पश्चिम एशिया में इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष और तेज हो गया है। ईरान की राजधानी तेहरान में रविार की रात एक तेल भंडारण इकाई पर हमला किया गया। इजरायल की सेना ने पुष्टि की कि उसने तेहरान में ईंधन भंडारण केंद्रों पर हमला किया है। ऐसा प्रतीत होता है कि युद्ध में पहली बार किसी असैन्य औद्योगिक प्रतिष्ठान को निशाना बनाया गया है। इजरायल ने लेबनान में हमले तेज कर दिए हैं और साइप्रस से लेकर श्रीलंका के तटवर्ती जलक्षेत्र तक हमले होने की खबरें हैं। ईरान ने भी खाड़ी क्षेत्र में अपने पड़ोसी देशों पर मिसाइल एवं ड्रोन दागे हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और नेतन्याहू ने नौ दिन पुराने अभियान को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है, जिसका असर पूरे क्षेत्र में फैल चुका है और फिलहाल इसका कोई अंत नजर नहीं आ रहा है। दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने पश्चिम एशिया में अमेरिकी ठिकानों पर हमले तेज करने की धमकी दी।
बहरीन ने आरोप लगाया है कि ईरान के ड्रोन हमले से उसके एक जल संयंत्र (विलवणीकरण संयंत्र ) को नुकसान पहुंचा है। नौ दिनों के युद्ध के दौरान पहली बार ऐसा हुआ है जब किसी विलवणीकरण (खारे पानी को पीने योग्य बनाना) संयंत्र को निशाना बनाया गया है। फारस की खाड़ी के तट पर सैकड़ों विलवणीकरण संयंत्र स्थित हैं और इस क्षेत्र के अरब देश पीने के पानी के लिए इन संयंत्रों पर बहुत अधिक निर्भर हैं।
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के नौवें दिन इजरायल ने रविवार तड़के दक्षिणी लेबनान पर हमले तेज कर दिए और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने युद्ध के अगले चरण में कई आश्चर्यजनक कदम उठाए जाने की चेतावनी दी।
लेबनान में हुए हाल के हमलों में 12 और लोग मारे गए है, जिससे वहां मरने वालों की संख्या बढ़कर 300 से अधिक हो गई है। उसकी सेना ने कहा कि यह हमला ईरान समर्थित बलों को खत्म करने के उद्देश्य से किया गया था। इससे पहले इजरायल ने लेबनान के बड़े हिस्से को खाली करने का आदेश दिया था।
इजरायल और अमेरिका ने 28 फरवरी को युद्ध की शुरुआत करते हुए कहा था कि उन्होंने ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को निशाना बनाने तथा सरकार को गिराने की कोशिश करने के लिए हमले किए। इसके बाद ईरान ने भी जवाबी हमले किए। इस युद्ध का व्यापक पैमाने पर असर दिख रहा है, वैश्विक बाजार हिल गए हैं, हवाई यात्रा बाधित हुई है और सैकड़ों इजरायली एवं अमेरिकी हवाई हमलों से ईरान का नेतृत्व कमजोर हो गया है।
ईरान के नेताओं ने जोर देकर कहा कि तेहरान की युद्ध रणनीति नहीं बदलेगी। युद्ध में तनाव कम करने की कोशिश करने वाले नेताओं और अमेरिका एवं इजरायल से लड़ाई के लिए प्रतिबद्ध अन्य कट्टरपंथियों के बीच मतभेद किसी भी कूटनीतिक प्रयास को जटिल बना सकते हैं। युद्ध के दौरान शुरुआती हवाई हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने के बाद से ईरान की निगरानी कर रही नेतृत्व परिषद के तीन सदस्यों में से दो की ओर से परस्पर विरोधी बयान आए।
पेजेश्कियान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग खारिज कर दी। पेजेश्कियान ने कहा, ‘यह एक ऐसा सपना है, जिसे उन लोगों को अपने साथ कब्र में ले जाना चाहिए।’
पेजेश्कियान के संदेश के तुरंत बाद, ट्रंप ने शनिवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में चेतावनी दी कि युद्ध में और भी ईरानी अधिकारी निशाने पर आएंगे।
इस बीच, पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य कर्मियों एवं संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए ईरान के साथ रूस द्वारा सूचना साझा करने की खबरों को अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने शनिवार को तवज्जो नहीं दी।