facebookmetapixel
Advertisement
Power Grid में बीमा कंपनियों ने बढ़ाई हिस्सेदारी, विदेशी निवेशकों ने घटाई, क्या कहता है बदलता रुझान?Gold, Silver price today: सुरक्षित निवेश मांग से सोना ₹1600 चढ़ा, चांदी ₹3132 चमकीBSE Share: Nifty 50 में होगी BSE की एंट्री, Wipro की जगह लेगा शेयर; 30 सितंबर से लागू होगा बदलावजुलाई में SBI Life की रफ्तार तेज, HDFC Life पिछड़ी; आगे कैसी रहेगी बीमा कंपनियों की चाल?Crude Oil Price: कच्चे तेल में तेजी, WTI 82.18 डॉलर तो ब्रेंट 87.76 डॉलर परOpening Bell: बाजार में गिरावट! Sensex 300 अंक टूटा, Nifty 24,500 के करीब; Adani Group के शेयरों में तेजीStocks To Watch Today: BEL से Lupin तक 10 शेयरों में बड़ा अपडेट, कहीं मिला ऑर्डर तो कहीं जुटेगा पैसा; आज बाजार में किस स्टॉक पर रहेगी नजर?1601 नंबर से आएगी अधिकृत कॉल, TRAI ने ठगी रोकने के लिए बढ़ाया दायरानरसिम्हा राव-मनमोहन से वाजपेयी-मोदी तक: एनके सिंह ने बताया कैसे बदला भारत की आर्थिक स्थिरता का सफरझारखंड में भर्ती परीक्षाओं की कथित धांधली पर बवाल, छात्रों पर पुलिस का लाठीचार्ज

Fertilizer Sector: सब्सिडी बढ़ी, फिर भी खाद कंपनियों पर संकट, क्या बढ़ेंगे दाम?

Advertisement

सरकार ने नाइट्रोजन, फॉस्फेट और सल्फर पर सब्सिडी करीब 10 प्रतिशत बढ़ाई है, जबकि पोटाश की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया

Last Updated- April 09, 2026 | 12:40 PM IST
fertilizer

सरकार ने खरीफ सीजन के लिए खाद पर सब्सिडी बढ़ा दी है, लेकिन इससे कंपनियों को पूरी राहत नहीं मिली है। एंटीक स्टॉक ब्रोकरेज की रिपोर्ट कहती है कि हालात अभी भी चुनौती भरे हैं। कच्चे माल की कीमतें इतनी ज्यादा हैं कि कंपनियों का खर्च कम नहीं हो पा रहा। यानी सरकार ने मदद तो की है, लेकिन दबाव अभी भी बना हुआ है।

किस चीज पर कितनी सब्सिडी बढ़ी?

सरकार ने नाइट्रोजन, फॉस्फेट और सल्फर पर सब्सिडी करीब 10 प्रतिशत बढ़ाई है, जबकि पोटाश की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया। इस फैसले से सरकार का खर्च भी बढ़ गया है। पहली छमाही में करीब 415 अरब रुपये खर्च होंगे, जो पिछले साल से ज्यादा है। पूरे साल के लिए गैर-यूरिया खाद पर 540 अरब रुपये का बजट रखा गया है। डीएपी पर सब्सिडी भी बढ़ाई गई है, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक यह बढ़ोतरी अभी भी पूरी तरह पर्याप्त नहीं है।

कच्चा माल बना सबसे बड़ी परेशानी

असल दिक्कत कच्चे माल की कीमतों में है। फॉस्फोरिक एसिड की कीमत करीब 1300 डॉलर प्रति टन के आसपास स्थिर है, जिससे थोड़ी राहत है। लेकिन अमोनिया और सल्फर की कीमतों में तेज उछाल आया है। अमोनिया करीब 30 प्रतिशत और सल्फर करीब 21 प्रतिशत महंगा हो गया है। भारत इन कच्चे माल के लिए काफी हद तक बाहर के देशों पर निर्भर है। ऐसे में जैसे ही मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ता है, कीमतें बढ़ जाती हैं और कंपनियों का खर्च बढ़ जाता है।

मुनाफे पर दबाव, कीमत बढ़ाना पड़ सकता है जरूरी

रिपोर्ट साफ कहती है कि कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बना रहेगा, खासकर साल की पहली छमाही में। अगर कंपनियां खाद के दाम नहीं बढ़ातीं, तो उनका मार्जिन कम हो सकता है। सीधी भाषा में कहें तो कंपनियों के पास दो ही रास्ते हैं, या तो कम मुनाफे में काम करें या फिर कीमत बढ़ाएं। इसलिए आगे चलकर खाद के दाम बढ़ने की संभावना बन रही है।

किन कंपनियों को फायदा मिल सकता है?

हर कंपनी की स्थिति एक जैसी नहीं है। जिन कंपनियों के पास खुद का कच्चा माल है या जो अपनी सप्लाई चेन को अच्छे से कंट्रोल करती हैं, उन्हें ज्यादा फायदा होगा। कोरोमंडल इंटरनेशनल और पारादीप फॉस्फेट जैसी कंपनियां इस मामले में मजबूत स्थिति में हैं। इन्हें फॉस्फोरिक एसिड के स्थिर भाव और रॉक फॉस्फेट की कीमतों में आई गिरावट का फायदा मिल सकता है।

किन कंपनियों को ज्यादा झटका लग सकता है?

जो कंपनियां पूरी तरह आयात पर निर्भर हैं, उनके लिए हालात मुश्किल हैं। डीएपी की कीमतें अभी भी करीब 780 डॉलर प्रति टन के आसपास बनी हुई हैं, जिससे इन कंपनियों की लागत ज्यादा बनी हुई है। ऐसी कंपनियों के लिए मुनाफा बचाना आसान नहीं होगा और उन्हें ज्यादा दबाव झेलना पड़ सकता है।

आगे क्या हो सकता है?

अगर मिडिल ईस्ट का तनाव कम होता है, तो कच्चे माल की कीमतें भी धीरे-धीरे नीचे आ सकती हैं। इससे कंपनियों को राहत मिलेगी और मुनाफा सुधर सकता है। लेकिन फिलहाल के हालात में पहली छमाही तक दबाव बना रह सकता है और कंपनियों को सावधानी से काम करना होगा।

Advertisement
First Published - April 9, 2026 | 12:40 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement