विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) को जोड़ने के काम ने तेजी पकड़ ली है। सिटी (सिटी) ने बतौर डेजिग्नेटेड डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट (डीडीपी) पहली बार ऐसी फास्ट-ट्रैक पंजीकरण प्रक्रिया शुरू की है। इससे पंजीकरण का समय 5 कामकाजी दिन रह गया है, जो पहले करीब एक महीने तक खिंच जाता था।
बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एफपीआई को जोड़ने की समय-सीमा को घटाकर टी+5 करने के लिए पिछले कुछ महीनों में डिपॉजिटरी और कई कस्टोडियन के साथ बातचीत की है। सिटी की ई-एफपीआई पहल को चरणों में शुरू किया गया है। पहले चरण अभी चालू है और इसमें अमेरिका, आयरलैंड और लक्जमबर्ग के नियमन वाले सार्वजनिक फंडों (जिनमें म्युचुअल फंड और यूनिट ट्रस्ट शामिल हैं) को शामिल किया गया है। दूसरे चरण में सिंगापुर, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन को शामिल किया जाएगा।
सूत्रों का कहना है कि कॉमन ऐप्लिकेशन फॉर्म (सीएएफ), इंटरमीडियरीज के साथ बेहतर तालमेल और डिजिटल हस्ताक्षर के ज्यादा इस्तेमाल की वजह से काम तेजी से संभव हुआ है।
एक सूत्र ने बताया कि इसी तरह की तेज ऑनबोर्डिंग व्यवस्था शुरू करने के लिए दो और डीडीपी को लेकर बातचीत चल रही है। जैसे-जैसे और कस्टोडियन इसी तरह की तेज सुविधाएं तैयार कर रहे हैं, 5 दिन की समय-सीमा जल्द ही पूरे उद्योग में मानक बन सकती है।
यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है, जब सेबी पंजीकरण प्रक्रिया में रुकावटों की पहचान के लिए कस्टोडियन के साथ बातचीत कर रहा है। इस प्रक्रिया में अभी नैशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) प्लेटफॉर्म के जरिये ऑनलाइन पंजीकरण, डीडीपी से मंजूरी, सीएएफ की हस्ताक्षरित हार्ड कॉपी जमा करना और उसके बाद आयकर विभाग में पैन के लिए आवेदन करना शामिल है। ट्रेड के लिए तैयार होने से पहले एफपीआई को सिक्योरिटीज और कैश अकाउंट भी खोलने होते हैं, डीमैट और केवाईसी की औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं और एक यूनिक क्लाइंट कोड लेना होता है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब एफपीआई अपनी भारतीय संपत्तियां बेच रहे हैं। एक अन्य सूत्र ने कहा कि तेजी से पंजीकरण, भारत को वैश्विक निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक बनाने के एक उपाय के तौर पर देखा जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब कई देश एक ही तरह के निवेश फंड को आकर्षित करने के लिए आपस में होड़ कर रहे हैं।