सस्ती आवास परियोजनाओं की घटी मांग

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 2:32 AM IST

आर्थिक दबाव और घटती आय से उत्पन्न प्रतिकूल हालात के बीच देश का रियल एस्टेट क्षेत्र बड़े बदलाव से गुजर रहा है। मौजूदा आर्थिक तंगी के बीच देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा अपने खर्च में कटौती कर रहा है, जिसका सीधा असर सस्ती आवास परियोजनाओं के बाजार पर दिख रहा है। बाजार पर शोध करने वाली कंपनी एनारॉक रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार देश के सात सबसे बड़े शहरों में शुरू हुई नई परियोजनाओं में सस्ते आवास खंड (40 लाख रुपये से कम मूल्य वाले मकान) की हिस्सेदारी कोविड-19 महामारी के बाद तेजी से कम हुई है। वर्ष 2020 में सस्ते आवास खंड की इसमें 40 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, जो अप्रैल-जून 2021 में कम होकर 20 प्रतिशत रह गई है।
इस बीच, महंगे मकानों (80 लाख से 1.5 करोड़ रुपये के बीच) की मांग और इनसे जुड़ी परियोजनाएं तेजी से खड़ी हो रही हैं। 2019 के अंत तक नई परियोजनाओं में इस खंड की हिस्सेदारी मात्र 15 प्रतिशत हुआ करती थी, जो जून 2021 तिमाही में यह और बढ़कर 36 प्रतिशत तक पहुंच गई। नई परियोजनाओं में मझोले खंड (40 लाख से 80 लाख रुपये कीमत वाले मकान) के मकानों की हिस्सेदारी जून में 32 प्रतिशत रही, जो वर्ष 2020 में 40 प्रतिशत तक पहुंच गई थी।
रियल एस्टेट बाजार में कभी बड़ी हिस्सेदारी रखने वाले सस्ते आवास खंड का दबदबा लगातार कम हो रहा है, जिसका मुख्य कारण कोविड महामारी से पैदा हालात हैं। उद्योग जगत के विशेषज्ञों और रियल एस्टेट कारोबारियों के अनुसार मौजूदा मंदी के कई कारण हैं।
गौर्स ग्रुप के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक तथा क्रेडाई  नैशनल के उत्तरी क्षेत्र के उपाध्यक्ष मनोज गौड़ का कहना है कि बार-बार लॉकडाउन लगने और निर्माण सामग्री महंगी होने का सस्ती आवासीय परियोजनाओं पर प्रतिकूल असर हो रहा है और अब इनका कारोबार फायदेमंद नहीं रह गया है। गौड़ ने कहा, ‘पिछले एक वर्ष के दौरान लागत 20 प्रतिशत तक बढ़ गई है। इस वर्ष भी लॉकडाउन लगने से परियोजनाएं तैयार होने में देर हो रही है और लागत बढ़ रही है। मगर रेरा ने परियेाजना पूरी होने की समय सीमा में अभी तक कोई ढील नहीं दी है। सस्ती आवासीय परियोजनाएं तैयार करने वाली कंपनियां काफी कम मुनाफे पर कारोबार कर रही है।’
हरियाणा में गुरुग्राम और आसपास के इलाकों में सस्ती आवासीय योजनाओं पर जोर देने वाली सिग्नेचर ग्लोबल अब भूखंड विकास और मझोले खंड की आवास परियोजनाओं पर काम कर रही है। कंपनी के चेयरमैन प्रदीप अग्रवाल ने कहा कि बड़े अपार्टमेंट की अधिक मांग का फायदा उठाने के लिए कंपनी राज्य की नई आवासीय नीति के सहारे है।
(साथ में संजय कुमार सिंह और अभिजित लेले)

First Published : July 21, 2021 | 11:32 PM IST