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US-Iran Conflict: ईरान पर अभी हमला नहीं…लेकिन अमेरिका ने रखे सारे विकल्प खुले!

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अमेरिका ने फिलहाल ईरान पर जमीनी हमले से इनकार किया है, लेकिन पश्चिम एशिया में सैन्य तैनाती बढ़ाकर दबाव और विकल्प दोनों बनाए रखे हैं।

Last Updated- March 28, 2026 | 10:38 AM IST
US signals to allies no immediate invasion of Iran, keeps options open
हाल के दिनों में रक्षा विभाग ने पश्चिम एशिया में करीब 5,000 सैनिकों वाले दो मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट्स तैनात किए हैं। | फोटो क्रेडिट: ब्लूमबर्ग

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के प्रशासन ने अपने सहयोगी देशों को संकेत दिया है कि फिलहाल ईरान पर जमीनी हमला करने की कोई तत्काल योजना नहीं है। हालांकि, पश्चिम एशिया में हजारों अमेरिकी सैनिकों की तैनाती की जा रही है। इस मामले से जुड़े लोगों ने यह जानकारी दी है।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्थिति कभी भी बदल सकती है और ट्रंप जरूरत पड़ने पर अपने फैसले में बदलाव कर सकते हैं या सैन्य कार्रवाई का आदेश दे सकते हैं। तैनात किए जा रहे सैनिकों का इस्तेमाल कई तरह से किया जा सकता है, जैसे कि वहां मौजूद अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षित निकासी में मदद करना और साथ ही अमेरिका की रणनीतिक स्थिति को मजबूत दिखाना।

अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने कहा कि अमेरिका अपने लक्ष्यों को बिना जमीनी सैनिकों के भी हासिल कर सकता है, लेकिन सैनिकों की मौजूदगी से राष्ट्रपति के पास अलग-अलग विकल्प बने रहते हैं।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति को हर स्थिति के लिए तैयार रहना होता है। सरकार इस पर सार्वजनिक रूप से ज्यादा जानकारी साझा नहीं करेगी, लेकिन हर संभावित परिस्थिति के अनुसार कदम उठाने की तैयारी की जा रही है।

वॉशिंगटन से मिली जानकारी के अनुसार, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि राष्ट्रपति को अलग-अलग विकल्प देना पेंटागन की जिम्मेदारी है। अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि डॉनल्ड ट्रंप ने फिलहाल किसी भी जगह जमीनी सैनिक भेजने की योजना से इनकार किया है। साथ ही चेतावनी दी कि अगर ईरान समझौता नहीं करता है, तो उस पर पहले से कहीं ज्यादा कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इधर, हाल के दिनों में अमेरिकी रक्षा विभाग ने पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। करीब 5,000 सैनिकों वाले दो मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट्स को क्षेत्र में भेजा गया है। इनमें से पहला यूनिट शनिवार तक पहुंचने वाला है, जबकि दूसरे को पहुंचने में थोड़ा समय लगेगा। इसके अलावा सेना की 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के लगभग 2,000 सैनिकों की तैनाती के भी आदेश दिए गए हैं।

इन सैन्य गतिविधियों के बाद यह अटकलें तेज हो गई हैं कि अमेरिका किसी बड़े कदम की तैयारी कर रहा है। संभावित विकल्पों में ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर कब्जा करना, उसके परमाणु सामग्री को अपने नियंत्रण में लेना या होरमुज जलडमरूमध्य के पास के तटीय इलाकों पर नियंत्रण करना शामिल हो सकता है।

अमेरिका को बड़े सैन्य अभियान के लिए ज्यादा सैनिकों की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे ऑपरेशन लंबा समय ले सकते हैं, जो डॉनल्ड ट्रंप द्वारा तय चार से छह हफ्तों की समयसीमा से आगे जा सकते हैं। साल 2003 में इराक युद्ध की शुरुआत में अमेरिका ने करीब 1.5 लाख सैनिक उतारे थे, जबकि सहयोगी देशों के साथ यह संख्या लगभग दोगुनी थी।

गुरुवार को ट्रंप ने ईरान को दी गई समयसीमा बढ़ा दी। उन्होंने कहा था कि अगर ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने पर सहमत नहीं होता, तो उसके पावर इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले किए जा सकते हैं। हालांकि समयसीमा बढ़ने से फिलहाल यह अटकलें शांत हो गई हैं कि अमेरिका अपने हमले और तेज करेगा। यह अभियान 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल की कार्रवाई के साथ शुरू हुआ था।

शुक्रवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने फ्रांस में जी7 देशों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इस बैठक का मकसद यूरोपीय सहयोगियों से होर्मुज को सुरक्षित करने के लिए समर्थन जुटाना था। सूत्रों के मुताबिक, रूबियो ने कहा कि यह युद्ध महीनों नहीं बल्कि हफ्तों में खत्म हो सकता है। जब उनसे पूछा गया कि क्या बिना जमीनी सेना के स्ट्रेट को खोला जा सकता है, तो उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

इससे पहले भी ट्रंप प्रशासन ईरान और उसके सहयोगियों के सामने एक बात कह चुका है और बाद में अलग कदम उठा चुका है। साल 2025 में ट्रंप ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले का आदेश दिया था, जबकि दोनों पक्ष बातचीत जारी रखने की बात कर रहे थे और ट्रंप बार-बार कह रहे थे कि ईरान समझौता करना चाहता है।

हाल ही में भी अमेरिका और इजराइल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अगली बातचीत के लिए सहमति बनने के बाद हमले शुरू कर दिए।

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First Published - March 28, 2026 | 10:38 AM IST

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