इस वर्ष के अंत तक कोविड-19 से बचाव के लिए टीके की दो अरब खुराक उपलब्ध कराने के लिए बहुत लंबा रास्ता तय करना पड़ सकता है। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि दिसंबर के अंत देश की वयस्क आबादी के एक बड़े हिस्से को कम से कम एक खुराक देना जरूर मुमकिन लग रहा है। यह राहत की बात है। दो अरब खुराक उपलब्ध होने का सारा दारोमदार टीके बनाने में काम आने वाले रासायनिक तत्वों की उपलब्धता, इन तत्वों के उत्पादन में इजाफे, टीके शीशी में भरे जाने और इनकी पैकेजिंग की गति पर होगा।
दुनिया में टीकों का सर्वाधिक उत्पादन करने वाली कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया कोविशील्ड की 7 करोड़ खुराक बना रही है और उसने नोवावैक्स का भी उत्पादन एवं भंडारण शुरू कर दिया है। इस वर्ष जुलाई तिमाही में सीरम हर महीने 10 करोड़ खुराक बनाने की क्षमता हासिल कर लेगी। अगर मान लें कि अगस्त से 10 करोड़ खुराक बननी शुरू होती हैं तो अगस्त से दिसंबर के बीच कंपनी 50 करोड़ खुराक की आपूर्ति कर सकती है। मई से जुलाई के बीच केंद्र सरकार को कोविशील्ड की करीब 16 करोड़ खुराक मिलने की उम्मीद है और इतनी ही खुराक निजी अस्पतालों और राज्यों को दी जा सकती हैं। कुल मिलाकर मई से दिसंबर के बीच 82 करोड़ खुराक उपलब्ध हो जाएंगी।
सीरम पुणे के अपने संयंत्र में हर महीने कोवोवैक्स (नोवावैक्स टीका)की 5 करोड़ खुराक बनाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी अदार पूनावाला ने संकेत दिए हैं कि कच्चे माल की कमी के कारण पूरी क्षमता से टीका उत्पादन में रुकावट आ रही है। नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) वी के पॉल ने कहा है कि अगस्त से दिसंबर के बीच सीरम से कोवोवैक्स की 20 करोड़ खुराक उपलब्ध होने की उम्मीद है यानी मोटे तौर पर हर महीने करीब 4 करोड़ खुराक मिलेंगी।
देश में टीका उत्पादन पर नजर रखने वाले एक विश्लेषक ने कहा, ‘अगर हम मानें कि सीरम हर महीने कोवोवैक्स की 2.5 से 3 करोड़ खुराक ही तैयार कर पाती है तो भी देश को 12.5 से 15 करोड़ खुराक मिल सकती हैं। कंपनी ने नोवावैक्स के साथ उसका टीका बनाने का समझौता कर रखा है, इसलिए यह देखना होगा कि कंपनी टीकों के उत्पादन के लिए समय किस तरह विभाजित करती है।’ उन्होंने कहा कि मई से दिसंबर के बीच देश को सीरम से ही 1 अरब खुराक मिल जानी चाहिए। इसके अलावा भारत बायोटेक, स्पूतनिक वी की विनिर्माता, जायडस कैडिला और बायोलॉजिक ई जेनोवा भी अपने टीकों की तैयारियों में जुट गई हैं। लेकिन उनमें से कुछ का पहले चरण का परीक्षण चल रहा है, इसलिए बाजार में आने में वक्त लग सकता है। सरकार को उम्मीद है कि भारत बायोटेक से कोवैक्सीन की 55 करोड़ खुराक और नैजल (नाक के जरिये दिए जाने वाले) वैक्सीन की 10 करोड़ खुराक मिल सकती हैं। कंपनी इस समय नैजल वैक्सीन का परीक्षण कर रही है। उसे मई और जुलाई के बीच के बीच 5 करोड़ टीकों की आपूर्ति करनी है। कंपनी प्रत्येक महीने 1.5 करोड़ खुराक बना रही है और अपने बेंगलूरु संयंत्र में उत्पादन