विमान मरम्मत फर्मों पर एएआई का डोरा

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 9:27 AM IST

सरकार के स्वामित्व वाली भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) विमान मरम्मत करने वाली कंपनियों को आकर्षित करने के लिए तमाम तरह की रियायत देने की तैयारी कर रही है। इसी क्रम में एएआई ने रखरखाव, मरम्मत एवं ओवरहॉल इकाइयों (एमआरओ) को प्रोत्साहित करने के लिए अपने हवाई अड्डों पर संयंत्र स्थापित करने पर रॉयल्टी को खत्म करने और पट्टा किराया में भारी छूट देने की योजना बनाई है।
भारतीय विमानन कंपनियां कुल मिलाकर 1.4 अरब डॉलर मूल्य के रखरखाव कार्यों में से करीब 85 फीसदी कार्य विदेश में कराती हैं। ऐसे में सरकार को उम्मीद है कि इस प्रोत्साहन से इस क्षेत्र में निवेश आकर्षित होने के अलावा रोजगार के अवसर पैदा होंगे और आयात पर निर्भरता कम होगी।
पिछले साल सरकार ने विमानों के मरम्मत एवं रखरखाव संबंधी कार्यों पर वस्तु एवं सेवा कर की दर को 18 फसदी से घटाकर  5 फीसदी कर दिया था। इसके अलावा उद्योग को और अधिक प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरकार ने हवाई अड्डों पर विमान मरम्मत इकाइयां स्थापित करने के लिए कंपनियों को रियायती दरों पर भूमि उपलब्ध करने की योजना बनाई है। इसके लिए भोपाल, चंडीगढ़, चेन्नई, हैदराबाद (बेगमपेट), जुहू, कोलकाता, तिरुपति आदि हवाई अड्डों की पहचान की गई है। एएआई के पास दिल्ली में भी भूखंड है और उसका उपयोग इसके लिए करने पर विचार किया जा रहा है।
भारत में हवाई अड्डे एमआरओ फर्मों से न्यूनतम 13 फीसदी रॉयल्टी वसूलते हैं जिससे उनके वार्षिक राजस्व पर मुनाफा मार्जिन कम हो जाता है। नागर विमानन मंत्रालय ने एमआरओ नीति को अपनी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है और अब इसे एएआई बोर्ड की मंजूरी का इंतजार है।
एएआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हम भारत में एमआरओ निवेश को आकर्षित करने के लिए एक नीति पर काम कर रहे हैं। हमने पहले ही छह हवाई अड्डों पर उड़ान प्रशिक्षण स्कूल स्थापित करने के लिए अभिरुचि पत्र जारी कर दिए हैं। हम एमआरओ और प्रशिक्षण स्कूल दोनों के लिए एक उपयुक्त माहौल तैयार रहे हैं। इससे प्रशिक्षु पायलटों और विमानन कंपनियों की लागत कम होगी और विदेशी मुद्रा को देश से बाहर जाने में कमी आएगी।’
एयर इंडिया इंजीनियरिंग सर्विसेज लिमिटेड, एयर वक्र्स और जीएमआर एयरो टेक्निक विमानन कंपनियों को नियमित और प्रमुख रखरखाव सेवाएं प्रदान करती हैं। निजी और बिना समय-सारणी वाले ऑपरेटरों पर ध्यान केंद्रित करने वाली कंपनी इंडैमर एविएशन ने विमानन कंपनियों को अपनी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए नागपुर में एक एमआरओ की स्थापना की है।
एमआरओ उद्योग के एक दिग्गज ने कहा, ‘मूल्य के लिहाज से लगभग 40 से 45 फीसदी रखरखाव संबंधी काम इंजन पर होता है। एयर इंडिया को छोड़कर किसी अन्य विमानन कंपनी के पास भारत में इंजन ओवरहॉल संबंधी प्रमुख काम करने की क्षमता नहीं है। उपकरण संबंधी ओवरहॉल का काम भी काफी हद तक आउटसोर्स किया जाता है। यदि हमें एमआरओ उद्योग को बढ़ावा देना है तो मूल उपकरण विनिर्माताओं के साथ साझेदारी करने की आवश्यकता होगी। कर संबंधी रियायतें भी इस क्षेत्र की मदद करेंगी, लेकिन विनिर्माताओं से मंजूरी लेना आवश्यक है।’
एएआई की इस पहल से लोग काफी आशान्वित हैं। इंडैमर एविएशन के मुख्य कार्याधिकारी राजीव गुप्ता ने कहा, ‘यह नीति नए निवेशकों को आकर्षित करेगी और भारत में एमआरओ क्षेत्र को प्रतिस्पर्धी बनाएगी।’
एमआरओ एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महासचिव पुलक सेन ने कहा, ‘प्रस्तावित लाभ को एएआई के हवाई अड्डों पर मौजूदा एमआरओ तक भी पहुंचाना चाहिए और इसे केवल नए एमआरओ तक सीमित नहीं रखना चाहिए। हम नागर विमानन मंत्रालय से इस आग्रह के साथ चर्चा कर रहे हैं।’

First Published : January 20, 2021 | 11:38 PM IST