ब्रोकरों ने इसे लेकर चिंता जताई है कि नए मार्जिन नियमों की वजह से कारोबारी सदस्यों पर गैर-जरूरी जुर्माने को बढ़ावा मिल रहा है। इन सदस्यों के लिए सौदे होने से पहले ही अग्रिम पूंजी संग्रह अनिवार्य बनाया गया है।
ब्रोकरों के लिए उद्योग संगठन एसोसिएशन ऑफ नैशनल एक्सचेंजेज मेंबर्स ऑफ इंडिया (एएनएमआई) ने बाजार नियामक सेबी को पत्र लिखकर कई चिंताओं से अवगत कराया है। मार्जिन में कमी या गैर-संग्रह के लिए जुर्माना संक्षिप्त संग्रह के आधार पर 0.5 और 1 प्रतिशत के बीच है। एएनएमआई के अनुसार, पोजीशन के लिए मार्जिन बढऩे पर सदस्यों को पीक मार्जिन जुर्माना ग्राहक पर डालने की अनुमति दी जानी चाहिए।
एएनएमआई उस मॉडल के पक्ष में है जो कारोबारी सदस्य द्वारा एकत्रित पीक मार्जिन का अनुमान लगा सके, जिससे कि किसी निर्धारित दिन, अग्रिम मार्जिन पर टी-1 दिन के लिए मार्जिन के आधार पर निर्धारित किया जा सके। उद्योग संगठन चाहता है कि इस निर्धारण के लिए टी+1 डे टाइमलाइन पर टी-डे पीक और/या डे मार्जिन के अंत के विवरण पर विचार होना चाहिए।
सेबी को लिखे पत्र में एएनएमआई ने कहा है, ‘इन समय-सीमाओं पर अनुपालन की अनुमति से यह सुनिश्चित होगा कि पीक मार्जिन जुर्माना बगैर किसी कारण के नहीं लगाया जाएगा और सदस्यों को पीक मार्जिन नियमों का पालन करना होगा।’ 1 सितंबर से, पीक मार्जिन मानकों का चौथा चरण शुरू होगा। इसमें वीएआर+ईएलएम (इक्विटी) और स्पैन +एक्सपोजर (एफऐंडओ) के अलावा कोई अतिरिक्त मार्जिन नहीं होगा।