Middle East Crisis: अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने सोमवार को कहा कि उन्हें नहीं लगता कि इजरायल अपने ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में परमाणु हथियार का इस्तेमाल करेगा। उन्होंने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह स्पष्ट किया कि इजरायल ऐसा कदम नहीं उठाएगा।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “इजरायल ऐसा नहीं करेगा। इजरायल कभी ऐसा नहीं करेगा।” उनके इस बयान को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ रहा है और युद्ध के और अधिक गंभीर रूप लेने की आशंका जताई जा रही है।
दरअसल, हाल ही में व्हाइट हाउस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्रिप्टो मामलों के सलाहकार David Sacks ने एक इंटरव्यू के दौरान इस बात को लेकर चिंता जताई थी कि कहीं Middle East Crisis को और आगे बढ़ाते हुए परमाणु विकल्प पर विचार न करने लगे। Sacks ने कहा था कि इस तरह की संभावना को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि इससे स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।
इन चिंताओं के बीच राष्ट्रपति ट्रंप का बयान एक तरह से स्थिति को शांत करने वाला माना जा रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका और इजरायल के सैन्य उद्देश्यों में सामंजस्य बना हुआ है। एक दिन पहले भी उन्होंने दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग और समझ को लेकर सकारात्मक टिप्पणी की थी।
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रविवार को एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और इजराइल के बीच संबंध बेहद मजबूत हैं और दोनों देशों की सेनाएं आपस में अच्छी तरह समन्वय करके काम कर रही हैं। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि दोनों देशों के रणनीतिक लक्ष्य पूरी तरह समान नहीं हो सकते, लेकिन सहयोग का स्तर काफी ऊंचा है।
इसके अलावा ट्रंप ने सोमवार को व्हाइट हाउस में एक और महत्वपूर्ण दावा किया। उन्होंने बताया कि एक पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ने उनसे बातचीत में यह इच्छा जताई थी कि काश उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान ईरान के खिलाफ कार्रवाई की होती। हालांकि ट्रंप ने उस पूर्व राष्ट्रपति का नाम बताने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह किसी को असहज स्थिति में नहीं डालना चाहते।
गौरतलब है कि वर्तमान समय में अमेरिका के चार पूर्व राष्ट्रपति जीवित हैं, जिनमें Bill Clinton, George W. Bush, Barack Obama और Joe Biden शामिल हैं। ट्रंप ने इनमें से किस नेता की बात की, यह स्पष्ट नहीं किया।
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ईरान के खिलाफ अपनी नीतियों का बचाव करते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान पिछले लगभग 50 वर्षों से अमेरिका के लिए समस्याएं खड़ी करता रहा है, इसलिए कड़ा रुख अपनाना जरूरी था। हालांकि उनके इस कदम को लेकर रिपब्लिकन पार्टी के भीतर ही “अमेरिका फर्स्ट” विचारधारा वाले कुछ नेताओं ने सवाल उठाए हैं। इसके साथ ही इस सैन्य कार्रवाई का असर तेल की कीमतों पर भी देखने को मिला है, जिससे गैस की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है।
वहीं, अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने ट्रंप के फैसले का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देना चाहिए और हालिया सैन्य कार्रवाई राष्ट्रपति के नेतृत्व में की गई है। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा और सफलता के लिए प्रार्थना करें।










