अब करोड़ों मवेशियों का टीकाकरण

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 4:22 PM IST

कोविड टीकाकरण के बाद अब देश में मवेशियों को टीके लगाने का भी बड़ा अभियान शुरू होने जा रहा है। यह टीकाकरण मवेशियों को लंपी चर्म रोग से बचाने के लिए होगा क्योंकि उनके शरीर में गांठ डालने वाला यह जानलेवा रोग देश में तेजी से फैल रहा है। इसलिए सरकार और सहकारी डेरी दूध उत्पादन में गिरावट से बचने के लिए तेजी से मवेशियों को टीके लगाने की कोशिश में हैं। 

देश में दूध के सालाना उत्पादन पर लंपी चर्म रोग का असर अभी अनिश्चित है। विशेषज्ञ उत्पादन में बड़ी गिरावट की चेतावनी दे रहे हैं मगर इस उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि यह असर शायद सीमित ही रहेगा और बीमारी फैलने के स्तर पर निर्भर करेगा। 

देश में दूध का सालाना उत्पादन 21 करोड़ टन से अधिक है, जिसमें हाल के वर्षों में गाय के दूध की हिस्सेदारी बढ़ गई है। हर साल होने वाले कुल दूध में 51 फीसदी गाय का दूध होता है और करीब 45 फीसदी भैंस से मिलता है। बाकी दूध बकरी का होता है। लंपी चर्म रोग मुख्य रूप से गायों में फैल रहा है मगर अब यह भैंसों में भी फैलने लगा है। देश में अभी लंपी चर्म रोग के किसी भी टीके को मंजूरी हासिल नहीं है, इसलिए संक्रमण से बचाव के लिए मवेशियों को गोट पॉक्स टीका लगाया जा रहा है। फिलहाल यह टीका इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स लिमिटेड (आईआईएल) और पशु टीका बनाने वाली अहमदाबाद की निजी कंपनी हेस्टर बायोसाइंस ही बनाती हैं। ये दोनों कंपनियां ही गोट पॉक्स टीका दे रही हैं। आईआईएल राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) की इकाई है।

डेरी विकास बोर्ड के प्रवक्ता ने कहा, ‘एनडीडीबी के पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स ने गोट पॉक्स टीके का उत्पादन बढ़ा दिया है। अब यह हर हफ्ते 18 लाख खुराक बना रही है ताकि टीके की बढ़ती मांग पूरी की जा सके।’ 

हेस्टर ने भी आपूर्ति बढ़ा दी है। गुजरात के उसके संयंत्र की 70 फीसदी क्षमता गोट पॉक्स टीका बनाने में ही इस्तेमाल हो रही है।हेस्टर के मुख्य कार्य अधिकारी राजीव गांधी ने कहा, ‘अब हम हर महीने करीब 4-5 करोड़ खुराक बना सकेंगे और आगे भी बढ़ोतरी की संभावना है।’ हेस्टर और आईआईएल मिलकर हर महीने 4.8 से 5.8 करोड़ खुराकें तैयार कर रही हैं। गांधी ने कहा कि केंद्र हालात पर कड़ी नजर बनाए हुए है और इस मुद्दे पर रोजाना फोन कॉल तथा बैठकें होती हैं। 

पशु चिकित्सकों की किल्लत और टीकों की उपलब्धता में कमी देखते हुए भारत में मवेशियों की बड़ी तादाद का टीकाकरण मुश्किल काम है। चिंताजनक बात यह है कि बीमारी शुरुआत में गायों में फैल रही थी, लेकिन अब पंजाब जैसे राज्यों में भैंसों में भी फैलने लगी है। 

First Published : August 23, 2022 | 10:01 PM IST