बेंचमार्क सूचकांकों ने शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन बढ़ोतरी हुई और इस तरह से जुलाई के आखिर के बाद सबसे बड़ी साप्ताहिक उछाल दर्ज की। कारोबारी सत्र के दौरान सेंसेक्स 60,000 के पार चला गया था जबकि निफ्टी 18,000 के करीब था। अंत में सेंसेक्स 105 अंक यानी 0.18 फीसदी की बढ़त के साथ 59,793 अंक पर कारोबार की समाप्ति की, वहीं निफ्टी 35 अंक चढ़कर 17,833 पर बंद हुआ। हफ्ते के दौरान दोनों सूचकांकों में 1.7 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई, जो 31 जुलाई के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त है।
पिटे हुए आईटी शेयरों में बढ़त शुक्रवार के कारोबार का मुख्य घटनाक्रम रहा। निफ्टी आईटी इंडेक्स 2.2 फीसदी चढ़ा और इन्फोसिस में 2.4 फीसदी व टीसीएस में 1.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
बीएनपी पारिबा के भारतीय इक्विटी शोध प्रमुख कुणाल वोरा ने कहा, हमारा मानना है कि भारतीय आईटी क्षेत्र हालांकि अल्पावधि में मंदी की चिंता से दबाव का सामना कर सकता है, लेकिन यह जनवरी 2022 के अपने सर्वोच्च स्तर से 28 फीसदी की गिरावट के बाद अच्छे मूल्यांकन की पेशकश कर रहा है। साथ ही इसमें मध्यम से लंबी अवधि के लिहाज से बढ़त की क्षमता है।
आईटी के अलावा निजी बैंकों का उम्दा प्रदर्शन जारी रहा। निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स शुक्रवार को 0.6 फीसदी चढ़ा और हफ्ते में इसमें 2.5 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई।
वोरा ने कहा, बाजार पर हमारा नजरिया हालांकि सतर्क है, लेकिन हम कुछ क्षेत्रों व शेयरों की तरफ से मूल्यांकन व बढ़त की सहजता की पेशकश देख रहे हैं। हम बैंकिंग क्षेत्र पर ओवरवेट बने हुए हैं।
पिछले तीन महीने में भारतीय बाजारों ने ज्यादातर वैश्विक बाजारों के मुकाबले उम्दा प्रदर्शन किया है। उम्दा प्रदर्शन ने भारत का मूल्यांकन प्रीमियम अन्य उभरते बाजारों के मुकाबले बढ़ा दिया है। साथ ही एकल आधार पर निफ्टी-50 वित्त वर्ष 23 के अपने आय अनुमान के करीब 22 गुने पर कारोबार कर रहा है।
कोटक इंस्टिट्यूशनल इक्विटीज के संजीव प्रसाद की अगुआई में रणनीतिकारों ने इस हफ्ते एक नोट में कहा है, भारत का मजबूत प्रदर्शन संभवत: निवेशकों के इस भरोसे को प्रतिबिंबित कर रहा है कि अन्य के मुकाबले भारतीय अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में है। यह बढ़त के लिहाज से सही हो सकती है लेकिन अन्य आर्थिक मानदंडों मसलन भुगतान संतुलन, राजकोषीय स्थिति व महंगाई के मामले में नहीं। साथही कोविड-19 के बाद आर्थिक सुधार अभी तक मानक से कम रहा है। हम घरों व प्राइवेट पूंजीगत खर्च (उत्पादन से जुड़ाव वाली प्रोत्साहन योजना) में सुधार की शुरुआत वित्त वर्ष 25 से देख सकते हैं, लेकिन वैश्विक मंदी व देसी महंगाई के मसले ने हमारा पहले का उत्साह थोड़ा कम कर दिया है।
अमेरिकी डॉलर के पिछड़ने के बीच ज्यादातर वैश्विक बाजार शुक्रवार को चढ़े क्योंकि यूरोपीय केंद्रीय बैंक की तरफ से ब्याज दर बढ़ाने के बाद यूरो में उछाल आई। विशेषज्ञों ने कहा कि निवेशक देख रहे हैं कि क्या वैश्विक केंद्रीय बैंकों की सख्ती को बाजार पहले ही समाहित तो नहीं कर लिया है।
जियोजित फाइनैंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, वैश्विक सूचकांकों में बढ़ोतरी हुई क्योंकि निवेशकों ने मौद्रिक नीति के परिदृश्य का फिर से आकलन किया। यूरोप में ऊर्जा संकट निवेशकों को परेशान कर रहा है, वहीं चीन के नीति निर्माताओं की तरफ से अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश चीन के एक्सचेंजों के लिए अच्छी रही।
शुक्रवार को बाजार में चढ़ने व गिरने वाले शेयरों का अनुपात मिश्रित रहा और 1,658 शेयर चढ़े जबकि 1,798 में गिरावट आई। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का एमकैप 283 लाख करोड़ रुपये की रिकॉर्ड ऊंचाई पर रहा।