दुनिया के अधिकांश शेयर बाजारों में इस सप्ताह के अंत में तेजी आई है। जून में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में वृद्धि किए जाने के बाद शेयर बाजार में सुस्ती आ गई थी और मार्केट साल के निम्नतम स्तर पर पहुँच गया था। लेकिन अब मुद्रास्फीति कम रहने और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर में और वृद्धि न होने की उम्मीदों के बीच शेयर बाजार ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ी है। हालांकि भारतीय स्टॉक एक्सचेंज का प्रदर्शन सबसे अलग है। दुनिया के अन्य शेयर बाजारों के मुकाबले निफ्टी-50 में सबसे अधिक 13 फीसदी की वृद्धि हुई। यह 17 जून को 13 महीने के निम्नतम स्तर के बाद हुई वृद्धि है। मुद्रा बाजार में डॉलर में 12.8 फीसदी की तेजी रही। डॉलर के मुकाबले सभी वैश्विक मुद्राएं कमजोर रहीं जिससे अमेरिका को फायदा हुआ।
जून मे रिस्की संपत्तियों में धन निवेश करने से लोग बचने लगे थे। बहुत सारे निवेशकों ने शेयर मार्केट से अपना रुपया निकाल लिया था। लोग अपना धन बांड, जमीन और सोना आदि में लगाने लगे थे। इसके अलावा फेडरल रिजर्व द्वारा हुई ब्याज वृद्धि के कारण निवेशक मंदी की उम्मीद लगा रहे थे। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण कमोडिटी बाजार की कीमतें भी प्रभावित हुई थीं। इस ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया था।
17 जून को सेंसेक्स ने 51,360.4 का स्तर दर्ज किया था। उस सप्ताह इसमें 3,000 बिंदु की गिरावट आई थी। 8 मई 2020 के बाद यह किसी सप्ताह का सबसे खराब प्रदर्शन था। अब बाजार में फिर से तेजी आई है। और इस सप्ताह के अंत में सेंसेक्स 58,387.93 के स्तर पर बंद हुआ। मंदी और केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों की आक्रामक ब्याज वृद्धि और सख्ती का डर खत्म हुआ है। कमोडिटी बाजार ने इसे उबरने में मदद की है।
यद्यपि फेडरल रिजर्व बैंक नें जुलाई में ब्याज दर में 75 आधार अंको की बढ़ोतरी की है। जेरोमी पॉवेल कहते है कि भविष्य की वृद्धि डेटा की धारणाओं से प्रभावित होगी। निफ्टी-50 इस सप्ताह 4 महीने के उच्चतम स्तर 17,397.50 पर बंद हुआ।