क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर रही है। सितंबर तक कोवैक्सीन के टीके की 10 करोड़ खुराक प्रतिमाह तैयार करने का लक्ष्य था। आधा लक्ष्य भी हासिल हो जाता है तो अगस्त से दिसंबर के बीच 25 करोड़ खुराक आराम से उपलब्ध हो सकती हैं। भारत में स्पूतनिक वी आज ही उतारा गया है। माना जा रहा है कि जुलाई तिमाही से भारतीय टीका विनिर्माता कंपनियां इसे बाजार में उतारने लगेंगी। विश्लेषक ने कहा, ‘इस वर्ष भारत के लिए स्पूतनिक वी की 25 करोड़ खुराक उपलब्ध होंगी। अगर मांग बढ़ी तो खुराक की तादाद बढ़ सकती है। रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (आरडीआईएफ) ने भारत में 85 करोड़ खुराक के उत्पादन की तैयारी की है।’ अरबिंदो फार्मा भी जून के अंत तक टीका उत्पादन करने के लिए एक स्टराइल इन्जेक्टेबल का संयंत्र तैयार कर ही है, जिसकी क्षमता सालाना 20 से 22 करोड़ खुराक होगी।’
कंपनी ने किसी कंपनी से साझेदारी की घोषणा नहीं की है, लेकिन इस वर्ष की दूसरी छमाही में हैदराबाद की यह कंपनी 8 से 10 करोड़ खुराक दे सकती है।
जायडस कैडिला भी अपने डीएनए-प्लाज्मिड टीके के लाइसेंस के लिए जल्द आवेदन कर सकती है। विश्लेषकों के अनुसार कंपनी इस वर्ष 10 से 12 करोड़ खुराक की आपूर्ति कर पाएगी। बायोलॉजिकल ई का टीका परीक्षण के तीसरे चरण में है और अगस्त तक इसके तैयार होने की उम्मीद है। पॉल को उम्मीद है कि कंपनी 30 करोड़ टीके की आपूर्ति कर सकती है। इसका टीका यीस्ट पर आधारित है, इसलिए उसे कई कंपनियां बड़े स्तर पर बना सकती हैं।
टीका उपलब्ध होने के संबंध अनुमान पर एक टीका बनाने वाली कंपनी ने कहा, ‘इसमें कोई शक नहीं कि लक्ष्य काफी बड़ा है, लेकिन यह हासिल किया जा सकता है। कच्चे माल की उपलब्धता और बड़े पैमाने पर टीके बनाने की क्षमता चुनौती साबित हो सकती हैं। टीके में इस्तेमाल होने वाले रसासायनिक तत्वों का उत्पादन बड़ी चुनौती है।’
इस बीच टीका उद्योग को उम्मीद है कि आवश्यक ढांचा तैयार करने में उन्हें सरकार से मदद मिलेगी। एक टीका विनिर्माता कंपनी के एक वरिष्ठï अधिकाी ने कहा कि कंपनियां उत्पादन क्षमता बढ़ाने की अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रही हैं, लेकिन अगर सरकार से भी कुछ वित्तीय सहायता मिला जाए तो काफी मदद मिलेगी। सहायता मिली तो क्षमता दोगुनी हो सकती है और कंपनियां बिना मार्जिन कमाए सरकार को टीके दे सकती हैं।
अब तक सरकार ने टीका उत्पादन में तेजी लाने के लिए भारत बायोटेक को उसके बेंगलूरु संयंत्र में आवश्यक बदलाव के लए 65 करोड़ रुपये अनुदान के रूप में दिए हैं। मुंबई की हाफकिन बायोफार्मास्युटिकल्स को भी हर महीने 2 करोड़ खुराक बनाने के लिए 65 करोड़ रुपये दिए गए हैं। सीरम और भारत बायोटेक को केंद्र से सप्लायर्स क्रेडिट के रूप में 4,500 करोड़ रुपये मिलेंगे। व्यय विभाग सामान्य वित्तीय नियमों में ढील देने के लिए राजी हो गया है और उसने स्वास्थ्य विभाग को दो टीका विनिर्माताओं को बैंक गारंटी के बिना अग्रिम भुगतान करने की अनुमति भी दे दी है।