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आसान नहीं स्थानीय आरक्षण

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Last Updated- December 15, 2022 | 3:13 AM IST

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सरकारी नौकरियों में स्थानीय युवाओं को आरक्षण देने के लिए कानून बनाने का वादा जरूर किया है लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम असंवैधानिक होगा और अदालत में नहीं टिकेगा। नीतिगत मामलों के जानकारों का कहना है कि ऐसी नीति देश में एकीकृत श्रम बाजार के निर्माण की प्रक्रिया को भी नुकसान पहुंचाएगी।
सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े कहते हैं, ‘पहली नजर में ऐसा कोई भी कानून संविधान के अनुच्छेद 15 का उल्लंघन होगा। अनुच्छेद 15 राज्य द्वारा जाति, धर्म, लिंग, नस्ल और जन्म स्थान के आधार पर नागरिकों में भेद करने को रोकता है।’ हेगड़े ने कहा कि रोजगार में स्थानीय लोगों को आरक्षण जन्म स्थान और निवास स्थान के आधार पर दिया जा सकता है लेकिन इनमें पहला कदम जहां असंवैधानिक है वहीं दूसरे को भी भेदभावपूर्ण होने के कारण अदालत में चुनौती दी जा सकती है।
अपनी बात को स्पष्ट करते हुए हेगड़े बताते हैं कि अदालतों ने शिक्षा में आरक्षण को उस समय जायज माना जब राज्य सरकारों ने यह शर्त लगाई कि सरकारी संस्थानों में स्थान सुरक्षित करने के लिए यह आवश्यक होगा कि संबंधित व्यक्ति एक खास स्थान का निवासी हो या उसने राज्य के निर्धारित बोर्ड से परीक्षा पास की हो। यदि रोजगार संबंधी नया कानून कहता है कि सरकारी नौकरियां किसी खास विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण छात्रों को ही दी जाएंगी तब शायद यह बरकरार रहे लेकिन फिर भी इसे कानूनी चुनौतियों का सामना तो करना ही होगा।
चौहान ने बुधवार को कहा कि इस आरक्षण के लिए कानून में शीघ्र बदलाव किया जाएगा। इससे पहले स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में उन्होंने कहा था कि स्थानीय युवाओं को कक्षा 10 और 12 की अंकसूची के आधार पर रोजगार देने की व्यवस्था की जाएगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घोषणा आगामी आम चुनाव को देखते हुए की गई है। 22 विधायकों के 10 मार्च को इस्तीफा देने के बाद नियमत: इन सीटों पर 10 सितंबर तक उपचुनाव हो जाने चाहिए। प्रदेश में दो विधायकों के निधन के बाद कुल 24 सीटों पर उपचुनाव होने हैं। प्रदेश की भाजपा सरकार के 14 मंत्री विधायक तक नहीं हैं। 24 खाली सीटों में से 16 ग्वालियर, मुरैना, भिंड और गुना में हैं जो ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव वाला क्षेत्र है। प्रदेश में कांग्रेस सरकार के गिरने में सिंधिया और उनके समर्थकों की निर्णायक भूमिका रही।
कोविड-19 महामारी के कारण यदि उपचुनाव टलते हैं तो चौहान प्रसन्न होंगे। यह संभव है क्योंकि निर्वाचन आयोग, कानून मंत्रालय से चर्चा के बाद देश में कई स्थानों पर चुनाव टाल चुका है। हालांकि मध्य प्रदेश के बारे में उसने अब तक कोई घोषणा नहीं की है। परंतु उसने नए चुनावी प्रोटोकॉल की घोषणा अवश्य की है जिससे यही संकेत निकलता है कि प्रदेश में उपचुनाव समय पर कराए जाएंगे।
कुल 230 सदस्यों वाली मध्य प्रदेश विधानसभा में भाजपा के 107 विधायक हैं और पूर्ण बहुमत 116 विधायकों का है। भाजपा को उपचुनाव में कम से कम नौ सीटें हासिल करना आवश्यक है।
सार्वजनिक नीति के जानकार भी कहते हैं कि रोजगार में स्थानीय लोगों का आरक्षण का विचार सही नहीं है। यह आत्मनिर्भर भारत के विचार के भी खिलाफ है क्योंकि यह देश को एकीकृत श्रम बाजार नहीं बनने देगा।
पूर्व ग्रामीण विकास सचिव के पी कृष्णन कहते हैं कि एक राजनीतिक अर्थव्यवस्था व्यवस्था उस समय प्रवासी श्रमिकों के विरोध से विकसित होती है जब समृद्ध राज्यों में ऐसे श्रमिकों की आवक मेहनताने में गिरावट की वजह बनती है। इससे क्षेत्रीय और स्थानीय नेताओं को प्रवासी विरोधी भावनाएं भड़काने तथा स्थानीय श्रमिकों के अनुकूल नीतियों को बढ़ावा देने का मौका मिलता है। कृष्णन कहते हैं कि रोजगार में स्थानीय लोगों को आरक्षण देने की नीति अंतरराज्यीय कृषि व्यापार से संबंधित हालिया निर्णयों से पीछे हटने के समान होगा। वह कहते हैं कि एक बाजार ऐसा भी है जहां दिक्क्तें कम होने के बजाय बढ़ रही हैं और वह है श्रम बाजार। कृष्णन के मुताबिक, ‘अलग-अलग वजहों से विभिन्न राज्यों (जहां से प्रवासी आते हैं और जहां वे जाते हैं) के नेताओं ने ऐसे बयान दिए हैं जिनसे लगता है कि श्रमिकों के अंतरराज्यीय प्रवासन में और अड़चन आ सकती हैं। कुछ राज्यों ने यह घोषणा भी की है कि वे अपने यहां के श्रमिकों को प्राथमिकता देंगे। अन्य राज्यों ने कहा हैकि वे अपने श्रमिकों को अन्य राज्यों में जाने की इजाजत देने की एक प्रणाली स्थापित करेंगे और इस दौरान इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि उनके साथ कैसा व्यवहार किया गया।’ कृष्णन के मुताबिक ये सारी बातें देश में एकीकृत श्रम बाजार तैयार करने की राह में मुश्किल पैदा करेंगी।
चौहान ने अपने पूर्ववर्ती कमल नाथ के उलट निजी क्षेत्र के रोजगार में स्थानीय युवाओं के लिए आरक्षण की बात नहीं कही है। जाहिर है उनकी घोषणा का संबंध आगामी उपचुनावों से है।

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First Published - August 19, 2020 | 11:20 PM IST

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