पारदर्शिता और कारोबारी सुगमता में सुधार लाने के उद्देश्य से सीमा शुल्क विभाग सोमवार से खेपों की देशव्यापी संपर्क रहित मूल्यांकन के पहले चरण की शुरुआत करेगा। प्रणाली के तहत अधिकारियों की ओर से खेपों का मूल्यांकन इलेक्ट्रॉनिक तरीके से किया जाएगा, जिसका उस बंदरगाह से कोई लेनादेना नहीं होगा जहां माल पहुंचा है।
कुछ विशेष सामानों की संपर्करहित मूल्यांकन के साथ इसके पहले चरण की शुरुआत चेन्नई और बेंगलूरु में होगी और वर्ष 2020 के अंत तक पूरे देश में इसका विस्तार कर दिया जाएगा।
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने एक परिपत्र में कहा, ‘बोर्ड ने चरणबद्ध तरीके से संपर्करहित (फेसलेस) मूल्यांकन शुरू करने का निर्णय लिया है…पहले चरण की शुरुआत 8 जून, 2020 को बेंगलूरु और चेन्नई में होगी। इसमें मुख्य तौर पर उन आयातित सामानों को शामिल किया जाएगा, जिन्हें सीमा शुल्क टैरिफ अधिनियम, 1975 के अध्याय 84 और 85 में रखा गया है।’ सीमा शुल्क टैरिफ अधिनियम के अध्याय 84 और 85 में इलेक्ट्रिकल मशीनरी, बॉयलर, नाभिकीय रिएक्टर, टेलीविजन इमेज और साउंड रिकॉर्डर, कलयंत्र और मैकेनिकल उपकरण शामिल हैं। इस सुविधा के पहले चरण की शुरुआत केवल बेंगलूरु और चेन्नई के सीमा शुल्क क्षेत्रों में किया जाएगा।
इसमें आगे कहा गया है कि पूरे भारत के लिए संपर्करहित मूल्यांकन का नियम 31 दिसंबर, 2020 तक लागू कर दिया जाएगा।
आयकर विभाग पहले ही अक्टूबर 2019 से ई-मूल्यांकन शुरू कर चुका है और अब तक 100 से अधिक मामलों का मूल्यांकन पूरा कर चुका है और 48,000 से अधिक मामलों में नोटिस भेज चुका है। विभाग के इस कदम से मूल्यांकन को गुप्त तरीके से किया जा सकेगा और मूल्यांकन करने वाले अधिकारी और आयातक के बीच भौतिक संपर्क में कमी आएगी। इससे देश भर में मूल्यांकन में एकरूपता सुनिश्चित होगी और क्षेत्र विशेष के लिए दृष्टिकोण और कार्यात्मक विशिष्टता को बढ़ावा मिलेगा, जिससे लेनदेन की लागतों और व्यापारों के बीच अनिश्चितता में कमी लाने में मदद मिलेगी।
सीबीआईसी ने अपने इस पहल पर 3 मार्च, 2020 तक साझेदारों से विचार मांगे थे।
केपीएमजी के पार्टनर हरप्रीत सिंह ने कहा, ‘संपर्करहित मूल्यांकन एक दोधारी तलवार है। एक तरफ यह भौतिक संपर्क और किसी संभावित पक्षपात में कटौती करेगा तो दूसरी तरफ यह एफएजी (संपर्करहित मूल्यांकन समूहों) के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।’