मार्जिन के नियमों को सख्त बनाए जाने के बावजूद इक्विटी बाजार के वॉल्यूम में 2021-22 के दौरान सालाना आधार पर मजबूत बढ़ोतरी दर्ज हुई। इक्विटी कैश मार्केट 9 फीसदी बढ़ा और डेरिवेटिव वॉल्यूम में 2.6 गुने की उछाल दर्ज हुई। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के विश्लेषकों अंशुमन देव और रविन करवा ने एक नोट में कहा, डेरिवेटिव में ज्यादा बढ़ोतरी को साल के दौरान मार्जिन के नियम लागू किए जाने से बल मिला।
कथित तौर पर पीक मार्जिन के नियम दिसंबर 2020 से चरणबद्ध तरीके से लागू हुए। दिसंबर 2020 से फरवरी 2021 के बीच ट्रेडरों से पीक मार्जिन का कम से कम 25 फीसदी बनाए रखने की उम्मीद की गई। मार्च व मई 2021 के बीच मार्जिन में 50 फीसदी की बढ़ोतरी की गई। अगस्त तक इसे बढ़ाकर 75 फीसदी कर दिया गया और अंतत: सितंबर 2021 से यह 100 फीसदी कर दिया गया। सितंबर से ब्रोकरेज फर्मों को अतिरिक्त इंट्राडे लिवरेज इक्विटी व डेरिवेटिव कारोबार के लिए देने से रोक दिया गया।
मार्च 2022 में कैश वॉल्यूम में पिछले महीने के मुकाबले मासिक आधार पर 12 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई, वहीं ऑप्शन का वॉल्यूम 4 फीसदी घट गया। इक्विटी कैश सेगमेंट में एनएसई का औसत ट्रेडिंग वॉल्यूम मार्च 2022 में मासिक आधार पर 13 फीसदी बढक़र 65,900 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, वहीं बीएसई में यह मासिक आधार पर 5 फीसदी बढक़र 5,100 करोड़ रुपये पर पहुंचा। ऑप्शन सेगमेंट में एनएसई का औसत ट्रेडिंग वॉल्यूम मार्च 2022 में मासिक आधार पर 5 फीसदी घटा क्योंकि इंडिया वीआईएक्स 28 फीसदी फिसला।
एनएसई का कुल इक्विटी ट्रेडिंग वॉल्यूम औसत रूप से मार्च 2022 में 95 लाख करोड़ रुपये रहा, जो मासिक आधार पर 5 फीसदी कम है, जिसकी वजह ऑप्शंस के वॉल्यूम में आई गिरावट है। दूसरी ओर बीएसई का ऑप्शंस मासिक आधार पर 3 फीसदी बढक़र मार्च 2022 में 2.5 लाख करोड़ रुपये रहा।
एनएसई ने अपनी अग्रणी स्थिति को और मजबूत किया। नकदी सेगमेंट में उसकी बाजार हिस्सेदारी जून 2021 के 91.2 फीसदी से बढक़र मार्च 2022 में 92.9 फीसदी पर पहुंच गया। इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट में बाजार हिस्सेदारी इस अवधि में 93.8 फीसदी से बढक़र 97.5 फीसदी पर पहुंच गई। एनएसई की बाजार हिस्सेदारी वित्त वर्ष 22 में 92.5 फीसदी रही, जो वित्त वर्ष 21 में 93.6 फीसदी रही थी।