जाता है जबकि भारत केंद्रित ऑफशोर ईटीएफ अल्पावधि वाले निवेश का संकेत देता है।

भारत केंद्रित ऑफशोर फंड व ईटीएफ श्रेणी से शुद्ध निकासी के बावजूद तिमाही के दौरान इसकी परिसंपत्तियों के आधार में बढ़ोतरी हुई, जिसकी वजह देसी इक्विटी बाजारों में लगातार रही तेजी है। तिमाही के दौरान इस श्रेणी की परिसंपत्तियां पिछली तिमाही के 44.5 अरब डॉलर के मुकाबले बढ़कर 46.3 अरब डॉलर पर पहुंच गईं। तिमाही के दौरान भारत केंद्रित ऑफशोर फंड व ईटीएफ श्रेणी में 7.1 फीसदी का इजाफा हुआ, जो एमएससीआई इंडिया यूएसडी इंडेक्स के मुकाबले मामूली ज्यादा रहा, जिसका रिटर्न 7 फीसदी था।
तिमाही के दौरान लार्ज, मिड व स्मॉलकैप ने अपना उम्दा प्रदर्शन जारी रखा। तिमाही में हालांकि बाजारों में व्यापक तेजी देखने को मिली, लेकिन मिड व स्मॉलकैप ने भारी बढ़त के साथ लार्जकैप को पीछे छोड़ा। एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स इस तिमाही में 6 फीसदी चढ़ा जबकि एसऐंडपी बीएसई मिडकैप व एसऐंडपी बीएसई स्मॉलकैप सूचकांकों ने क्रमश: 11.7 फीसदी व 22.2 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की।

मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट एडवाइजर इंडिया के सहायक निदेशक हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा, कोविड की दूसरी लहर का असर देश के इक्विटी बाजार में होने वाले विदेशी निवेश पर पड़ा। एफआईआई ने निवेश के फैसले को लेकर महामारी से जुड़ी प्रगति पर नजर रखी क्योंंकि विभिन्न राज्यों में लॉकडाउन ने आर्थिक अनिश्चितता का माहौल पैदा किया।

First Published : August 17, 2021 | 11:38 PM IST