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Oil Crisis: तेल संकट का असर! कहीं स्कूल बंद तो कहीं WFH, एशिया में सरकारों ने उठाए सख्त कदम

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पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति पर असर पड़ने से एशिया के कई देशों ने ईंधन संकट से निपटने के लिए आपात आर्थिक और ऊर्जा बचत उपाय लागू किए हैं।

Last Updated- March 10, 2026 | 11:40 AM IST
crude oil
Representative Image

Oil Crisis: पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष का असर अब एशियाई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर साफ दिखाई देने लगा है। अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर हमले के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है, जिसके जवाब में तेहरान ने भी इजराइल और अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इस टकराव का असर तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर पड़ा है, जिससे कई देशों में ईंधन संकट की स्थिति बनने लगी है।

स्थिति को संभालने के लिए एशिया के कई देशों ने ऊर्जा बचाने और नागरिकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ को कम करने के लिए आपात कदम उठाए हैं। कहीं स्कूल और विश्वविद्यालय बंद किए जा रहे हैं तो कहीं सरकारी दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम लागू किया गया है। कई सरकारों ने ईंधन की कीमतों पर नियंत्रण और करों में राहत जैसे कदम भी उठाए हैं।

तनाव का सबसे बड़ा असर समुद्री व्यापार के महत्वपूर्ण मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पड़ा है। ईरान और ओमान के बीच स्थित यह संकरा समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और गैस व्यापार का एक बड़ा हिस्सा संभालता है। इस क्षेत्र में बढ़ते जोखिम के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी उतार चढ़ाव देखने को मिला। सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, हालांकि मंगलवार को इसमें गिरावट आई और यह करीब 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई।

पाकिस्तान ने लागू किए कड़े कदम

तेल आपूर्ति में कमी से निपटने के लिए पाकिस्तान सरकार ने कई सख्त फैसले लिए हैं। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईंधन बचाने के उद्देश्य से दो सप्ताह के लिए स्कूल बंद करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही सरकारी दफ्तरों में आधे कर्मचारियों को घर से काम करने का निर्देश दिया गया है।

सरकार ने अगले दो महीनों के लिए सरकारी विभागों के ईंधन भत्ते में 50 प्रतिशत की कटौती कर दी है। इसके अलावा बड़ी संख्या में सरकारी वाहनों को सड़कों से हटाने और विभागीय खर्च में कमी करने का भी फैसला लिया गया है। सरकार ने नए सरकारी वाहन, एयर कंडीशनर और फर्नीचर खरीदने पर भी रोक लगा दी है। मंत्रियों और अधिकारियों की अधिकांश विदेशी यात्राओं को भी सीमित कर दिया गया है।

बांग्लादेश में ईंधन बिक्री पर सीमा

बांग्लादेश में भी तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। यहां घबराहट में खरीदारी और ईंधन जमा करने की प्रवृत्ति बढ़ने के बाद सरकार ने प्रतिदिन ईंधन बिक्री की सीमा तय कर दी है। इसके साथ ही बिजली की खपत कम करने के लिए विश्वविद्यालयों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है।

बांग्लादेश अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पश्चिम एशियाई देशों से गैस आयात पर काफी हद तक निर्भर है। ऐसे में क्षेत्रीय तनाव का असर उसकी ऊर्जा व्यवस्था पर सीधे पड़ रहा है।

फिलीपींस में चार दिन के कार्य सप्ताह की तैयारी

फिलीपींस ने ऊर्जा बचत के उद्देश्य से सरकारी कार्यालयों में चार दिन का कार्य सप्ताह लागू करने की योजना बनाई है। इस व्यवस्था के तहत अधिकांश सरकारी विभाग सप्ताह में केवल चार दिन काम करेंगे। हालांकि अस्पताल, दमकल सेवा और अन्य जरूरी सेवाओं को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है ताकि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मनीला, सेबू और नेग्रोस ऑक्सिडेंटल जैसे कई स्थानीय प्रशासन ने सोमवार से इस नए कार्य शेड्यूल को अपनाना शुरू कर दिया है। सरकार का मानना है कि इससे ऊर्जा की खपत कम करने में मदद मिलेगी और ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर भी कुछ हद तक कम किया जा सकेगा।

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फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने हाल ही में कहा कि देश ऐसे संघर्ष के असर से जूझ रहा है जिसे उसने खुद नहीं चुना है। फिलीपींस अपनी तेल जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार चढ़ाव का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

दक्षिण कोरिया ने ईंधन कीमतों पर लगाया नियंत्रण

दक्षिण कोरिया ने फिलहाल ऊर्जा बचत से जुड़े आपातकालीन उपाय लागू नहीं किए हैं, लेकिन सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर नियंत्रण लगाने का फैसला किया है। इसके साथ ही संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वे ईंधन की जमाखोरी, मिलीभगत और कीमतों में हेरफेर करने की कोशिशों पर कड़ी नजर रखें।

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने कहा है कि मौजूदा वैश्विक स्थिति का देश की अर्थव्यवस्था पर स्पष्ट दबाव पड़ रहा है। सरकार स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कदम उठाने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर आर्थिक दबाव बढ़ता है तो सरकार 100 ट्रिलियन वोन के वित्तीय बाजार स्थिरीकरण कार्यक्रम का विस्तार भी कर सकती है।

ताइवान, थाईलैंड और वियतनाम ने भी उठाए कदम

ऊर्जा संकट की संभावनाओं को देखते हुए ताइवान ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की है। हालांकि सरकार ने उपभोक्ताओं और व्यवसायों को राहत देने के लिए कमोडिटी टैक्स में कटौती करने का फैसला भी किया है ताकि बढ़ी हुई कीमतों का असर कुछ कम किया जा सके।

थाईलैंड ने भी ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए डीजल के दाम 15 दिनों तक सीमित रखने की योजना बनाई है। इससे परिवहन और जरूरी सेवाओं पर पड़ने वाले असर को कम करने की कोशिश की जा रही है।

वहीं वियतनाम सरकार ने संकेत दिया है कि वह ईंधन आयात पर लगने वाले टैक्स को अस्थायी रूप से हटाने की तैयारी कर रही है। इससे घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।

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First Published - March 10, 2026 | 11:40 AM IST

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